बिहार पुलिस में उलटफेर, 48 घंटों में बदले 115 डीएसपी:सम्राट सरकार का लागातार दूसरे दिन बड़ा एक्शन, युवा अधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी

बिहार पुलिस में उलटफेर, 48 घंटों में बदले 115 डीएसपी:सम्राट सरकार का लागातार दूसरे दिन बड़ा एक्शन, युवा अधिकारियों को मिली अहम जिम्मेदारी

बिहार सरकार ने राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक दुरुस्त और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस महकमे में अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, लगातार दूसरे दिन राज्य सरकार ने 54 और पुलिस उपाधीक्षकों (DSP) का स्थानांतरण और नई जगहों पर पदस्थापन किया है। इससे ठीक एक दिन पहले सरकार ने 61 डीएसपी अधिकारियों का तबादला किया था। दोनों सूचियों को मिलाकर पिछले 48 घंटों के भीतर सम्राट सरकार ने कुल 115 डीएसपी अधिकारियों के कार्यक्षेत्र को बदल दिया है। इतनी बड़ी संख्या में हुए तबादलों से प्रशासनिक गलियारों में भारी हलचल है। युवा अधिकारी यो को दी गई फील्ड पोस्टिंग प्रथम चरण (पहला दिन): पहले दिन 15 मई को गृह विभाग द्वारा कुल 61 पुलिस उपाधीक्षकों (DSP) का स्थानांतरण कर विभिन्न जिलों और रेल पुलिस में भेजा गया था। इस सूची का मुख्य फोकस जिला पुलिसिंग, जिला कानून व्यवस्था और बुनियादी फील्ड पोस्टिंग को मजबूत करना था। द्वितीय चरण (दूसरा दिन): लगातार दूसरे दिन 16 मई को जारी हुई सूची में 54 और डीएसपी अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इसमें सीधी नियुक्ति (64वीं, 65वीं, और 66वीं बैच) के युवा अधिकारियों को शामिल कर उन्हें तकनीकी और महत्वपूर्ण फील्ड पोस्टिंग दी गई है। सरकार ने मात्र 48 घंटे के भीतर कुल 115 अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बड़ा परिवर्तन कर पूरे कानून-व्यवस्था के ढांचे को नया रूप दिया है। साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने इस सूची में तकनीकी रूप से सक्षम और युवा अधिकारियों को कमान सौंपी है। नवादा, गया, जमुई और कटिहार जैसे महत्वपूर्ण जिलों में साइबर क्राइम विंग में डीएसपी की तैनाती की गई है। इसमें शाहनवाज अख्तर को नवादा का साइबर क्राइम डीएसपी, अब्दुर रहमान दानिश को गयाजी में साइबर अपराध और अभिषेक कुमार को जमुई का साइबर क्राइम डीएसपी नियुक्त किया गया है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (SDPO) का फेरबदल कई जिलों के अनुमंडलों में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है ताकि स्थानीय स्तर पर अपराध नियंत्रण को गति दी जा सके। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को आगे बढ़ाते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Bureau), मद्यनिषेध विंग (Prohibition), और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में भी बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। एक पुराना आदेश भी हुआ रद्द इस नए प्रशासनिक आदेश में सरकार ने एक पुराना फैसला भी बदला है। 15 मई को जारी की गई विभागीय अधिसूचना संख्या-6409 के क्रमांक संख्या-50 पर अंकित सुरेन्द्र कुमार सिंह, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, नीमचक बथानी (गयाजी) के पूर्व में किए गए स्थानांतरण/पदस्थापन को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। आदेश के अनुसार, सुरेंद्र कुमार सिंह अपने अगले आदेश तक नीमचक बथानी (गयाजी) के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के पद पर ही बने रहेंगे। प्रशासनिक दृष्टिकोण: क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला? राज्य सरकार आगामी समय में अपराधियों, भू-माफियाओं और साइबर अपराधियों के खिलाफ एक व्यापक और कड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी में है। कई अधिकारी लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे हुए थे, जिन्हें हटाकर मुस्तैद और नए विज़न वाले अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर लाया गया है। मुख्यमंत्री और गृह विभाग के स्तर पर लगातार कई दौर की समीक्षा बैठकों के बाद इन सूचियों को अंतिम मुहर लगाई गई है। मुख्यमंत्री में कल