महाराष्ट्र सरकार की सबसे लोकप्रिय ‘मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिण योजना’ (Majhi Ladki Bahin Yojana) के लाभार्थियों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। मार्च और अप्रैल 2026 महीने की किस्त का इंतजार कर रही महिलाओं के खातों में जल्द ही पैसे ट्रांसफर होने वाले हैं। कुछ महिला लाभार्थियों के खातों में पिछले हफ्ते 14 मई से ही इन दोनों महीनों की राशि जमा होना शुरू हो गई थी, लेकिन तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से कई महिलाएं अब भी अपने 3000 रुपये की किस्त की राह देख रही थीं। अब सरकार के नए फैसले के बाद इन बाकी बची महिलाओं का इंतजार भी खत्म होने जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार, राज्य सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहीन योजना (Ladli Behen Scheme) के लिए 730.51 करोड़ रुपये के फंड को मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार इस योजना के तहत हर महीने करीब 3,700 करोड़ रुपये लाभार्थियों में बांटती है, जिसमें हर पात्र महिला को 1,500 रुपये दिए जाते हैं। हालांकि, ई-केवाईसी के बाद लाडली बहनों की संख्या में बड़ी कमी आई है। इस साल बजट में योजना के लिए 26,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल के 36,000 करोड़ रुपये के मुकाबले कम है।
लाडली बहनों के लिए भारी-भरकम फंड को मंजूरी
भाजपा नीत महायुति सरकार की सबसे चर्चित योजनाओं में शामिल इस योजना को जुलाई 2024 में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। पिछले सप्ताह यानी 14 मई से कई महिलाओं के खातों में मार्च और अप्रैल महीने की राशि जमा होना शुरू हुई थी। हालांकि बड़ी संख्या में महिलाएं अभी भी किस्त आने का इंतजार कर रही थीं।
इसी बीच महाराष्ट्र शासन के सामाजिक न्याय विभाग ने नया शासन निर्णय (GR) जारी किया है। विभाग ने वित्त विभाग से हरी झंडी मिलने के बाद योजना की मार्च की किस्त के लिए 365.2550 करोड़ रुपये और अप्रैल के लिए भी 365.2550 करोड़ रुपये जारी करने की स्वीकृति दी है। इस तरह कुल 730.51 करोड़ रुपये महिला एवं बाल विकास विभाग को वितरित किए जाएंगे।
सरकार के इस कदम के बाद अब माना जा रहा है कि जिन लाडली बहनों के खाते में अभी तक पैसे नहीं पहुंचे हैं, उन्हें जल्द ही दोनों महीनों की राशि मिल सकती है। इससे लाखों लाभार्थी महिलाओं को बड़ी राहत मिलने वाली है।
सरकार की ओर से महिलाओं को बैंक खाता आधार से लिंक रखने और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सेवा सक्रिय रखने की सलाह भी दी गई है। कई मामलों में तकनीकी कारणों या बैंक खाते की त्रुटियों की वजह से किस्त अटकने की बात सामने आई है।


