Sagar news: एमपी में सागर से भोपाल तक फैले फर्जी फर्म और बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) के जरिए करोड़ों के संदिग्ध लेनदेन करने वाले अंतरराज्यीय संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। सागर पुलिस को अब तक ऐसी 30 फर्म और बड़ी संख्या में बैंक खातों का पता लगा है, जिनमें ऑनलाइन सट्टे की कमाई का ट्रांजेक्शन किया जाता है। मामले के दोनों मास्टरमाइंड आरोपी भोपाल से गिरफ्तार किए हैं। इनके पास से 2.69 करोड़ नकद, 30 लाख का सोना और नोट गिनने की मशीन के साथ ही फर्म व बैंक खातों के दस्तावेज भी मिले हैं। सागर एसपी अनुराग सुजानिया ने मामले का खुलासा किया। गिरोह 2019 से अवैध गतिविधियां चला रहा था। दोनों मास्टरमाइंड अमित विश्वकर्मा प्रसाद विश्वकर्मा और रिषभपटेल (27) निवासी भोपाल फरार चल रहे थे।
8 दिन की रिमांड पर आरोपी
यह बेरोजगार युवकों व जरूरतमंदों को कमीशन का लालच देकर उनके दस्तावेज हासिल करते थे। फिर उनसे बैंक खाते या फर्म बनाकर ऑनलाइन सट्टे की कमाई का लेनदेन उनसे करते थे। अब तक गिरफ्तार आरोपियों में धर्मेन्द्र नाहर, सोनू दांगी, अमित विश्वकर्मा, विपिन गिरी, स्वर्णेन्द्र पांडे और ऋषभ पटेल शामिल हैं। अमित और ऋषभ को पुलिस ने 8 दिन के रिमांड लिया है। वहीं आरोपी सरमन उर्फ शुभम रैकवार और ऋषि केशव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।
जांच में अब तक 30 से अधिक फर्जी फर्मों (जैसे ग्लैमर इंटरप्राइजेस, भूपेन्द्र इंटरप्राइजेस, इंटरप्राइजेस, समृद्धि दूर एंड ट्रेवल्स आदि) का खुलासा हुआ है। इन फर्मों के नाम से विभिन्न निजी बैंकों में करंट अकाउंट खोले थे, जिनके प्रारंभिक वित्तीय विश्लेषण में 5.50 करोड़ से अधिक के संदिग्ध ट्रांजेक्शन सामने आए हैं। आरोपी अमित विश्वकर्मा का जीजा पुलिस में है। शुरुआती छानबीन में पुलिस को सूचना मिली थी कि शातिर आरोपी देश छोड़कर श्रीलंका या म्यांमार भाग गए हैं।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
ऐसे हुआ खुलासा… एक गलती और फंस गए आरोपी
एएसपी नरेंद्र सोलंकी मामले की जांच कर रहे थे। उन्होंने आरोपियों को ट्रैक किया, लेकिन आरोपी जो मोबाइल नंबर रखता उससे कभी किसी से बात नही करता। बात करने के लिए दूसरे नंबर से वॉट्सऐप पर कॉल करता था। लेकिन आरोपी ने सिर्फ एक बार गलती से मुख्य नंबर से कॉल कर दिया। इसी कॉल के जरिए एएसपी सोलंकी ने लोकेशन ट्रैक कर ली। खास बात यह है कि आरोपी की सभी सिम फर्जी थीं और गलत पता डाला हुआ था। पुलिस ने भोपाल पुलिस को सूचना देकर संयुक्त रूप से आरोपियों को भोपाल के पास सीहोर से दबोच लिया। आरोपी के घर से 2.69 करोड़ रुपए की नकदी और 30 लाख का सोना बरामद हुआ है साथ ही नोट गिनने की मशीन भी मिली। जिस घर से रकम बरामद हुई वह भी किराए का ठिकाना था।
मैच फिक्सर बनने 2019 में शुरू किया था सट्टा
मुख्य आरोपी ऋषभ पटेल ने पूछताछ में खुलासा किया कि उसने वर्ष 2019 से ऑनलाइन बेटिंग का यह काला कारोबार शुरू किया था। उसका सपना एक बड़ा मैच फिक्सर और बुकी बनने का था। वह भोपाल से 20 विकेट. कॉम और 99. कॉम जैसी वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन सट्टा संचालित करता था। इसके लिए टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से ग्राहकों की चेन बनाई गई थी।
न कॉल, न मुलाकात, बस पार्सल से खेल
मास्टरमाइंड अमित और ऋषभ इतने शातिर ढंग से गिरोह चला रहे थे कि किसी को भनक नहीं लगती। बहुत जरूरी होने पर मिलते और प्लानिंग को साझा करते थे। इनका सारा खेल बस पार्सल से होता था। सागर में म्यूल खाते खुलवाने के बाद आरोपी धर्मेंद्र नाहर सागर से खाते की तमाम डिटेल और कागजात चार्टर्ड बस से भोपाल भेजता था, जिसे भोपाल में ऋषभऔर विपिन रिसीव करते थे।

