लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि परिसीमन से संबंधित हालिया संसदीय कदम का उद्देश्य संसद में तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व को कम करना है। आगामी चुनावों से पहले राज्य में अपना प्रचार अभियान तेज करते हुए उन्होंने यह बात कही। तिरुवल्लूर जिले के पोन्नेरी में एक जनसभा को संबोधित करते हुए गांधी ने इस कदम को दक्षिणी राज्यों को प्रभावित करने वाली एक व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताया। क्षेत्रीय चिंताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा राज्य की पहचान को निशाना बना रहे हैं।
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राहुल ने कहा कि स्वाभाविक रूप से, वर्षों से मेरा तमिलनाडु के लोगों के साथ एक रिश्ता बन गया है। मेरा जन्म तमिलनाडु में नहीं हुआ है, और मेरा परिवार भी तमिलनाडु से नहीं है, फिर भी मैं खुद को तमिलनाडु का ही मानता हूँ। आरएसएस और भाजपा तमिलनाडु, तमिल भाषा और तमिल संस्कृति पर हमला करने की कोशिश कर रहे हैं। मुझे आश्चर्य होता है कि इन लोगों की हिम्मत कैसे हुई तमिलनाडु की तमिल भाषा और संस्कृति पर हमला करने की।
संसद में हुए घटनाक्रम पर गांधी ने दावा किया कि इस विधेयक के पीछे एक गुप्त उद्देश्य छिपा है। उन्होंने कहा कि कल संसद में उन्होंने एक नया विधेयक पेश किया। उन्होंने इसे महिला विधेयक बताया, लेकिन वह तो 2023 में ही पारित हो चुका था। उस विधेयक के पीछे छिपा एजेंडा परिसीमन था। इसका मकसद भारत की संसद में तमिलनाडु के प्रतिनिधित्व को कम करना और दक्षिणी तथा छोटे राज्यों को कमजोर करना था। हमने कल संसद में उस विधेयक को हरा दिया।
अपनी व्यापक राजनीतिक स्थिति स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि भारत “राज्यों का संघ” है, जहाँ प्रत्येक राज्य को समान स्थान मिलना चाहिए। संघ में प्रत्येक राज्य की आवाज़ होनी चाहिए और उसे अपनी भाषा बोलने और अपनी परंपरा की रक्षा करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। भाजपा के शासन के तरीके की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री एक राष्ट्र, एक नेता, एक भाषा, एक जनता की बात करते हैं, तो वे भारत के संविधान पर हमला कर रहे होते हैं।
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चुनाव से पहले इंडिया ब्लॉक को बढ़ावा देते हुए गांधी ने जोर देकर कहा कि गठबंधन केंद्रीकृत नियंत्रण के किसी भी प्रयास का विरोध करेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस दिल्ली से तमिलनाडु को नियंत्रित करना चाहते हैं। हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे। तमिलनाडु को अपना भविष्य खुद तय करना होगा, और हम लोगों के साथ खड़े होकर उनकी भाषा, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा करेंगे।


