संभल जिले के चंदौसी स्थित विशेष पॉक्सो न्यायालय ने नाबालिग से छेड़छाड़ के मामले में एक अभियुक्त को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने शीलू पुत्र रूपकिशोर, निवासी ग्राम लहरा नगला, थाना गुन्नौर, जिला संभल को तीन वर्ष के कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। यह फैसला शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार के “मिशन शक्ति” अभियान के तहत सुनाया गया। अभियुक्त शीलू को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 452 के तहत तीन वर्ष के कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है। इसके साथ ही, उसे पॉक्सो एक्ट की धारा 8 के तहत भी तीन वर्ष के कारावास और 10,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी। यह निर्णय विशेष न्यायाधीश, पॉक्सो एक्ट अवधेश कुमार सिंह की अदालत ने सुनाया। यह मामला विशेष सत्र परीक्षण संख्या 574/2019 और अपराध संख्या 166/2019 के तहत थाना गुन्नौर में दर्ज किया गया था। अभियुक्त पर आईपीसी की धारा 323, 354, पॉक्सो एक्ट की धारा 7/8 और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)10 के अंतर्गत आरोप लगाए गए थे। न्यायालय ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि समाज में बालिकाओं की मर्यादा और सम्मान की रक्षा सर्वोपरि है। ऐसे कृत्य करने वाले अपराधी किसी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं। न्यायालय ने कहा कि यह निर्णय समाज को स्पष्ट संदेश देता है कि न्यायपालिका बेटियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर है। इस मुकदमे की प्रभावी पैरवी विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट) नरेंद्र कुमार यादव ने की। उन्होंने न्यायालय में तथ्यपरक और साक्ष्य-आधारित दलीलें प्रस्तुत कीं। गवाहों के बयानों, चिकित्सीय प्रमाणों और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर अभियोजन पक्ष ने अभियुक्त के दोषसिद्ध होने का विश्वास दिलाया, जिससे पीड़िता को न्याय मिल सका।


