सरकारी अधिकारियों और इंडस्ट्री लीडर्स ने राजधानी में ‘सागरमंथन: द ग्रेट ओशन्स डायलॉग 2026’ की शुरुआत के मौके पर कहा कि भारत अपने समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपिंग क्षमता और वैकल्पिक व्यापार गलियारों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि जियोपॉलिटिकल तनाव, अहम समुद्री रास्तों (चोकपॉइंट्स) में रुकावट और बदलते ग्लोबल ट्रेड पैटर्न ने इंटरनेशनल समुद्री सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। तीन दिन तक चलने वाले इस डायलॉग का तीसरा एडिशन बुधवार को शुरू हुआ। इसे ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) और मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वॉटरवेज (MoPSW) मिलकर आयोजित कर रहे हैं। इस इवेंट में 70 से ज्यादा देशों के 1,200 से अधिक मंत्री, पॉलिसी बनाने वाले, इंडस्ट्री लीडर्स और स्कॉलर्स “ब्लू जियोग्राफीज, नई उम्मीदें: समुद्र में व्यापार, टेक्नोलॉजी और भरोसा” थीम पर चर्चा के लिए एक साथ आए हैं। पहले दिन की चर्चाएं जियोपॉलिटिकल तनाव, सप्लाई-चेन में रुकावट, क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल शिपबिल्डिंग क्षमता के एक जगह केंद्रित होने से बदल रहे समुद्री परिदृश्य पर केंद्रित रहीं। भारत के लिए, ये घटनाक्रम उसके अपने समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार और ग्लोबल ट्रेड में बड़ी भूमिका निभाने की उसकी महत्वाकांक्षाओं के साथ भी मेल खाते हैं।
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पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत में समुद्री क्षेत्र में बदलाव को पोर्ट, जहाज बनाने वाले क्लस्टर और समुद्री ट्रेनिंग में निवेश से बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने सरकार के नज़रिए को ‘मैरीटाइम इंडिया विज़न 2030’ और ‘मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047’ से भी जोड़ा। सोनोवाल ने कहा यह उन लोगों का जमावड़ा है जो समुद्र और महासागरों की ताकत और उनसे बनने वाले दोस्ती के रिश्तों में यकीन रखते हैं।” उन्होंने कहा कि सरकार के समुद्री कार्यक्रमों का मकसद इस सेक्टर की क्षमता बढ़ाना और भारत के साथ-साथ पूरी ग्लोबल इकॉनमी के लिए कुशल वर्कफोर्स तैयार करना है। पोर्ट, शिपिंग और जलमार्ग राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने समुद्री क्षेत्र की मज़बूती बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने अहम समुद्री ‘चोकपॉइंट्स’ (संवेदनशील समुद्री रास्तों) पर जियोपॉलिटिकल तनाव से पैदा होने वाले जोखिमों की ओर इशारा किया।
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ठाकुर ने कहा कि महासागर ग्लोबल ग्रोथ, खुशहाली, सुरक्षा और सस्टेनेबिलिटी के लिए अहम हैं। साथ ही, अहम चोकपॉइंट्स पर जियोपॉलिटिकल तनाव, क्लाइमेट चेंज और बदलते ट्रेड पैटर्न नई अनिश्चितताएं पैदा कर रहे हैं। हालिया ‘स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़’ संकट ने हमें याद दिलाया है कि जब समुद्री रास्ते बाधित होते हैं, तो उसका असर हर जगह महसूस किया जाता है। स्थापित रास्तों में रुकावट के कारण कंपनियों और सरकारों के लिए ‘डाइवर्सिफिकेशन’ (विविधीकरण) एक ज़रूरी बात बन गई है। DP वर्ल्ड (सबकॉन्टिनेंट, सेंट्रल एशिया, लेवांट और मिस्र) के CEO और मैनेजिंग डायरेक्टर रिज़वान सूमर ने कहा कि बिज़नेस अब सिर्फ़ ‘एफ़िशिएंसी’ (दक्षता) पर ध्यान देने के बजाय अपनी सप्लाई चेन में ‘रिडंडेंसी’ (वैकल्पिक व्यवस्था) बनाने की ओर बढ़ रहे हैं।

