TRE-4 अभ्यर्थियों पर पुलिस की लाठीचार्ज को लेकर पूरे राज्यभर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया जाएगा। पटना में GPO गोलंबर के पास 4:30 बजे सभी लोग जुटेंगे और अभ्यर्थियों के लिए आवाज उठाएंगे। छात्रों पर हुए इस हमले के खिलाफ भाकपा–माले, आइसा और आरवाईए ने आज विरोध प्रदर्शन का संयुक्त आह्वान किया है। तीनों संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यह युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज को कुचलने की साजिश है। तीनों संगठनों ने मांग किया है कि तत्काल TRE-4 की वैकेंसी जारी की जाए, अभ्यर्थियों की सभी जायज मांगों को पूरा किया जाए, लाठीचार्ज के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और घायल अभ्यर्थियों के इलाज और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। शुक्रवार को अभ्यर्थियों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज, देखिए तस्वीरें… लाठीचार्ज भाजपा-जदयू सरकार की दमनकारी मानसिकता- भाकपा-माले इस प्रदर्शन को लेकर इन तीनों संगठन का कहना है कि अपने भविष्य, रोजगार और शिक्षक बहाली की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे TRE-4 अभ्यर्थियों पर पुलिस द्वारा बर्बरता से लाठीचार्ज करना भाजपा–जदयू सरकार की दमनकारी मानसिकता का खुला प्रदर्शन है। जिन युवाओं के हाथों में कल देश और समाज की शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी होगी, आज उसी युवा पीढ़ी को अपराधियों की तरह सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा जा रहा है। इस लाठीचार्ज में कई अभ्यर्थियों के सिर फट गए, दर्जनों घायल हुए, महिला अभ्यर्थियों के साथ क्रूरतापूर्ण और अमानवीय व्यवहार किया गया। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि रोजगार और अधिकार की मांग उठाने वाले नौजवानों के खिलाफ राज्य प्रायोजित दमन करार दिया है। लाठीचार्ज के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो- भाकपा-माले बिहार में लाखों पद खाली पड़े हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, लेकिन सरकार बहाली निकालने के बजाय युवाओं पर लाठियां बरसा रही है। भाजपा–जदयू सरकार रोजगार देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। जब-जब नौजवान अपने हक, रोजगार और शिक्षा के सवाल पर सड़कों पर उतरते हैं, तब-तब सरकार पुलिस बल के जरिए आंदोलन को कुचलने का प्रयास करती है। अब जानिए, आखिर छात्र-छात्राएं लाठी क्यों खा रहे हैं? पटना में TRE-4 अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज ने बिहार की शिक्षक भर्ती व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार लगातार भर्ती को लेकर तारीखें बदल रही है, लेकिन स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी नहीं कर रही। इसी नाराजगी में हजारों छात्र सड़कों पर उतरे और JP गोलंबर से लेकर डाकबंगला तक प्रदर्शन हुआ। अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार TRE-4 की वैकेंसी तुरंत जारी करे। छात्र नेताओं का कहना है कि पहले 1.20 लाख पदों पर भर्ती निकालने का वादा किया गया था, फिर 46 हजार पदों का दावा सामने आया और बाद में सीटें घटाकर 26-27 हजार तक कर दी गईं। प्रदर्शन में शामिल छात्र कहते हैं कि वे कई सालों से तैयारी कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों ने जमीन गिरवी रखकर कोचिंग की है। कुछ ने निजी नौकरी छोड़ दी। ऐसे में लगातार भर्ती टलती जाएगी तो हमारा कॅरियर खराब हो जाएगा। इस आंदोलन का दूसरा बड़ा कारण यह भी है कि बिहार में शिक्षक भर्ती अब युवाओं के लिए सबसे बड़ा रोजगार विकल्प बन चुकी है। लाखों युवा सिर्फ TRE भर्ती पर निर्भर हैं। इसलिए जब सरकार स्पष्ट जवाब नहीं देती तो गुस्सा सड़क पर फूटता है। कितने दिनों से वैकेंसी नहीं निकली, देरी क्यों बड़ा मुद्दा बन गई? TRE-3 परीक्षा और उसकी प्रक्रिया खत्म होने के बाद अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि 2026 की शुरुआत में TRE-4 का नोटिफिकेशन आ जाएगा। लेकिन मई 2026 तक भी आधिकारिक विज्ञापन जारी नहीं हुआ। यही देरी आंदोलन का सबसे बड़ा