भी अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की थी जिस दौरान उन्होंने अधिकारियों से अपराध कर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की बात कही थी। बिहार सरकार ने राज्य की कानून-व्यवस्था को और अधिक दुरुस्त और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस महकमे में अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, लगातार दूसरे दिन राज्य सरकार ने 54 और पुलिस उपाधीक्षकों (DSP) का स्थानांतरण और नई जगहों पर पदस्थापन किया है। इससे ठीक एक दिन पहले सरकार ने 61 डीएसपी अधिकारियों का तबादला किया था। दोनों सूचियों को मिलाकर पिछले 48 घंटों के भीतर सम्राट सरकार ने कुल 115 डीएसपी अधिकारियों के कार्यक्षेत्र को बदल दिया है। इतनी बड़ी संख्या में हुए तबादलों से प्रशासनिक गलियारों में भारी हलचल है। युवा अधिकारी यो को दी गई फील्ड पोस्टिंग प्रथम चरण (पहला दिन): पहले दिन 15 मई को गृह विभाग द्वारा कुल 61 पुलिस उपाधीक्षकों (DSP) का स्थानांतरण कर विभिन्न जिलों और रेल पुलिस में भेजा गया था। इस सूची का मुख्य फोकस जिला पुलिसिंग, जिला कानून व्यवस्था और बुनियादी फील्ड पोस्टिंग को मजबूत करना था। द्वितीय चरण (दूसरा दिन): लगातार दूसरे दिन 16 मई को जारी हुई सूची में 54 और डीएसपी अधिकारियों के नाम शामिल हैं। इसमें सीधी नियुक्ति (64वीं, 65वीं, और 66वीं बैच) के युवा अधिकारियों को शामिल कर उन्हें तकनीकी और महत्वपूर्ण फील्ड पोस्टिंग दी गई है। सरकार ने मात्र 48 घंटे के भीतर कुल 115 अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में बड़ा परिवर्तन कर पूरे कानून-व्यवस्था के ढांचे को नया रूप दिया है। साइबर सुरक्षा पर विशेष ध्यान राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने इस सूची में तकनीकी रूप से सक्षम और युवा अधिकारियों को कमान सौंपी है। नवादा, गया, जमुई और कटिहार जैसे महत्वपूर्ण जिलों में साइबर क्राइम विंग में डीएसपी की तैनाती की गई है। इसमें शाहनवाज अख्तर को नवादा का साइबर क्राइम डीएसपी, अब्दुर रहमान दानिश को गयाजी में साइबर अपराध और अभिषेक कुमार को जमुई का साइबर क्राइम डीएसपी नियुक्त किया गया है। अनुमंडल पुलिस पदाधिकारियों (SDPO) का फेरबदल कई जिलों के अनुमंडलों में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई है ताकि स्थानीय स्तर पर अपराध नियंत्रण को गति दी जा सके। भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को आगे बढ़ाते हुए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Bureau), मद्यनिषेध विंग (Prohibition), और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) में भी बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए हैं। एक पुराना आदेश भी हुआ रद्द इस नए प्रशासनिक आदेश में सरकार ने एक पुराना फैसला भी बदला है। 15 मई को जारी की गई विभागीय अधिसूचना संख्या-6409 के क्रमांक संख्या-50 पर अंकित सुरेन्द्र कुमार सिंह, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, नीमचक बथानी (गयाजी) के पूर्व में किए गए स्थानांतरण/पदस्थापन को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। आदेश के अनुसार, सुरेंद्र कुमार सिंह अपने अगले आदेश तक नीमचक बथानी (गयाजी) के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी के पद पर ही बने रहेंगे। प्रशासनिक दृष्टिकोण: क्यों लिया गया इतना बड़ा फैसला? राज्य सरकार आगामी समय में अपराधियों, भू-माफियाओं और साइबर अपराधियों के खिलाफ एक व्यापक और कड़ा अभियान शुरू करने की तैयारी में है। कई अधिकारी लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे हुए थे, जिन्हें हटाकर मुस्तैद और नए विज़न वाले अधिकारियों को संवेदनशील पदों पर लाया गया है। मुख्यमंत्री और गृह विभाग के स्तर पर लगातार कई दौर की समीक्षा बैठकों के बाद इन सूचियों को अंतिम मुहर लगाई गई है। मुख्यमंत्री में कल भी अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की थी जिस दौरान उन्होंने अधिकारियों से अपराध कर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की बात कही थी।  

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