नयी दिल्ली, सात सितंबर रक्षा मंत्रालय ने सेना के तीनों अंगों के लिए रडार, उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर और ‘मेकेनिकल माइन लेयर (एक विशेष प्रकार का वाहन) समेत सैन्य साजो-सामान की खरीद को सोमवार को मंजूरी दी। इन प्रस्तावों की अनुमानित लागत 1.10 लाख करोड़ रुपये है और इनका उद्देश्य सशस्त्र बलों की समग्र युद्धक क्षमता को बढ़ाना है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद (डीएसी) ने खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘डीएसी ने करीब 1,10,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली रक्षा बलों की विभिन्न खरीद संबंधी परियोजनाओं को आवश्यकता की स्वीकृति (एओएन) प्रदान की, जो सैद्धांतिक प्रशासनिक मंजूरी है।’’
मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारतीय थल सेना के लिए रासायनिक, जैविक, रेडियोधर्मी एवं परमाणु (सीबीआरएन) टोही वाहनों, उच्च गतिशीलता वाले वाहन (एचएमवी), स्वचालित ‘मेकेनिकल माइन लेयर’ (एमएमएल), उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच), ट्रॉल टैंक और सर्वत्र पुल प्रणाली की खरीद को मंजूरी दी गई है।’’
सीबीआरएन टोही वाहन सीबीआरएन पदार्थ से दूषित क्षेत्रों का पता लगाने, उनकी पहचान करने, निगरानी करने और उन्हें चिह्नित करने में सक्षम होंगे। एचएमवी से चुनौतीपूर्ण इलाकों में सैन्य अभियानों की क्षमता, रसद सहायता और आवाजाही में सुधार होने की उम्मीद है। मंत्रालय ने कहा, ‘‘एएलएच भारतीय थल सेना और भारतीय वायुसेना के लिए सभी प्रकार के इलाकों और विभिन्न अभियान परिस्थितियों में जटिल मिशन को अंजाम देंगे।
ट्रॉल टैंक और पुल प्रणाली का इस्तेमाल विभिन्न इलाकों में अभियानों के दौरान लड़ाकू संरचनाओं के लिए संयुक्त रूप से मार्ग तैयार करने में किया जाएगा।’’
भारतीय नौसेना के लिए अरुध्रा रडार तथा मरीन गैस टर्बाइन (एमजीटी) के डिजाइन एवं विकास और उसके बाद उनकी खरीद को एओएन प्रदान की गई। अरुध्रा रडार विभिन्न नौसैनिक वायु स्टेशन पर मौजूदा हवाई मार्ग निगरानी रडार की जगह लगाए जाएंगे। वहीं, युद्धपोतों में प्रणोदन प्रणाली के रूप में इस्तेमाल होने वाले एमजीटी से विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
मंत्रालय के अनुसार, भारतीय वायुसेना की लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों और हेलीकॉप्टरों की युद्धक क्षमता बढ़ाने से संबंधित विभिन्न प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। ग्राउंड-बेस्ड मल्टी-पर्पज जैमर (जीबीएमपीजे) की खरीद और डिफेंस फोर्सेज सिक्योर एक्सेस कार्ड सिस्टम की स्थापना को भी मंजूरी दी गई। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जीबीएमपीजे दुश्मन के रडार के खिलाफ प्रभावी जैमिंग उपलब्ध कराएगा।
मंत्रालय ने कहा कि प्रदान की गई कुल एओएन में से करीब 98 प्रतिशत खरीद भारतीय उद्योग से की जाएगी।

