मेरठ के आईआईएमटी यूनिवर्सिटी में एमबीए छात्रा अनु गुप्ता की मौत मामले में गुरुवार देर शाम यूनिवर्सिटी प्रशासन थोड़ा बैकफुट पर आया। यूनिवर्सिटी की ओर से छात्राओं से अभद्रता करने वाले छात्रावास निदेशक और 2 वार्डनों को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं 13 सदस्यीय जांच समिति बनाई गई है। जो इस पूरे प्रकरण की जांच करेगी। अनु गुप्ता की मौत कैसे हुई? ये हादसा है, सुसाइड या हत्या क्या है? इसकी जांच की जाएगी। बता दें कि सहारनपुर निवासी अनु गुप्ता की लाश आईआईएमटी यूनिवर्सिटी गंगानगर के गर्ल्स हॉस्टल के लॉबी में पड़ी मिली थी। उसके चेहरे पर चोट के निशान थे। परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है, जबकि पुलिस का कहना है कि अनु ने खुदकुशी की है। पुलिस ने परिजनों की तहरीर के आधार पर गंगानगर थाने में आईआईएमटी यूनिवर्सिटी पर सुसाइड के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया है। 13 सदस्यीय जांच समिति में होंगे शामिल विवि प्रशासन (7 सदस्य): चीफ प्रॉक्टर डॉ. भूपेंद्र कुमार, निदेशक प्रशासन डॉ. संदीप कुमार, गर्ल्स हॉस्टल निदेशक डॉ. मुक्ता शर्मा, डीन छात्र कल्याण डॉ. नीरज शर्मा, आंतरिक शिकायत समिति प्रमुख डॉ. विनीता शुक्ला, आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ प्रमुख डॉ. वत्सला तोमर और सहायक प्रोफेसर डॉ. अक्षय राज। छात्र प्रतिनिधि (6 सदस्य): आस्था चौधरी, वैष्णवी मलिक, अंशु यादव, सौरभ पठान, दीपांशु भड़ाना और ध्रुव त्यागी। मुआवजा समिति: मृतका के परिवार को आर्थिक सहायता देने के लिए कुलसचिव प्रो. (डॉ.) वीपी राकेश की अध्यक्षता में एक मुआवजा समिति बनाई गई है, जो सहायता राशि का निर्धारण करेगी। इसमें विवि प्रशासन के 7 और छात्रों के 6 प्रतिनिधि शामिल रहेंगे। छात्राओं से अभद्रता करने वाला डॉ. लखविंदर सस्पेंड वहीं गर्ल्स हॉस्टल में बुधवार देर रात 2 बजे घुसकर छात्राओं के साथ मिसबिहेव करने वाले हॉस्टल डायरेक्टर, टीचर डॉ. लखविंदर सिंह और दो महिला वार्डन सुमन गर्ग व सुमनलता को जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। 24 घंटे से ज्यादा चला धरना प्रदर्शन अनु गुप्ता की मौत के बाद यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स भड़क गए। यूनिवर्सिटी गेट पर ही धरना, विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। रातभर स्टूडेंट्स वहीं धरनास्थल पर डटे रहे। गुरुवार सुबह 10 बजे वीसी डॉ. दीपा शर्मा सीओ सदर देहात सुधीर सिंह ने मौके पर पहुंचकर आक्रोशित छात्रों को शांत कराया। इसके बाद छात्र नेताओं व विवि प्रशासन के बीच करीब एक घंटे वार्ता चली, जिसके बाद सुबह 11:30 बजे धरना समाप्त हुआ। छात्रा अनु गुप्ता के शव को परिजन सहारनपुर ले गए, जहां उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। राज्य महिला आयोग की सदस्य भी पहुंची उत्तर प्रदेश महिला आयोग की सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला ने भी कैंपस पहुंचकर मामले की विस्तृत जानकारी ली। छात्रों की लिखित मांगों को संज्ञान में लेते हुए विश्वविद्यालय ने जांच और आर्थिक सहायता के लिए दो अलग-अलग कमेटियों का गठन किया है। इसके अलावा छात्रों की मांग पर फीस से जुड़े मुद्दों के निस्तारण के लिए फीस निर्धारण समिति को भी निर्देश दिए गए हैं। डॉ. मीनाक्षी भराला के सामने हॉस्टल में छात्राओं ने अपनी परेशानियां बताईं। उन्होंने महिला आयोग सदस्य को अपने सीलन वाले बदबूदार कमरों का हाल दिखाया। हॉस्टल में पीने को साफ पानी नहीं है। 40डिग्री तापमान में कूलर की व्यवस्था नहीं है। छात्राओं ने बताया कि हर साल हॉस्टल की फीस बढ़ रही है। अब तक तीनगुना फीस बढ़ चुकी है लेकिन सुविधाएं शून्य हैं। खाने में कीड़े निकलते हैं ऐसे वीडियो भी छात्राओं ने महिला आयोग सदस्य को दिखाए। अनु की दीवार पर लिखा था होप छात्राएं डॉ. मीनाक्षी को मृतक छात्रा अनु के रूम में भी ली गईं। अनु के कमरे की दीवार पर होप लिखा था। उसके कमरे को देखकर साफ लग रहा था कि अनु बहुत तनाव में थी। वो जीना चाहती थी लेकिन यूनिवर्सिटी की तरफ से लगातार उस पर 30हजार रुपए अटेंडेंस फीस का दबाव बनाया जा रहा था। ये पैसे वो दे नहीं सकती थी। साथी छात्राओं ने बताया कि अनु का प्लेसमेंट चंडीगढ़ की किसी कंपनी मे ंहो चुका था। उसे वहां ज्वाइनिंग करना था। उसे कंपनी में अपना अटेंडेंस सर्टिफिकेट भी सबमिट करना था लेकिन कॉलेज उसके बदले में 30हजार रुपए मांग रहा था। जिसकी वजह से वो परेशान थी। उसे उकसाया गया, मरने के लिए मजबूर किया गया। छात्राओं ने पूरी कहानी और हॉस्टल से जुड़ी हर बात महिला आयोग सदस्य को बताई। डॉ. लखविंदर का वीडियो बनाने वाली छात्रा को धमकी बुधवार देर रात हॉस्टल में आए डॉ. लखविंदर की अभद्रता का वीडियो बनाने वाली छात्रा आशा चौधरी ने आरोप लगाए कि उसे परेशान किया जा रहा है। मानसिक रूप से टॉर्चर किया जा रहा है। आशा का एक नया वीडियो सामने आया है। जिसमें वो वीसी के सामने अपनी पूरी बात रखती दिख रही है। कहती है कि डॉ. लखविंदर जिस तरह देर रात हॉस्टल में छात्राओं को परेशान कर रहे थे उसने इसका वीडियो बनाकर शेयर कर दिया। इसके बाद उसे देररात तक डॉ. लखविंदर ने अपने और किसी अंजान नंबर से कॉल किए। उसे बार-बार कॉल किए गए। उसे डराया, धमकाया गया। कहा कि जब छात्राओं के पैरेंट्स को हॉस्टल में एंट्री नहीं है तो मेल स्टाफ देर रात हॉस्टल में क्यों आए? हमारी सिक्योरिटी की जिम्मेदारी किसकी है? जब हम अपनी परेशानी बताएं, सचचाई कहे ंतो हमें डराया जा रहा है।


