झांसी में भाजपा नेता आशीष उपाध्याय के सट्टा गैंग को सर्वर उपलब्ध कराने वाला आरोपी शिवेश चव्हाण बहुत ही शातिर है। वह IPL के एक सीजन में सर्वर उपलब्ध कराने की एवज में 50 लाख रुपए से लेकर एक करोड़ रुपए तक चार्ज करता था। लगभग 5 साल से वह सटोरियों से जुड़ा था। शुक्रवार को सटोरियों से मिलने झांसी आया था। सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया। पुलिस का दावा है कि देश में पहली बार सटोरियों के सर्वर सप्लायर की गिरफ्तारी हुई है। पुलिस के मुताबिक, सर्वर की मदद से सट्टेबाज ऑनलाइन वेबसाइट और एप संचालित करते थे। जिन पर लाखों-करोड़ों रुपए के दांव लगते थे। इससे पहले पुलिस भाजपा नेता आशीष उपाध्याय समेत कई सटोरियों को गिरफ्तार कर चुकी है। मामले में अभी कई आरोपी फरार हैं। पूरा मामला नवाबाद थाना क्षेत्र का है।
कंप्यूटर की हर लैंग्वेज में मास्टर है 12वीं पास शिवेश शिवेश चव्हाण (41) मध्य प्रदेश के इंदौर का रहने वाला है। उसके पिता इंदौर में प्राइवेट काम करते हैं। शिवेश अधिक पढ़ लिख नहीं सका। उसने सिर्फ 12वीं तक पढ़ाई की। लेकिन सीखने की ललक ने उसे कंप्यूटर की मुश्किल से मुश्किल लैंग्वेज का जानकार बना दिया। इसकी मदद से उसने सट्टेबाजों के लिए न सिर्फ मोबाइल एप तैयार कराए बल्कि सर्वर तक मुहैया कराया। वह साफ्टवेयर बनाने में भी माहिर है। गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस अफसर उससे पूछताछ करने आए तो उसकी बातों को सुनकर हैरान रह गए। वह फर्राटेदार इंग्लिश बोलता है। शुरू में पुलिसकर्मी उसे इंजीनियर ही बता रहे हैं। मगर जांच पड़ताल में पता चला वो सिर्फ 12वीं तक पढ़ा है। एसीपी आरीबा नोमान के मुताबिक शिवेश बेहद शातिर है। जल्दी पैसा कमाने की खातिर वह शार्टकट तलाशता रहा। पहले भी झांसी आ चुका था पुलिस के मुताबिक, कुछ साल पहले सट्टेबाज के तौर पर अखबारों में शुभम उपाध्याय, प्रेम खटीक और नीरज गोस्वामी का नाम पढ़कर वह इनसे संपर्क करने के लिए झांसी आया था। उस दौरान प्रेम खटीक एवं नीरज गोस्वामी जेल में थे। उनसे मिलकर शिवेश ने सट्टा एप चलाने में पूरी तकनीकी मदद करने की पेशकश की। इसके बाद से शिवेश इनको तकनीकी सहायता मुहैया कराने लगा। तीनों आरोपी शिवेश के मुहैया कराए सर्वर के बदौलत ही दो एप और वेबसाइट चला रहे थे। शिवेश उनसे सर्वर का पूरा किराया एवं कमीशन वसूलता था। सर्वर का पता चलने के बाद पुलिस ने यह दोनों वेबसाइट बंद करा दी। 50 लाख फ्रीज कराए थे रुपए झांसी ASP अरीबा नोमान ने बताया- झांसी में सटोरियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन-720’ अभियान चलाया जा रहा है। 