अरुणाचल प्रदेश की जनजातियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सामुदायिक संगठनों के शीर्ष निकाय ‘अरुणाचल इंडिजिनस ट्राइब्स फोरम’ (एआईटीएफ) ने प्रस्तावित विशाल बांध परियोजना को लेकर तनाव के बीच सियांग क्षेत्र में बातचीत को बढ़ावा देने और शांति बहाल करने के लिए बुधवार को एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की। ईटानगर स्थित अरुणाचल प्रेस क्लब में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए एआईटीएफ के महासचिव तापी ताई ने कहा कि पासीघाट और गेकू में हाल में हुई हिंसक घटनाओं के बाद जमीनी स्थिति का आकलन करने और सौहार्दपूर्ण समाधान की संभावनाएं तलाशने के लिए यह पहल की गई है। उन्होंने बताया कि एआईटीएफ की शांति समिति विभिन्न मूल निवासी समुदायों के प्रतिनिधियों से बनी है जो उच्चस्तरीय समिति के तहत काम करेगी।
यह समिति संबंधित पक्षों से बातचीत करेगी और उनके बीच संवाद की कमी दूर करने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा, ‘‘समिति तटस्थ और स्वतंत्र दृष्टिकोण अपनाएगी। उसका एकमात्र उद्देश्य सियांग क्षेत्र में शांति और सौहार्द बनाए रखना होगा।’’
पासीघाट और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती का कड़ा विरोध करते हुए एआईटीएफ ने राज्य सरकार के स्थिति से निपटने के तरीके की आलोचना की और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाने के बजाय बातचीत की अपनी मांग दोहराई।
मंच ने कहा कि उसने पहले भी सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने के बजाय प्रभावित परिवारों से सीधे बातचीत करने का आग्रह किया था। उसने कहा कि स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए सार्थक विचार-विमर्श, आपसी समझ और विश्वास बहाली के उपाय आवश्यक हैं। सामूहिक प्रयासों की अपील करते हुए एआईटीएफ ने सरकारी अधिकारियों, बुद्धिजीवियों, जमीनी स्तर पर काम करने वाले संस्थानों, युवा संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से शांतिपूर्ण समाधान तलाशने के लिए रचनात्मक संवाद में भाग लेने का आग्रह किया।
इस बीच, अरुणाचल क्रिश्चियन फोरम (एसीएफ) ने भी प्रस्तावित परियोजना को लेकर राज्य सरकार और सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम (एसआईएफएफ) के बीच बातचीत कराने की पेशकश की है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू को हाल में सौंपे गए एक ज्ञापन में एसीएफ ने मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई और आशंकाओं को दूर करने, संवाद की कमी को पाटने तथा तनाव बढ़ने से रोकने के लिए समय पर हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। मंच ने कहा कि विवादित परियोजना में विकास, मूल निवासी समुदायों के अधिकारों, कृषि आजीविका और सियांग क्षेत्र के समुदायों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं।

