Sugar Price: मिल गेट पर चीनी में आई बड़ी गिरावट तो फिर दुकानों पर क्यों नहीं हुई उतनी सस्ती? जानिए कब तक मिल सकती है राहत

Sugar Price: मिल गेट पर चीनी में आई बड़ी गिरावट तो फिर दुकानों पर क्यों नहीं हुई उतनी सस्ती? जानिए कब तक मिल सकती है राहत

Sugar Price Latest News: भले ही चीनी के दाम पिछले 10 दिनों में कुछ कम हुए हों, लेकिन अभी भी कीमतें काफी ज्यादा हैं। सोमवार को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 63.28 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी। यह एक महीने में करीब 30 फीसदी और पिछले साल के मुकाबले करीब 38 फीसदी की तेजी है। दिलचस्प बात यह है कि चीनी मिलों से निकलने वाली चीनी के दाम अब तेजी से नीचे आ चुके हैं। यानी फैक्ट्री गेट पर कीमत घट गई है, लेकिन किराना दुकान तक इसका फायदा अभी पूरी तरह नहीं पहुंचा है।

पिछले 10 दिनों में चीनी के रिटेल भाव

तारीख दिल्ली कानपुर रायपुर मुंबई रांची कोलकाता गुवाहाटी हैदराबाद चेन्नई
31 अगस्त 2026 ₹60 ₹60 ₹58 ₹58 ₹60 ₹60 ₹61 ₹59 ₹62
29 अगस्त 2026 ₹59 ₹60 ₹56 ₹56 ₹58 ₹57 ₹58 ₹57 ₹61
28 अगस्त 2026 ₹60 ₹61 ₹58 ₹58 ₹60 ₹59 ₹60 ₹60 ₹62
27 अगस्त 2026 ₹62 ₹62 ₹61 ₹60 ₹62 ₹61 ₹62 ₹61 ₹64
26 अगस्त 2026 ₹62 ₹62 ₹61 ₹61 ₹62 ₹62 ₹63 ₹62 ₹65
25 अगस्त 2026 ₹63 ₹63 ₹62 ₹62 ₹63 ₹63 ₹64 ₹63 ₹67
24 अगस्त 2026 ₹65 ₹66 ₹65 ₹65 ₹66 ₹67 ₹67 ₹67 ₹68
22 अगस्त 2026 ₹68 ₹69 ₹68 ₹68 ₹70 ₹70 ₹71 ₹70 ₹70
21 अगस्त 2026 ₹68 ₹70 ₹69 ₹68 ₹70 ₹70 ₹71 ₹70 ₹70
सोर्स- चीनीमंडी

आखिर चीनी इतनी महंगी क्यों हुई?

किसी भी कमोडिटी की कीमतें तब बढ़ती हैं, जब उत्पादन कम हो और मांग बढ़ जाए। 2025-26 सीजन में देश का चीनी उत्पादन करीब 306 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। यह पहले लगाए गए 343 लाख मीट्रिक टन के अनुमान से करीब 11 फीसदी कम है। गन्ना उत्पादन वाले कई इलाकों में फसल को नुकसान पहुंचा। रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ ज्यादा बारिश से खेतों में पानी भरने का भी असर पड़ा। नतीजा यह हुआ कि बाजार में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई।

इसी बीच त्योहारों का सीजन भी शुरू हो गया। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार आते हैं। इस दौरान घरों के साथ मिठाई की दुकानों और खाद्य कंपनियों की चीनी की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में बाजार पर दोहरा दबाव बन गया।

वर्ष चीनी उत्पादन (लाख टन) शुरुआती स्टॉक (लाख टन)
2021-22 358 63-65 (अक्टूबर 2022)
2022-23 328 56 (अक्टूबर 2023)
2023-24 320 85 (अक्टूबर 2024)
2024-25 296 50 (अक्टूबर 2025)
2025-26 306 30-40 (अक्टूबर 2026)
स्रोत: ISMA

मिल गेट पर 30% तक सस्ती हुई चीनी

चीनी की कीमतों में सबसे बड़ा बदलाव मिल गेट पर देखने को मिला है। पहले कुछ ही दिनों में एक्स-मिल कीमत करीब 47-48 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 62-67 रुपये तक पहुंच गई थी। इस तेज बढ़ोतरी को खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने अनुचित बताया था। उनके मुताबिक कुछ मिलों की ओर से कीमत बढ़ाने और स्टॉक की सप्लाई सीमित करने से भी बाजार पर दबाव पड़ा। अब स्थिति पलट गई है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सोमवार को एक्स-मिल शुगर प्राइस करीब 30 फीसदी गिरकर 47 रुपये प्रति किलोग्राम रह गई। यह कीमत 18 अगस्त को 67 रुपये प्रति किलो पर जा पहुंची थी। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज यानी NFCSF ने भी कहा है कि देश के ज्यादातर हिस्सों में मिल गेट पर चीनी का भाव गिर गया है।

बिना चीनी आए ही क्यों गिर गए दाम?

सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी है। आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकता है। खास बात यह है कि आयातित चीनी अभी देश में पहुंची भी नहीं है, लेकिन सिर्फ अतिरिक्त सप्लाई आने की उम्मीद ने बाजार का माहौल बदल दिया। कारोबारियों और मिलों को लगा कि आने वाले महीनों में बाजार में 10 लाख टन और चीनी आ सकती है। इससे भविष्य में कमी की आशंका कुछ कम हुई और कीमतों पर दबाव पड़ा। यानी बाजार में माल आने से पहले ही उम्मीद पहुंच गई और भाव ठंडे पड़ने लगे।

दुकानों पर चीनी अभी भी महंगी क्यों है?

