हरदा में अनुसूचित जाति-जनजाति सामाजिक संगठनों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी 9 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन नायब तहसीलदार बी.डी. तमखानिया को सौंपा। संगठनों ने जिले में एससी-एसटी समाज पर लगातार अत्याचार होने और पीड़ितों को न्याय नहीं मिलने का आरोप लगाया। आदिवासी नेता जयकुमार ऊईके ने बताया कि प्रमुख मांगों में टिमरनी थाना परिसर में आदिवासी रामदास कोरकू की मौत की निष्पक्ष जांच और उनके परिवार को 1 करोड़ रुपए की सहायता राशि देने की मांग शामिल है। पुलिस प्रताड़ना और आत्महत्या मामलों की जांच की मांग संगठनों ने हंडिया थाना में पदस्थ पुलिसकर्मी कंचन राजपूत पर ग्राम रेलवा निवासी आदिवासी अजबसिंह को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। ज्ञापन में कहा गया कि प्रताड़ना से परेशान होकर अजबसिंह ने आत्महत्या की। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई और परिवार को 1 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता देने की मांग की गई है। इसके अलावा पीएचई विभाग की इंजीनियर ज्योति मोहबिया की आत्महत्या मामले की विभागीय जांच की मांग भी उठाई गई। संगठनों ने आरोप लगाया कि विभागीय प्रताड़ना के कारण आत्महत्या हुई हो सकती है। पीएचई विभाग और एसडीओ पर लगाए आरोप ज्ञापन में पीएचई विभाग के कर्मचारी चंदन भलावी और उमेश धुर्वे के लापता होने की जांच की मांग भी की गई। साथ ही एसडीओ संगीता धापकारी पर कर्मचारियों को परेशान करने, भेदभाव करने और फर्जी बिलों पर हस्ताक्षर करवाने के आरोप लगाए गए। संगठनों ने पिछले दो वर्षों के सभी बिलों की जांच कराने की मांग की है। विधायक पर कार्रवाई और हत्या मामले में गिरफ्तारी की मांग संगठनों ने कांग्रेस विधायक डॉ. आर.के. दोगने द्वारा सार्वजनिक स्थल पर एक एससी-एसटी युवा नेता के प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी पर वैधानिक कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा अनिल मानिक हत्याकांड के मुख्य आरोपी धरमू उर्फ धर्मेंद्र पटेल की तत्काल गिरफ्तारी की मांग भी की गई। संगठनों का आरोप है कि तीन साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस मुख्य आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकी है। मकान तोड़ने और बुलडोजर कार्रवाई पर उठाए सवाल ज्ञापन में डॉ. राजेंद्र प्रसाद वार्ड में अनुसूचित जाति के तेजराम ओसले के मकान पर नगर पालिका द्वारा जेसीबी चलाने की घटना की जांच की मांग की गई। संगठनों का कहना है कि आसपास के अन्य मकानों को नहीं तोड़ा गया और कुछ लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ भी दिया गया। नुकसान की भरपाई शासन-प्रशासन से कराने की मांग की गई है। संगठनों ने हंडिया आंदोलन के दौरान एससी-एसटी समाज के पदाधिकारियों पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने की भी मांग उठाई। जिला जेल में मौत और वन विभाग की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल ज्ञापन में 13 अप्रैल 2026 को जिला जेल परिसर में नागेश मलाजपुरे की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की गई। परिजनों का आरोप है कि उनकी हत्या हुई है। परिवार का कहना है कि 9 अप्रैल को जेल में मुलाकात के दौरान नागेश ने खुद को ठीक बताया था, लेकिन 13 अप्रैल की रात जिला जेल से फोन कर तबीयत खराब होने की सूचना दी गई। जब परिजन जिला अस्पताल पहुंचे तो नागेश मृत मिला। मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर जांच और संबंधित लोगों पर कार्रवाई की मांग की गई है। साथ ही जेल के सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने और परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग भी उठाई गई। संगठनों ने टिमरनी तहसील के राजस्व और वन ग्रामों में वन विभाग द्वारा बिना नोटिस आदिवासियों की जमीनों पर बुलडोजर कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए इसे गैर-संवैधानिक बताया और तत्काल रोक लगाने की मांग की।


