Tamil Nadu CM के Deepfake वीडियो से ठगी, राजस्थान से आरोपी Shaibu Khan गिरफ्तार

Tamil Nadu CM के Deepfake वीडियो से ठगी, राजस्थान से आरोपी Shaibu Khan गिरफ्तार

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल कर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का ‘डीपफेक’ वीडियो बनाने और उसे प्रसारित करके लोगों को ठगने के आरोप में तमिलनाडु अपराध शाखा-सीआईडी ने राजस्थान के एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी। ‘डीपफेक’ ऐसी नकली तस्वीर, वीडियो या ऑडियो को कहते हैं जिसे एआई और ‘डीप लर्निंग’ तकनीक की मदद से इस तरह बनाया या बदला जाता है कि वह असली दिखाई या सुनाई दे।

आरोपी की पहचान राजस्थान के अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ के रहने वाले शायबू खान (28) के तौर पर हुई है। उसे 12 सितंबर को राज्य की स्थानीय पुलिस की मदद से अपराध शाखा-अपराध जांच विभाग (सीबी-सीआईडी) की एक विशेष टीम ने पकड़ा था। आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, अपराध शाखा ने नियमित निगरानी के दौरान सोशल मीडिया मंच ‘फेसबुक’ पर ऐसे वीडियो देखे जिनमें मुख्यमंत्री जैसी दिखने वाले कृत्रिम रूप से तैयार वीडियो और हिंदी ‘वॉइसओवर’ था।

इन वीडियो में लोगों से कहा गया था कि वे आर्थिक मदद पाने के लिए दिए गए व्हाट्सऐप नंबर पर संपर्क करें। विज्ञप्ति में कहा गया कि इनका मकसद भोले-भाले नागरिकों को धोखा देना था। आधिकारिक शिकायत मिलने के बाद सीबी-सीआईडी के साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने एक सितंबर को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

इनमें धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराएं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं 66सी और 66डी शामिल हैं। डिजिटल साक्ष्यों से पता चला कि इस ठगी का शिकार मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों के लोग भी बने थे। धोखाधड़ी वाले वीडियो सोशल मीडिया से हटवाने के बाद पुलिस की दो विशेष टीम को राजस्थान और मध्य प्रदेश भेजा गया।

अलवर में गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, सिम कार्ड और एक सीपीयू जब्त किया। खान को कैदी ट्रांजिट (पीटी) वारंट पर तमिलनाडु लाया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मध्य प्रदेश के एक पीड़ित से मिले महत्वपूर्ण साक्ष्यों और उसके बयान से आरोपी के खिलाफ मामला और मजबूत हुआ है।

जांचकर्ता फिलहाल यह पता लगाने में जुटे हैं कि खान ने इसे अकेले अंजाम दिया था या वह किसी बड़े गिरोह का हिस्सा था। पुलिस ने पुष्टि की है कि ये वीडियो उन फेसबुक अकाउंट से भी साझा किए जा रहे हैं जिनके पाकिस्तान से संचालित होने का संदेह है। विदेशी अपराधियों का डिजिटल तरीके से पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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