देवरिया में रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद की इकाई ने शुक्रवार को डिपो में प्रदर्शन किया। परिवहन निगम के बस डिपो में ट्रैफिक, स्टेशन और कार्यशाला शाखा के कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। सभा की अध्यक्षता दिनानाथ मिश्र ने की, जिसमें कर्मचारियों ने राष्ट्रीयकृत मार्गों पर निजी बसों के अवैध और अनधिकृत संचालन के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। कर्मचारियों का आरोप है कि राष्ट्रीयकृत मार्गों पर निजी बसों और छोटी गाड़ियों के अवैध संचालन से परिवहन निगम को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। हाई-एंड निजी बसें परमिट की शर्तों का उल्लंघन कर निगम की आय को सीधे प्रभावित कर रही हैं। कर्मचारियों ने यह भी दावा किया कि निगम की बहुमूल्य संपत्तियों और कारोबार को निजी हाथों में सौंपने की योजनाएं लगातार बनाई जा रही हैं, जिससे हजारों कर्मचारियों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने शासन और निगम प्रबंधन से 15 मार्च को भेजे गए मांग-पत्र पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। इन मांगों में राष्ट्रीयकृत मार्गों पर अवैध संचालन पर रोक, संविदा चालकों-परिचालकों का नियमितीकरण, महंगाई भत्ते का भुगतान, वेतन विसंगतियों का समाधान, रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति और आउटसोर्स कर्मचारियों के पारिश्रमिक में बढ़ोतरी जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। कर्मचारियों ने पिछले वर्ष परिवहन निगम को दी गई आर्थिक सहायता के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद भी किया। उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि जनहित में निगम के हितों को प्रभावित करने वाली योजनाओं पर रोक लगाई जाए, ताकि यात्रियों को सस्ती, सुरक्षित और सुगम परिवहन सेवा मिलती रहे। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि 19 मई तक उनकी मांगों पर सकारात्मक और संतोषजनक निर्णय नहीं लिया गया, तो 20 मई को प्रस्तावित क्षेत्र स्तरीय धरना-प्रदर्शन, रैली और आमसभा में डिपो के कर्मचारी बड़ी संख्या में भाग लेंगे। कर्मचारियों ने यह भी कहा कि यदि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं किया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस संबंध में एक ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री, अपर मुख्य सचिव परिवहन, प्रबंध निदेशक परिवहन निगम तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजी गई है।