यही सबसे बड़ा सवाल है। मिल से चीनी सस्ती होने के बावजूद ग्राहक को राहत क्यों नहीं मिली? दरअसल, सप्लाई चेन में पहले महंगे भाव पर खरीदी गई चीनी अभी मौजूद है। थोक कारोबारी और खुदरा दुकानदार जिस कीमत पर पुराना स्टॉक खरीदते हैं, उसका असर कुछ समय तक बाजार भाव पर बना रहता है। NFCSF के मुताबिक आम तौर पर मिल गेट और थोक कीमत में करीब 2-3 रुपये का अंतर होता है, जबकि खुदरा कीमत एक्स-मिल भाव से करीब 7-8 रुपये ज्यादा रहती है। इसलिए मिल स्तर पर आई गिरावट का असर दुकान तक पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है।

सरकार ने जमाखोरी पर कसा शिकंजा

सरकार ने चीनी की कीमतों पर काबू पाने के लिए सिर्फ आयात का रास्ता नहीं खोला। थोक खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट भी सख्त की गई और देशभर में जांच बढ़ाई गई। NFCSF के प्रबंध निदेशक प्रकाश नाइकनवरे के मुताबिक स्टॉक की जांच के लिए ‘फ्लाइंग स्क्वॉड’ भी लगाए गए। जांच के दौरान कुछ मिलों के पास घोषित मात्रा से ज्यादा चीनी का स्टॉक पाया गया। कुछ मामलों में मिलों पर ‘शॉर्ट सेलिंग’ का आरोप भी लगा, यानी उन्हें जो मासिक कोटा दिया गया था, उसके मुकाबले कम चीनी बाजार में बेची गई।

सितंबर से मासिक कोटा व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। अब चीनी का आवंटन हर दो हफ्ते में किया जाएगा। मिलों को पहले हफ्ते में अपने कोटे की कम से कम 40 फीसदी चीनी बेचनी होगी और बाकी अगले हफ्ते में। बिक्री के सात दिन के भीतर चीनी की डिलीवरी करने का निर्देश भी दिया गया है। थोक खरीदारों के लिए 1 सितंबर से स्टॉक लिमिट और सख्त होगी।

इसके अलावा सरकार ने शुगर डीलर्स के लिए स्टॉक लिमिट को 4000 क्विंटल से घटाकर 2000 क्विंटल कर दिया है। यह लिमिट 15 सितंबर 2026 से 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी। घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहने और जमाखोरी को रोकने के लिए यह फैसला लिया गया है।

वैश्विक बाजार ने भी बढ़ाई चिंता

भारत ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चीनी के भाव चढ़े हैं। 30 जून को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत करीब 474 डॉलर प्रति टन थी, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में 16 फीसदी से ज्यादा की तेजी आई। सरकार को 2026-27 में दुनिया में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी रहने का अनुमान है। ऐसे माहौल में भारत में कम उत्पादन और त्योहारों की बढ़ती मांग ने चिंता को और बढ़ाया। फिर भी सरकार और इंडस्ट्री दोनों मानते हैं कि सिर्फ उत्पादन में कमी या वैश्विक बाजार की तेजी से भारत में चीनी के दाम इतनी तेजी से नहीं बढ़ने चाहिए थे। घबराहट में खरीदारी, जमाखोरी और सट्टेबाजी ने भी आग में घी डालने का काम किया।

भारत में गन्ना उत्पादन करने वाले टॉप-10 राज्य (2024-25)

राज्य गन्ना उत्पादन (हजार टन)
उत्तर प्रदेश 2,20,801
महाराष्ट्र 1,09,970
कर्नाटक 48,060
गुजरात 13,714
तमिलनाडु 13,351
बिहार 12,150
उत्तराखंड 7,650
पंजाब 7,279
मध्य प्रदेश 6,109
हरियाणा 5,830
सोर्स- PIB

अक्टूबर-नवंबर में बढ़ेगी सप्लाई

अगली बड़ी उम्मीद नए गन्ना पेराई सीजन से है। सरकार ने मिलों को करीब 15 अक्टूबर से पेराई शुरू करने को कहा है। अक्टूबर में 10 लाख टन से ज्यादा चीनी उत्पादन का अनुमान है, जबकि आम तौर पर इस महीने 3-4 लाख टन उत्पादन होता है। नवंबर में करीब 45 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। कुछ मिलें सितंबर में ही उत्पादन शुरू कर सकती हैं। कर्नाटक और महाराष्ट्र की कुछ मिलों से सितंबर में करीब 2 लाख टन उत्पादन की उम्मीद है। मिलों को अक्टूबर में तैयार होने वाली चीनी बिना किसी अतिरिक्त रोक के बेचने की अनुमति भी दी गई है, ताकि नई सप्लाई जल्द बाजार में पहुंच सके। केडिया एडवाइजरी के एमडी अजय केडिया के अनुसार, यह नई चीनी बाजार में आने के बाद रिटेल कीमतों में भी अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिल सकती है।

Crisil Intelligence का अनुमान है कि शॉर्ट टर्म में चीनी के दाम ऊंचे रह सकते हैं। हालांकि, उसने 2025-26 में कीमत बढ़ने का अनुमान 9 फीसदी से घटाकर करीब 7 फीसदी कर दिया है। 10 लाख टन अतिरिक्त आयात से क्लोजिंग स्टॉक करीब 49 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। इससे देश के पास चीनी का स्टॉक करीब डेढ़ महीने की खपत से बढ़कर लगभग दो महीने की खपत के बराबर हो सकता है।

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