Unique Village Of Rajasthan: आज के दौर में जब हर कोई आलीशान बंगले और सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहा है, वहीं राजस्थान के ब्यावर जिले में एक ऐसा गांव है जो आपको आज के दौर से काफी पीछे ले जाएगा। यहां लोग आलीशान मकान बनाने के काबिल तो है लेकिन फिर भी रहने के लिए मिट्टी के घर ही बनाते हैं।
यह गांव ब्यावर जिले के मसूदा क्षेत्र में स्थित है। जयपुर से इसकी दूरी लगभग 186 किलोमीटर और अजमेर से लगभग 61 किलोमीटर है। इस गांव की सीमा में कदम रखते ही चारों तरफ मिट्टी के बने कच्चे घर ही दिखाई देंगे। यहां के ग्रामीणों के पास सुख-सुविधा के सभी साधन हैं, मगर मकान पक्का नहीं है। इसके पीछे एक गहरी धार्मिक मान्यता जुड़ी है।
यहां के निवासी भगवान देवनारायण के प्रति अपनी श्रद्धा के कारण पक्के मकान नहीं बनाते। देवमाली में गुर्जर समाज के आराध्य भगवान देवनारायण का प्राचीन मंदिर है। ग्रामीण गांव में रहते और खेती करते हैं, लेकिन जमीन का मालिकाना हक खुद के पास नहीं रखते। उनका मानना है कि सारी जमीन भगवान देवनारायण की है। ऐसी परंपरा बहुत कम जगह देखने को मिलती है।
भारत का सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव
भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने 2024 में राजस्थान के ब्यावर जिले में स्थित देवमाली गांव को ‘बेस्ट टूरिस्ट विलेज’ का सम्मान दिया। यहां की सादगी और पर्यावरण के प्रति प्रेम को देखते हुए देवमाली गांव को यह सम्मान मिला। यह गांव सिखाता है कि प्रकृति के करीब रहकर भी जिंदगी को खुशनुमा बनाया जा सकता है।
ग्रामीण क्या कहते हैं?
गांव के रमेश गुर्जर ने ‘पत्रिका’ से बातचीत में बताया कि आज के आधुनिक युग में भी देवमाली की परंपराएं अटूट हैं। गांव में सभी लोगों के मकान मिट्टी से बने हैं। पूरे गांव में केवल भगवान देवनारायण का मंदिर और सरकारी कार्यालय ही पक्के बने हुए हैं। गांव का कोई भी व्यक्ति इस नियम को नहीं तोड़ता है।
उन्होंने कहा कि हमारा गांव पूरी तरह से शराब मुक्त है। यहां न तो कोई शराब बेचता है, न खरीदता है और न ही कोई बाहर से नशा करके गांव की सीमा में आता है। गांव में लगभग 300 घर हैं और ये सभी एक ही परिवार के सदस्य हैं। हम सबकी यही आस्था है कि भगवान देवनारायण हमारी रक्षा करते हैं।


