लेखक सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी का विरोध:लखनऊ में बुद्धिजीवियों ने गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताया, तत्काल रिहाई की मांग

लेखक सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी का विरोध:लखनऊ में बुद्धिजीवियों ने गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताया, तत्काल रिहाई की मांग

लखनऊ के यूपी प्रेस क्लब में गुरुवार को वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और अनुवादक सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी के विरोध में एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। रिहाई मंच के बैनर तले हुई इस वार्ता में बुद्धिजीवियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने सत्यम वर्मा की गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने नोएडा मजदूर आंदोलन में हुई हिंसा के मामले में सत्यम वर्मा को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया है। उनका कहना था कि सत्यम वर्मा का इस आंदोलन से कोई सीधा संबंध नहीं था। बुद्धिजीवियों ने दावा किया कि उन्हें मजदूर आंदोलनों के समर्थन में लिखने और सरकार की आलोचना करने के कारण निशाना बनाया गया है। ‘षड्यंत्र का मास्टरमाइंड’ साबित करने का प्रयास रिहाई मंच की संयोजिका कविता कृष्णपल्लवी ने कहा कि पुलिस सत्यम वर्मा को ‘षड्यंत्र का मास्टरमाइंड’ साबित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि सत्यम वर्मा लंबे समय से जनचेतना पुस्तक प्रतिष्ठान और अरविंद मेमोरियल ट्रस्ट जैसी संस्थाओं से जुड़े रहे हैं और मजदूर मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं। कवयित्री कात्यायनी ने 10 अप्रैल से 19 अप्रैल तक की पूरी घटनाक्रम की जानकारी दी। उनके अनुसार, 10 अप्रैल को पुलिस पूछताछ के बहाने सत्यम वर्मा को चौकी ले गई।इसके बाद, पुलिस टीम जनचेतना पुस्तक प्रतिष्ठान पहुंची और घंटों तक पूछताछ करती रही। गिरफ्तारी के 42 घंटे तक एक गुप्त स्थान पर रखा गया कात्यायनी ने आरोप लगाया कि 17 अप्रैल को सादी वर्दी में आई नोएडा पुलिस ने बिना किसी स्पष्ट वारंट के पूरे परिसर और आवास की तलाशी ली। पुलिस ने कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन, किताबें और अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए,लेकिन कोई सीजर मेमो (जब्ती ज्ञापन) नहीं दिया। कात्यायनी ने यह भी बताया कि पुलिस ने सत्यम वर्मा को वकीलों से संपर्क करने या आवश्यक दवाएं लेने की अनुमति नहीं दी। आरोप है कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें 42 घंटे तक एक गुप्त स्थान पर रखा गया और फिर 19 अप्रैल को सूरजपुर कोर्ट में पेश किया गया। वक्ताओं ने इन कार्रवाइयों को लोकतांत्रिक अधिकारों का खुला उल्लंघन बताते हुए सत्यम वर्मा की तत्काल रिहाई की मांग की।

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