29 अप्रैल को पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि आईपीएल में सट्टा खिलाने वाले तीन आरोपी अपनी फॉर्च्यूनर गाड़ी से मुस्तरा गांव से सखी के हनुमान मंदिर वाले रास्ते पर आने वाले हैं। सूचना पर रवि श्रीवास्तव ने पुलिस टीम के साथ घेराबंदी की। इस दौरान आरोपियों ने भागने की कोशिश में सरकारी गाड़ी को टक्कर मार दी। घटना में दरोगा निखिल कुमार और ड्राइवर घायल हो गए। पुलिस ने तिलियानी बजरिया निवासी शुभम उपाध्याय, गल्ला मंडी रोड सिंधी कॉलोनी निवासी विजय बाधवा और डडियापुरा मोहल्ला निवासी नितिन अग्रवाल को गिरफ्तार किया था।आरोपियों के पास से 8 मोबाइल, एक टैबलेट, 84,500 रुपए नकद और करीब 100 करोड़ रुपए के सट्टे के हिसाब-किताब से जुड़े बहीखाते बरामद हुए थे। पुलिस ने उनके बैंक खातों में मौजूद 50 लाख रुपए भी फ्रीज कराए थे। जांच में सामने आया कि तीनों आरोपी अपनी गैंग के साथ मिलकर मोबाइल के जरिए सट्टा खिलाने के लिए दो वेबसाइट चला रहे थे। वेबसाइट के जरिए सर्वर प्रोवाइडर अरेस्ट ASP अरीबा नोमान ने बताया- दोनों वेबसाइट्स की जांच में इंदौर निवासी शिवेश चव्हाण का नाम सामने आया, जो सट्टा गैंग को सर्वर मुहैया करा रहा था। शुक्रवार को शिवेश झांसी आया था। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने उसे इलाहाबाद बैंक चौराहे के पास से गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के पास से एक लैपटॉप, एक सैमसंग गैलेक्सी S-25 अल्ट्रा समेत दो मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। जांच में सामने आया कि अमेजन वेब सर्विस से सर्वर ‘लीव स्विच’ को दिया गया था। वहां से यह हर्बी मीडिया तक पहुंचा और फिर शिवेश के जरिए सट्टा गैंग को उपलब्ध कराया गया। आरोपी ऑनलाइन सट्टेबाजी की वेबसाइट और एप चलाने के लिए सर्वर उपलब्ध कराता था। शिवेश झांसी के शुभम उपाध्याय, प्रेम खटीक और नीरज गोस्वामी के संपर्क में था। तीनों आरोपी इसी सर्वर के जरिए दो बैटिंग एप और वेबसाइट चला रहे थे। यह नेटवर्क कमीशन बेस पर 10 से 20 प्रतिशत हिस्सेदारी या मासिक सब्सक्रिप्शन के आधार पर काम करता था। फिलहाल पुलिस ने दोनों वेबसाइट्स को बंद करा दिया है। अब जानिए किसका क्या रोल था- नीरज गोस्वामी: गेम डेवलपर है। इसी ने ऑनलाइन सट्टा चलाने के लिए वेबसाइट डेवलप कराई थी। शिवेश चव्हाण: सट्टेबाजी से जुड़ी वेबसाइट चलाने के लिए सर्वर की जरूरत थी। शिवेश ने सर्वर उपलब्ध कराया, जिसके जरिए वेबसाइट रन हो सकी। शुभम उपाध्याय: सुपर मास्टर एजेंट यानी मुख्य संचालक की भूमिका में था। वह सीधे शिवेश के संपर्क में था और सर्वर लेकर वेबसाइट चला रहा था। विजय बाधवा: इस नेटवर्क में ब्रोकर की भूमिका निभा रहा था। नितिन अग्रवाल: मास्टर एजेंट और एजेंट के तौर पर काम कर रहा था। गैंग के कई सदस्य अभी भी फरार पुलिस के मुताबिक, अभी इस गैंग के नीरज गोस्वामी, पप्पू यादव, पंकज राय, सौरभ लिकधारी, सोनू चड्ढा, हरीश कुमार, आकाश चंचलानी, सुमित साहू और रोशन मुंशी फरार हैं। उनकी तलाश में लगातार दबिश दे रही है।


