बिहार में शिक्षा विभाग के अंदर फर्जीवाड़े की जड़ें कितनी गहरी है, इसका अंदाजा विजिलेंस जांच की ताजा रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने राज्य भर के उन 1,346 नियोजित शिक्षकों की सूची जारी की है, जिन्होंने 2006 से 2015 के बीच फर्जी या इनवैलिड इंस्टीट्यूट के प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की है। इस मामले में विजिलेंस के महानिदेशक ने कड़ा रुख अपनाते हुए नालंदा के नौ और शेखपुरा के पांच शिक्षकों समेत सभी संदिग्धों का पूरा ब्योरा जिला शिक्षा पदाधिकारियों से तलब किया है। निगरानी विभाग की जांच में देशभर के 10 ऐसे संस्थानों को चिन्हित किया गया है जिनकी डिग्रियां अमान्य हैं, लेकिन उनके आधार पर बिहार में एक बड़ी संख्या में शिक्षक वर्षों से वेतन उठा रहे हैं। नालंदा जिले में मंदार विद्यापीठ के प्रमाणपत्रों पर सात और प्रयाग महिला विद्यापीठ के प्रमाणपत्रों पर दो शिक्षक कार्यरत पाए गए हैं। इसी तरह शेखपुरा में मंदार विद्यापीठ से तीन, प्रयाग महिला विद्यापीठ से एक और हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद से एक फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए बहाली का मामला सामने आया है। डीईओ से सैलरी और सेवामुक्त करने की जानकारी मांगी गई है विजिलेंस ने सभी डीईओ को भेजे पत्र में स्पष्ट रूप से पूछा है कि इन शिक्षकों के खिलाफ अब तक नियोजन इकाइयों ने क्या कार्रवाई की है। महानिदेशक ने वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा है कि ये शिक्षक अभी भी विद्यालय में तैनात हैं या उन्हें सेवामुक्त कर दिया गया है। साथ ही उनके वेतन भुगतान की वर्तमान स्थिति की भी जानकारी मांगी गई है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा हिंदी विद्यापीठ देवघर के प्रमाणपत्रों पर हुआ है, जहां से 702 शिक्षकों ने डिग्रियां ली थीं। इसके अलावा दक्षिण भारती हिंदी प्रचार सभा मद्रास, काशी विद्यापीठ वाराणसी और हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद जैसे संस्थानों के नाम पर भी सैकड़ों शिक्षकों ने अमान्य सर्टिफिकेट पेश किए हैं। रिपोर्ट विजिलेंस को भेजा जाएगा नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने पुष्टि की है कि विजिलेंस की टीम ने जिले के नौ शिक्षकों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि ये शिक्षक अमान्य संस्थानों के दस्तावेजों पर बहाल हुए थे, अब विभाग उन पर की गई अब तक की कार्रवाई और उनके वर्तमान स्टेटस की रिपोर्ट तैयार कर विजिलेंस को भेजने की तैयारी में है। इस खुलासे के बाद से शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है और आने वाले दिनों में इन शिक्षकों पर प्राथमिकी के साथ-साथ वेतन रिकवरी की तलवार भी लटक रही है। बिहार में शिक्षा विभाग के अंदर फर्जीवाड़े की जड़ें कितनी गहरी है, इसका अंदाजा विजिलेंस जांच की ताजा रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने राज्य भर के उन 1,346 नियोजित शिक्षकों की सूची जारी की है, जिन्होंने 2006 से 2015 के बीच फर्जी या इनवैलिड इंस्टीट्यूट के प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की है। इस मामले में विजिलेंस के महानिदेशक ने कड़ा रुख अपनाते हुए नालंदा के नौ और शेखपुरा के पांच शिक्षकों समेत सभी संदिग्धों का पूरा ब्योरा जिला शिक्षा पदाधिकारियों से तलब किया है। निगरानी विभाग की जांच में देशभर के 10 ऐसे संस्थानों को चिन्हित किया गया है जिनकी डिग्रियां अमान्य हैं, लेकिन उनके आधार पर बिहार में एक बड़ी संख्या में शिक्षक वर्षों से वेतन उठा रहे हैं। नालंदा जिले में मंदार विद्यापीठ के प्रमाणपत्रों पर सात और प्रयाग महिला विद्यापीठ के प्रमाणपत्रों पर दो शिक्षक कार्यरत पाए गए हैं। इसी तरह शेखपुरा में मंदार विद्यापीठ से तीन, प्रयाग महिला विद्यापीठ से एक और हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद से एक फर्जी प्रमाणपत्र के जरिए बहाली का मामला सामने आया है। डीईओ से सैलरी और सेवामुक्त करने की जानकारी मांगी गई है विजिलेंस ने सभी डीईओ को भेजे पत्र में स्पष्ट रूप से पूछा है कि इन शिक्षकों के खिलाफ अब तक नियोजन इकाइयों ने क्या कार्रवाई की है। महानिदेशक ने वर्तमान स्थिति स्पष्ट करने को कहा है कि ये शिक्षक अभी भी विद्यालय में तैनात हैं या उन्हें सेवामुक्त कर दिया गया है। साथ ही उनके वेतन भुगतान की वर्तमान स्थिति की भी जानकारी मांगी गई है। आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा हिंदी विद्यापीठ देवघर के प्रमाणपत्रों पर हुआ है, जहां से 702 शिक्षकों ने डिग्रियां ली थीं। इसके अलावा दक्षिण भारती हिंदी प्रचार सभा मद्रास, काशी विद्यापीठ वाराणसी और हिंदी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद जैसे संस्थानों के नाम पर भी सैकड़ों शिक्षकों ने अमान्य सर्टिफिकेट पेश किए हैं। रिपोर्ट विजिलेंस को भेजा जाएगा नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय ने पुष्टि की है कि विजिलेंस की टीम ने जिले के नौ शिक्षकों के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि ये शिक्षक अमान्य संस्थानों के दस्तावेजों पर बहाल हुए थे, अब विभाग उन पर की गई अब तक की कार्रवाई और उनके वर्तमान स्टेटस की रिपोर्ट तैयार कर विजिलेंस को भेजने की तैयारी में है। इस खुलासे के बाद से शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है और आने वाले दिनों में इन शिक्षकों पर प्राथमिकी के साथ-साथ वेतन रिकवरी की तलवार भी लटक रही है।


