सीतापुर की प्रियशा वर्मा ने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की:चौथे प्रयास में 324वीं रैंक हासिल की, जिले का मान बढ़ाया

सीतापुर की प्रियशा वर्मा ने यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की:चौथे प्रयास में 324वीं रैंक हासिल की, जिले का मान बढ़ाया

सीतापुर के महोली इलाके में लौकी गांव की प्रियशा वर्मा ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में 324वीं रैंक हासिल की है। उनकी इस सफलता पर क्षेत्र में हर्ष का माहौल है। विधायक शशांक त्रिवेदी और सांसद आनंद भदौरिया सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने प्रियशा को बधाई दी है। प्रियशा वर्मा ने बताया कि उनके पिता वेस्ट रेलवे में चीफ इंजीनियर हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लखनऊ के सिटी मांटेसरी स्कूल (सीएमएस) गोमती नगर से प्राप्त की। इसके बाद, उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। प्रियशा के ने कहा उनके नाना उत्तर प्रदेश कैडर में एसडीएम थे और चचेरे भाई भी आईएएस अधिकारी हैं। इससे उन्हें बचपन से ही प्रशासनिक सेवा में जाने की प्रेरणा मिली। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रियशा ने लगभग पांच वर्ष पहले यूपीएससी परीक्षा की तैयारी शुरू की थी। शुरुआती तीन प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और निरंतर प्रयास करती रहीं। आखिरकार, चौथे प्रयास में उन्हें 324वीं रैंक के साथ सफलता मिली। प्रियशा ने बताया कि उन्होंने लॉकडाउन के दौरान अपनी पढ़ाई शुरू की। शुरुआत में उन्होंने ऑनलाइन माध्यम से तैयारी की, लेकिन बाद में कोचिंग की मदद भी ली। वे प्रतिदिन 8 से 10 घंटे पढ़ाई करती थीं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। प्रियशा के मुताबिक, वह इसी परिणाम को अपना अंतिम लक्ष्य नहीं मानेंगी और आगे भी अन्य परीक्षाएं देंगी। प्रियशा के माता-पिता ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन था कि उनकी बेटी एक दिन अधिकारी बनेगी और उनका नाम रोशन करेगी। यूपीएससी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रियशा वर्मा ने सलाह दी कि वे अपने लक्ष्यों को स्पष्ट रखें, कड़ी मेहनत करें और असफलताओं से सीख लें। उन्होंने खुद पर विश्वास रखने, सकारात्मक सोच रखने और छोटे-छोटे कदम उठाने पर जोर दिया। विधायक शशांक त्रिवेदी ने सोशल मीडिया पर प्रियशा की सफलता को क्षेत्र के सभी छात्र-छात्राओं के लिए प्रेरणा बताया। उन्होंने कहा कि यह सफलता उनकी वर्षों की तपस्या, माता-पिता के आशीर्वाद और अटूट धैर्य का परिणाम है।

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