Telangana Congress Internal Politics: तेलंगाना कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में अचानक बदले तेवरों ने नई चर्चा छेड़ दी है। मुख्यमंत्री ए. रेवंथ रेड्डी के मुखर आलोचक रहे मुनुगोडे विधायक कोमाटिरेड्डी राजगोपाल रेड्डी का सार्वजनिक मंच पर मुख्यमंत्री से गर्मजोशी से मिलना महज औपचारिकता नहीं माना जा रहा। खास बात यह है कि यह घटनाक्रम कोंडा सुरेखा के मंत्रिमंडल से बाहर होने के तुरंत बाद सामने आया। ऐसे में कांग्रेस के भीतर पुराने नेताओं और मौजूदा नेतृत्व के बीच शक्ति-संतुलन को लेकर सवाल फिर उठने लगे हैं।
Revanth Reddy Rajagopal Reddy: गले मिलने से खारिज हुईं मतभेद की चर्चाएं
तेलंगाना कांग्रेस में पिछले कुछ समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच कोमाटिरेड्डी राजगोपाल रेड्डी और मुख्यमंत्री ए. रेवंथ रेड्डी की नजदीकी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, राजगोपाल रेड्डी ने 5 सितंबर को नाकरेकल में आयोजित कार्यक्रम में रेवंथ रेड्डी से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को गले लगाया। इसके बाद राजगोपाल रेड्डी ने नेतृत्व के बीच मतभेद की चर्चाओं को खारिज करते हुए सहयोग की बात कही।
कार्यशैली और ‘बाहरी लोगों’ पर उठाए थे सवाल
यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राजगोपाल रेड्डी लंबे समय से सरकार और मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे थे। अगस्त में हैदराबाद के एक कार्यक्रम में उन्होंने महत्वपूर्ण पदों पर बाहरी लोगों के प्रभाव को लेकर टिप्पणी की थी, जिसे राजनीतिक हलकों में रेवंथ खेमे पर निशाने के तौर पर देखा गया। इससे पहले भी वह पार्टी में हाल में आए नेताओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके थे।
राजगोपाल रेड्डी की राजनीतिक पृष्ठभूमि और असंतोष
राजगोपाल रेड्डी की राजनीतिक यात्रा भी इस पूरे घटनाक्रम को अहम बनाती है। 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले वह कांग्रेस में लौटे थे। इससे पहले उन्होंने बीजेपी का रुख किया था। कांग्रेस में वापसी के बाद भी मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने की चर्चा उनके असंतोष से जुड़ी रही।
कोंडा सुरेखा की मंत्रिमंडल से विदाई
अब कहानी का दूसरा सिरा कोंडा सुरेखा से जुड़ता है। सितंबर की शुरुआत में रेवंथ रेड्डी सरकार ने सुरेखा को मंत्रिमंडल से हटाने का फैसला किया, जबकि कांग्रेस के अनुशासनात्मक तंत्र ने वरिष्ठ नेता जी. चिन्ना रेड्डी के पद पर भी कार्रवाई की। राज्यपाल की मंजूरी के बाद सुरेखा की कैबिनेट से विदाई प्रभावी हुई।
बदले तेवरों और राजनीतिक भविष्य के संकेत
इसी घटनाक्रम के कुछ समय बाद राजगोपाल रेड्डी का रुख नरम पड़ना राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना। RTV English ने भी 5 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में उनके बदले तेवरों को रेखांकित किया और बताया कि मुख्यमंत्री की आलोचना करने वाले विधायक ने अचानक अलग सुर अपनाया। हालांकि, उनके इस बदलाव के पीछे कोई आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है।
इस पूरे घटनाक्रम से तेलंगाना कांग्रेस में नेतृत्व, वरिष्ठता और संगठनात्मक अनुशासन का सवाल फिर सामने आया है। पार्टी के भीतर कई पुराने नेताओं की भूमिका और नई नेतृत्व शैली के बीच संतुलन कैसे बनेगा, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल इतना जरूर है कि राजगोपाल रेड्डी और रेवंथ रेड्डी की सार्वजनिक नजदीकी ने लंबे समय से चली आ रही मतभेदों की चर्चा को नया मोड़ दे दिया है।

