सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल सरकार को फटकार लगाई क्योंकि उसने राज्य के सबसे ऊंचे हाथी, रमन की कस्टडी लेने के कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया था। कोर्ट ने हाथी की ताज़ा मेडिकल रिपोर्ट भी मांगी। कोर्ट को बताया गया कि रमन अपने देखभाल करने वाले के साथ ही रहा क्योंकि वह ‘मस्त’ की स्थिति में था। यह हाथियों में होने वाली एक खास स्थिति है जिसमें टेस्टोस्टेरोन का स्तर तेज़ी से बढ़ जाता है और उसे कहीं और नहीं ले जाया जा सकता था। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा कि राज्य ने हाथी की देखभाल के बारे में पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किया है। बेंच ने यह भी पूछा कि क्या अधिकारी रमन की सेहत पर नज़र रख रहे हैं और केरल सरकार को निर्देश दिया कि वे हाल की मेडिकल रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखें।
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सुनवाई के दौरान, देखभाल करने वाले पक्ष ने कोर्ट को बताया कि रमन के साथ प्यार और देखभाल से व्यवहार किया गया। जस्टिस दत्ता ने कड़े शब्दों में जवाब दिया, प्यार, देखभाल और सुप्रीम कोर्ट के रोक के आदेशों को नज़रअंदाज़ करके पैसे कमाने का मकसद। हम अच्छी तरह समझते हैं कि प्यार और स्नेह क्या होता है। हम आपकी बात नहीं सुनेंगे।” बेंच ने राज्य के वकील से यह भी पूछा क्या आप हाथी की हालत पर नज़र रख रहे हैं या नहीं? पिछली मेडिकल रिपोर्ट का मतलब है कि आपने 24 जून के बाद उसकी जाँच नहीं की है? इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को रमन की ताज़ा मेडिकल रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया। बेंच ने कहा सुनवाई की अगली तारीख पर, राज्य सरकार हाथी की देखभाल के मामले में 9 जून, 2026 के कोर्ट के आदेश का पूरी ईमानदारी और निष्ठा से पालन करेगी।
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9 जून को सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार को आदेश दिया था कि वह रमन को अपनी कस्टडी में ले और उसे किसी सही रिहैबिलिटेशन सेंटर में रखे। कोर्ट ने कहा कि बेज़ुबान जानवरों की भलाई सबसे ज़रूरी है। कोर्ट ने यह भी देखा कि रमन का कमर्शियल इस्तेमाल किया गया था और उसे धार्मिक जुलूसों और रस्मों में इस्तेमाल किया जाता था। यह आदेश जयकृष्ण मेनन की अवमानना याचिका पर आया था। मेनन ने कहा था कि हाथी माता अमृतानंदमयी मठ का है और उसे सिर्फ़ देखभाल के लिए कुछ समय के लिए कृष्णनकुट्टी को सौंपा गया था। उस आदेश में बेंच ने कहा था, यह वाकई दुखद है कि जिस हाथी (रमन) की बात हो रही है जो केरल राज्य का सबसे लंबा हाथी भी है। उसका कमर्शियल इस्तेमाल किया गया, जबकि ऐसे इस्तेमाल पर रोक का आदेश था और यह सब इस कोर्ट के सामने दिए गए एक वचन के बावजूद हुआ।