कारण बनी है। BPSC परीक्षा नियंत्रक ने अप्रैल 2026 में एक पॉडकास्ट में कहा था कि “तीन-चार दिनों में विज्ञापन जारी होगा” और अप्रैल के अंतिम सप्ताह से आवेदन शुरू हो जाएंगे। लेकिन मई आ गया और भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। छात्रों का आरोप है कि सरकार और आयोग दोनों सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। यदि पिछले TRE चक्र को देखें तो TRE-1, TRE-2 और TRE-3 के बीच का अंतर इतना लंबा नहीं था। पहले भर्ती चक्र अपेक्षाकृत तेज हुए, क्योंकि सरकार ने बड़े पैमाने पर शिक्षक बहाली को प्राथमिकता दी थी। लेकिन अब प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। TRE-4 परीक्षा पर क्या कह रही सरकार? शिक्षा विभाग और BPSC की ओर से TRE-4 को लेकर अलग-अलग समय पर कई संभावित तिथियां बताई गईं। लेकिन अभी तक स्पष्ट और अंतिम आधिकारिक कैलेंडर जारी नहीं हुआ। यही भ्रम आंदोलन को बढ़ा रहा है। सरकार की ओर से कहा गया कि TRE-4 परीक्षा सितंबर 2026 में कराई जा सकती है और रिजल्ट नवंबर तक आएगा। दूसरी ओर सितंबर 2025 में शिक्षा मंत्री ने दिसंबर 2025 में परीक्षा कराने की बात कही थी। क्या मांग कर रहे हैं छात्र-छात्राएं? TRE-4 अभ्यर्थियों की मांगें सिर्फ वैकेंसी जारी करने तक सीमित नहीं हैं। वे भर्ती प्रक्रिया में कई बदलाव भी चाहते हैं। मांग 1: सरकार तुरंत विस्तृत नोटिफिकेशन जारी करे और पदों की संख्या स्पष्ट करे। अभ्यर्थी चाहते हैं कि पहले घोषित 1 लाख से अधिक पदों के अनुसार भर्ती निकले। मांग 2: “एक अभ्यर्थी-एक रिजल्ट” नियम लागू किया जाए। छात्रों का कहना है कि कई बार एक उम्मीदवार कई रिजल्ट में चयनित हो जाता है, जिससे सीटें खाली रह जाती हैं और मेरिट प्रभावित होती है। मांग 3: TRE-4 में PCS जैसी प्री, मेंस और इंटरव्यू प्रणाली लागू न की जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती को जरूरत से ज्यादा जटिल बनाया जा रहा है। मांग 4: आयु सीमा में राहत दी जाए। भर्ती में देरी सरकार की वजह से हुई है, इसलिए ओवरएज होने वाले छात्रों को अतिरिक्त मौका मिलना चाहिए। TRE-4 अभ्यर्थियों पर पुलिस की लाठीचार्ज को लेकर पूरे राज्यभर में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन किया जाएगा। पटना में GPO गोलंबर के पास 4:30 बजे सभी लोग जुटेंगे और अभ्यर्थियों के लिए आवाज उठाएंगे। छात्रों पर हुए इस हमले के खिलाफ भाकपा–माले, आइसा और आरवाईए ने आज विरोध प्रदर्शन का संयुक्त आह्वान किया है। तीनों संगठनों ने इसकी कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि यह युवाओं की लोकतांत्रिक आवाज को कुचलने की साजिश है। तीनों संगठनों ने मांग किया है कि तत्काल TRE-4 की वैकेंसी जारी की जाए, अभ्यर्थियों की सभी जायज मांगों को पूरा किया जाए, लाठीचार्ज के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो और घायल अभ्यर्थियों के इलाज और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। शुक्रवार को अभ्यर्थियों पर पुलिस ने किया लाठीचार्ज, देखिए तस्वीरें… लाठीचार्ज भाजपा-जदयू सरकार की दमनकारी मानसिकता- भाकपा-माले इस प्रदर्शन को लेकर इन तीनों संगठन का कहना है कि अपने भविष्य, रोजगार और शिक्षक बहाली की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे TRE-4 अभ्यर्थियों पर पुलिस द्वारा बर्बरता से लाठीचार्ज करना भाजपा–जदयू सरकार की दमनकारी मानसिकता का खुला प्रदर्शन है। जिन युवाओं के हाथों में कल देश और समाज की शिक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी होगी, आज उसी युवा पीढ़ी को अपराधियों की तरह सड़कों पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा जा रहा है। इस लाठीचार्ज में कई अभ्यर्थियों के सिर फट गए, दर्जनों घायल हुए, महिला अभ्यर्थियों के साथ क्रूरतापूर्ण और अमानवीय व्यवहार किया गया। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि रोजगार और अधिकार की मांग उठाने वाले नौजवानों के खिलाफ राज्य प्रायोजित दमन करार दिया है। लाठीचार्ज के दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो- भाकपा-माले बिहार में लाखों पद खाली पड़े हैं। