फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा में आज बिहार में चंद्रग्रहण लग रहा है। यह भारत में दिखने वाला इस साल का पहला और अंतिम खंडग्रास चंद्रग्रहण है। चंद्रग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। इसलिए इस ग्रहण का सूतक 3 मार्च की सुबह 8:50 बजे से ही शुरू हो जाएगा। ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा आज मंगलवार को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में खंडग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। खंडग्रास चंद्रग्रहण को पूरे भारत में देखा जाएगा। यह चंद्रग्रहण आज शाम 05:50 बजे से 06:46 बजे तक रहेगा। इस ग्रहण का समय काल लगभग 1 घंटे का होगा। चंद्रग्रहण के समय और उसके बाद पवित्र जल से स्नान करने से एक हजार वाजस्नेय यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। चंद्रग्रहण को लेकर महावीर मंदिर का पट लगभग 7 घंटों के लिए बंद रहेगा।
ग्रहण के बाद स्नान-दान से ग्रह दोष से मुक्ति ग्रहण काल में वेद मंत्र या बीज मंत्र का जाप, योग-मेडिटेशन, गायत्री मंत्र, हनुमान चालीसा आदि का पाठ करना श्रेष्यकर होता है। ऐसा करने से सभी राशि के जातक के दोष दूर होते हैं। ग्रहण समाप्त होने पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करने के बाद गंगाजल में ईत्र मिलाकर पूरे घर में छिड़काव करने से धनलक्ष्मी-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ग्रहण की समाप्ति पर स्नान-दान और धर्म कृत्य करने से कई प्रकार से लाभ होता है। इस दिन गुरु, ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान करने से समृद्धि और धन की देवी लक्ष्मी माता की विशेष कृपा होती है। दान में गेहूं, धान, चना, मसूर दाल, गुड़, अरवा चावल, सफेद-गुलाबी वस्त्र, चूड़ा, चीनी, चांदी-स्टील की कटोरी में खीर दान करना उत्तम होता है।
सूतक काल ये होते है वर्जित ज्योतिष गणना के अनुसार सूतक काल के समय को अशुभ माना गया है। इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कृत वर्जित होते है। सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पहले से और चंद्र ग्रहण में सूतक 9 घंटे पहले ही आरंभ हो जाता है और ग्रहण के खत्म होने के साथ इसका सूतक भी खत्म हो जाता है। सूतक काल में मंदिर में प्रवेश, मूर्ति का स्पर्श, भोजन करना, यात्रा, गौदोहन, मूर्ति पूजा और तुलसी के पौधे का स्पर्श वर्जित है। गर्भवती महिलाओं को चाकू और छुरी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर होता है।
रात 9 बजे मंदिर के पट खोले जाएंगे सूतक के कारण महाविर मंदिर का पट दोपहर 02:30 बजे से रात के 9 बजे तक बंद रहेगा। इस दौरान भक्त हनुमान जी सहित किसी भी देवी-देवता का दर्शन नहीं कर सकेंगे। ग्रहण समाप्त होने और शुद्धिकरण की प्रक्रिया के बाद रात 9:05 बजे मंदिर के पट फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। जो भी भक्त हैं, वह 02:30 बजे से पहले ही दर्शन कर सकेंगे। हालांकि, बुधवार से मंदिर का पट अपने निर्धारित समय पर ही खुलेगा।
