Syphilis Symptoms: हमारे शरीर पर जब भी कोई छला या दाना निकलता है, तो आमतौर पर उसमें दर्द या खुजली होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी बीमारी भी है जिसमें शरीर पर निकलने वाले छालों में न तो कोई दर्द होता है और न ही कोई खुजली? इसी वजह से लोग इसे अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। मेयो क्लिनिक (Mayo Clinic) के मुताबिक, बिना दर्द वाले ये छाले और दाने सिफिलिस (Syphilis) नाम के गुप्त रोग (STD/STI) का शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। अगर सही समय पर इसकी पहचान न हो, तो यह बीमारी सालों तक शरीर में छिपी रहकर दिल, दिमाग और नसों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। आइए समझते हैं कि सिफिलिस क्या है, यह कैसे फैलता है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है।
सिफिलिस (Syphilis) क्या है और यह कैसे फैलता है?
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, सिफिलिस एक तरह का बैक्टीरियल इन्फेक्शन (जीवाणु संक्रमण) है। यह मुख्य रूप से असुरक्षित शारीरिक संबंध (Sexually Transmitted Infection) बनाने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। यह बीमारी इन्फेक्टेड व्यक्ति के छालों या घाव के सीधे संपर्क में आने से फैलती है। अगर कोई गर्भवती महिला सिफिलिस से पीड़ित है, तो यह इन्फेक्शन उसके होने वाले बच्चे में भी जा सकता है, जिसे कॉन्जेनिटल सिफिलिस कहा जाता है।
सिफिलिस बीमारी के 4 मुख्य चरण (Stages)
मेयो क्लिनिक के अनुसार, यह बीमारी 4 अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ती है और हर चरण में इसके लक्षण बदलते हैं:
1. पहला चरण (Primary Stage)- इन्फेक्शन होने के 2 से 3 हफ्ते बाद शरीर पर एक छोटा सा छाला या घाव निकलता है (जिसे मेडिकल में ‘Chancre’ कहते हैं)। यह छाला पूरी तरह दर्द रहित (Painless) होता है। यह अक्सर जननांगों (Private Parts), मलाशय या मुंह के अंदर होता है। दर्द न होने के कारण ज्यादातर लोगों का ध्यान इस पर नहीं जाता और यह 3 से 6 हफ्तों में अपने आप ठीक भी हो जाता है लेकिन बीमारी शरीर के अंदर बनी रहती है।
2. दूसरा चरण (Secondary Stage)- छाला ठीक होने के कुछ हफ्तों बाद शरीर पर लाल या भूरे रंग के दाने (रैश) निकलने लगते हैं। ये दाने आमतौर पर हथेलियों और पैरों के तलों पर दिखाई देते हैं। इनमें भी खुजली नहीं होती। इसके साथ ही हल्का बुखार, थकान, गले में खराश और बाल झड़ने जैसी समस्या हो सकती है।
3. छिपा हुआ चरण (Latent Stage)- अगर पहले दो चरणों में इलाज न कराया जाए, तो बीमारी बिना किसी लक्षण के सालों तक शरीर के अंदर छिपी रहती है। मरीज को लगता है कि वह ठीक हो गया है, लेकिन बैक्टीरिया अंदर ही अंदर शरीर को नुकसान पहुँचाते रहते हैं।
4. गंभीर या आखिरी चरण (Tertiary Stage)- इन्फेक्शन के 10 से 30 साल बाद यह बेहद खतरनाक रूप ले सकता है। यह स्थिति दिल, दिमाग, नसों, आंखों और हड्डियों को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है।
सिफिलिस से बचाव के उपाय
क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार, थोड़ी सी सावधानी बरतकर इस गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है;
- सुरक्षित संबंध बनाएं।
- समय पर जांच (Testing) कराएं।
- गर्भवती महिलाओं को अपनी शुरुआती जांचों में ही सिफिलिस की जांच जरूर करानी चाहिए।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