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, लेकिन सरकार बहाली निकालने के बजाय युवाओं पर लाठियां बरसा रही है। भाजपा–जदयू सरकार रोजगार देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है। जब-जब नौजवान अपने हक, रोजगार और शिक्षा के सवाल पर सड़कों पर उतरते हैं, तब-तब सरकार पुलिस बल के जरिए आंदोलन को कुचलने का प्रयास करती है। अब जानिए, आखिर छात्र-छात्राएं लाठी क्यों खा रहे हैं? पटना में TRE-4 अभ्यर्थियों पर हुए लाठीचार्ज ने बिहार की शिक्षक भर्ती व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार लगातार भर्ती को लेकर तारीखें बदल रही है, लेकिन स्पष्ट नोटिफिकेशन जारी नहीं कर रही। इसी नाराजगी में हजारों छात्र सड़कों पर उतरे और JP गोलंबर से लेकर डाकबंगला तक प्रदर्शन हुआ। अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग है कि सरकार TRE-4 की वैकेंसी तुरंत जारी करे। छात्र नेताओं का कहना है कि पहले 1.20 लाख पदों पर भर्ती निकालने का वादा किया गया था, फिर 46 हजार पदों का दावा सामने आया और बाद में सीटें घटाकर 26-27 हजार तक कर दी गईं। प्रदर्शन में शामिल छात्र कहते हैं कि वे कई सालों से तैयारी कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों ने जमीन गिरवी रखकर कोचिंग की है। कुछ ने निजी नौकरी छोड़ दी। ऐसे में लगातार भर्ती टलती जाएगी तो हमारा कॅरियर खराब हो जाएगा। इस आंदोलन का दूसरा बड़ा कारण यह भी है कि बिहार में शिक्षक भर्ती अब युवाओं के लिए सबसे बड़ा रोजगार विकल्प बन चुकी है। लाखों युवा सिर्फ TRE भर्ती पर निर्भर हैं। इसलिए जब सरकार स्पष्ट जवाब नहीं देती तो गुस्सा सड़क पर फूटता है। कितने दिनों से वैकेंसी नहीं निकली, देरी क्यों बड़ा मुद्दा बन गई? TRE-3 परीक्षा और उसकी प्रक्रिया खत्म होने के बाद अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि 2026 की शुरुआत में TRE-4 का नोटिफिकेशन आ जाएगा। लेकिन मई 2026 तक भी आधिकारिक विज्ञापन जारी नहीं हुआ। यही देरी आंदोलन का सबसे बड़ा कारण बनी है। BPSC परीक्षा नियंत्रक ने अप्रैल 2026 में एक पॉडकास्ट में कहा था कि “तीन-चार दिनों में विज्ञापन जारी होगा” और अप्रैल के अंतिम सप्ताह से आवेदन शुरू हो जाएंगे। लेकिन मई आ गया और भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हुई। छात्रों का आरोप है कि सरकार और आयोग दोनों सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं। यदि पिछले TRE चक्र को देखें तो TRE-1, TRE-2 और TRE-3 के बीच का अंतर इतना लंबा नहीं था। पहले भर्ती चक्र अपेक्षाकृत तेज हुए, क्योंकि सरकार ने बड़े पैमाने पर शिक्षक बहाली को प्राथमिकता दी थी। लेकिन अब प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। TRE-4 परीक्षा पर क्या कह रही सरकार? शिक्षा विभाग और BPSC की ओर से TRE-4 को लेकर अलग-अलग समय पर कई संभावित तिथियां बताई गईं। लेकिन अभी तक स्पष्ट और अंतिम आधिकारिक कैलेंडर जारी नहीं हुआ। यही भ्रम आंदोलन को बढ़ा रहा है। सरकार की ओर से कहा गया कि TRE-4 परीक्षा सितंबर 2026 में कराई जा सकती है और रिजल्ट नवंबर तक आएगा। दूसरी ओर सितंबर 2025 में शिक्षा मंत्री ने दिसंबर 2025 में परीक्षा कराने की बात कही थी। क्या मांग कर रहे हैं छात्र-छात्राएं? TRE-4 अभ्यर्थियों की मांगें सिर्फ वैकेंसी जारी करने तक सीमित नहीं हैं। वे भर्ती प्रक्रिया में कई बदलाव भी चाहते हैं। मांग 1: सरकार तुरंत विस्तृत नोटिफिकेशन जारी करे और पदों की संख्या स्पष्ट करे। अभ्यर्थी चाहते हैं कि पहले घोषित 1 लाख से अधिक पदों के अनुसार भर्ती निकले। मांग 2: “एक अभ्यर्थी-एक रिजल्ट” नियम लागू किया जाए। छात्रों का कहना है कि कई बार एक उम्मीदवार कई रिजल्ट में चयनित हो जाता है, जिससे सीटें खाली रह जाती हैं और मेरिट प्रभावित होती है। मांग 3: TRE-4 में PCS जैसी प्री, मेंस और इंटरव्यू प्रणाली लागू न की जाए। अभ्यर्थियों का कहना है कि शिक्षक भर्ती को जरूरत से ज्यादा जटिल बनाया जा रहा है। मांग 4: आयु सीमा में राहत दी जाए। भर्ती में देरी सरकार की वजह से हुई है, इसलिए ओवरएज होने वाले छात्रों को अतिरिक्त मौका मिलना चाहिए।