इस्कॉन मंदिर में होगा महाभिषेक वहीं, इस्कॉन मंदिर में पूर्णिमा को लेकर भव्य आरती का आयोजन किया गया है। शाम 5 बजे कीर्तन होगी और फिर 6 बजे गौर कथा का आयोजन है। 7:00 बजे भगवान का महा अभिषेक होगा और 7:45 में 108 पकवानों का महाभोग लगाया जाएगा। 8:15 में महा आरती होगी और 8:30 से महाप्रसाद का वितरण भक्तों के बीच किया जाएगा। फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा में आज बिहार में चंद्रग्रहण लग रहा है। यह भारत में दिखने वाला इस साल का पहला और अंतिम खंडग्रास चंद्रग्रहण है। चंद्रग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। इसलिए इस ग्रहण का सूतक 3 मार्च की सुबह 8:50 बजे से ही शुरू हो जाएगा। ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा आज मंगलवार को पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में खंडग्रास चंद्रग्रहण लगेगा। खंडग्रास चंद्रग्रहण को पूरे भारत में देखा जाएगा। यह चंद्रग्रहण आज शाम 05:50 बजे से 06:46 बजे तक रहेगा। इस ग्रहण का समय काल लगभग 1 घंटे का होगा। चंद्रग्रहण के समय और उसके बाद पवित्र जल से स्नान करने से एक हजार वाजस्नेय यज्ञ के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है। चंद्रग्रहण को लेकर महावीर मंदिर का पट लगभग 7 घंटों के लिए बंद रहेगा।
ग्रहण के बाद स्नान-दान से ग्रह दोष से मुक्ति ग्रहण काल में वेद मंत्र या बीज मंत्र का जाप, योग-मेडिटेशन, गायत्री मंत्र, हनुमान चालीसा आदि का पाठ करना श्रेष्यकर होता है। ऐसा करने से सभी राशि के जातक के दोष दूर होते हैं। ग्रहण समाप्त होने पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करने के बाद गंगाजल में ईत्र मिलाकर पूरे घर में छिड़काव करने से धनलक्ष्मी-सौभाग्य की प्राप्ति होती है। ग्रहण की समाप्ति पर स्नान-दान और धर्म कृत्य करने से कई प्रकार से लाभ होता है। इस दिन गुरु, ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को दान करने से समृद्धि और धन की देवी लक्ष्मी माता की विशेष कृपा होती है। दान में गेहूं, धान, चना, मसूर दाल, गुड़, अरवा चावल, सफेद-गुलाबी वस्त्र, चूड़ा, चीनी, चांदी-स्टील की कटोरी में खीर दान करना उत्तम होता है।
सूतक काल ये होते है वर्जित ज्योतिष गणना के अनुसार सूतक काल के समय को अशुभ माना गया है। इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कृत वर्जित होते है। सूर्य ग्रहण में 12 घंटे पहले से और चंद्र ग्रहण में सूतक 9 घंटे पहले ही आरंभ हो जाता है और ग्रहण के खत्म होने के साथ इसका सूतक भी खत्म हो जाता है। सूतक काल में मंदिर में प्रवेश, मूर्ति का स्पर्श, भोजन करना, यात्रा, गौदोहन, मूर्ति पूजा और तुलसी के पौधे का स्पर्श वर्जित है। गर्भवती महिलाओं को चाकू और छुरी का प्रयोग नहीं करना चाहिए। क्योंकि इसका सीधा असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर होता है।
रात 9 बजे मंदिर के पट खोले जाएंगे सूतक के कारण महाविर मंदिर का पट दोपहर 02:30 बजे से रात के 9 बजे तक बंद रहेगा। इस दौरान भक्त हनुमान जी सहित किसी भी देवी-देवता का दर्शन नहीं कर सकेंगे। ग्रहण समाप्त होने और शुद्धिकरण की प्रक्रिया के बाद रात 9:05 बजे मंदिर के पट फिर से श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। जो भी भक्त हैं, वह 02:30 बजे से पहले ही दर्शन कर सकेंगे। हालांकि, बुधवार से मंदिर का पट अपने निर्धारित समय पर ही खुलेगा।
इस्कॉन मंदिर में होगा महाभिषेक वहीं, इस्कॉन मंदिर में पूर्णिमा को लेकर भव्य आरती का आयोजन किया गया है। शाम 5 बजे कीर्तन होगी और फिर 6 बजे गौर कथा का आयोजन है। 7:00 बजे भगवान का महा अभिषेक होगा और 7:45 में 108 पकवानों का महाभोग लगाया जाएगा। 8:15 में महा आरती होगी और 8:30 से महाप्रसाद का वितरण भक्तों के बीच किया जाएगा।


