KDMC Garbage Truck Accident: 12 साल के बेटे को खोने का दर्द किसी मां के लिए कितना गहरा होता है, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। मई 2021 में महाराष्ट्र के कल्याण में एक दर्दनाक हादसे में अमित जगदीश धाकड़ की जान चली गई थी। अमित सड़क पर खेल रहा था, तभी तेज रफ्तार से पीछे की ओर आ रहे नगर निगम के कचरा ट्रक ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई।
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, बेटे की मौत के बाद उसकी मां ने मुआवजे के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की। अब करीब चार साल बाद ठाणे मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल (MACT) ने मां के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया है। मुआवजे की रकम पर 9 प्रतिशत सालाना ब्याज भी मिलेगा।
कचरा ट्रक ने छीन ली 12 साल के बच्चे की जिंदगी
मामले के अनुसार, 22 मई 2021 को अमित कल्याण में एक रिहायशी इमारत के सामने सड़क पर खेल रहा था। इसी दौरान कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) का कचरा ट्रक तेज गति से पीछे की ओर आया और अमित को टक्कर मार दी। हादसे में बच्चे को गंभीर चोटें आईं और उसकी मौत हो गई। अमित की मां ने हादसे के बाद मुआवजे के लिए ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई MACT सदस्य आरवी मोहिते ने की।
ट्रक का फिटनेस सर्टिफिकेट 2013 से ही एक्सपायर था
सुनवाई के दौरान KDMC की ओर से दलील दी गई कि ट्रक का ड्राइवर एक निजी ठेकेदार Vishal Expert Services Pvt Ltd ने उपलब्ध कराया था। साथ ही कोविड महामारी के दौरान सरकार की ओर से जारी छूट का हवाला देते हुए वाहन के फिटनेस सर्टिफिकेट और ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता को लेकर अपना पक्ष रखा गया। हालांकि, RTO रिकॉर्ड से पता चला कि ट्रक का फिटनेस सर्टिफिकेट 10 मार्च 2013 को ही खत्म हो गया था और उसके बाद इसे कभी रिन्यू नहीं कराया गया। वहीं, ड्राइवर का ट्रांसपोर्ट कैटेगरी वाला ड्राइविंग लाइसेंस भी 13 अगस्त 2019 को एक्सपायर हो चुका था।
ट्रिब्यूनल ने KDMC को जिम्मेदार माना
ट्रिब्यूनल ने कहा कि 13 अगस्त 2019 को कोई लॉकडाउन नहीं था और KDMC कोविड के दौरान जारी सरकारी आदेश का हवाला देकर पुराने एक्सपायर लाइसेंस का लाभ नहीं उठा सकता। कोर्ट ने माना कि हादसे से संबंधित वाहन वैध ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस सर्टिफिकेट के बिना चलाया जा रहा था, जो बीमा पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि KDMC को निजी एजेंसी की ओर से उपलब्ध कराए गए ड्राइवरों के लाइसेंस की जांच करनी चाहिए थी। चूंकि कचरा ट्रक KDMC का था, इसलिए तीसरे पक्ष के दुर्घटना दावे में नगर निकाय अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
मां को मिलेगा 5 लाख मुआवजा
ट्रिब्यूनल ने 30,000 सालाना की अनुमानित आय और 15 के मल्टीप्लायर सहित अन्य मदों को ध्यान में रखते हुए कुल 5 लाख रुपये का मुआवजा तय किया। New India Assurance Company Ltd को यह रकम 9 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ जमा करने का आदेश दिया गया है। बीमा कंपनी को एक महीने के भीतर रकम ट्रिब्यूनल के बैंक खाते में जमा करनी होगी। इसके बाद यह राशि सीधे अमित की मां के खाते में ट्रांसफर की जाएगी। साथ ही बीमा कंपनी को पूरी रकम ट्रक के मालिक KDMC से वसूलने की अनुमति दी गई है।

