समस्तीपुर में आलू किसानों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। मंडियों में आलू की कीमत 5 से 6 रुपए प्रति किलो बिक रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। अखिल भारतीय किसान महासभा और भाकपा माले ने सरकार से आलू सहित अन्य फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है। जिले के ताजपुर, पूसा, मोरवा और सरायरंजन जैसे आलू उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में किसान इस संकट से जूझ रहे हैं। किसानों का कहना है कि वर्तमान कीमतों पर आलू बेचने से उनकी खेती की लागत भी नहीं निकल पा रही है। मंडी कारोबारी मंजीत कुमार सिंह और श्यामबाबू सिंह के अनुसार, बाजार में कमजोर मांग और बाहरी राज्यों से आलू की आवक बढ़ने के कारण कीमतों में भारी गिरावट आई है। इस साल ताजपुर समेत जिले के अलग-अलग प्रखंडों में आलू की पैदावार भी अच्छी नहीं हुई है, जिससे कम कीमत किसानों, व्यापारियों और कृषि विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई है। लागत निकलना भी मुश्किल हो रहा अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता और आलू उत्पादक ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने बताया कि बीज, खाद, जुताई, सिंचाई, दवाई, मजदूरी और परिवहन मिलाकर प्रति किलो लगभग करीब 15 रुपए आती है। इसके बावजूद किसानों को अपना आलू 5-6 रुपए प्रति किलो बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। किसान दिनेश प्रसाद सिंह ने कहा कि 25 वर्षों से आलू की खेती कर रहे हैं, लेकिन इतनी कम कीमत उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। मोतीपुर के राजदेव प्रसाद सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, मोती लाल सिंह, फतेहपुर के मनोज कुमार सिंह, रतन सिंह, रहीमाबाद के मुंशीलाल राय, कस्बे आहर के संजीव राय और रामापुर महेशपुर के शिव कुमार सिंह का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने की क्षमता सीमित है और इसके लिए अलग से भंडारण शुल्क भी देना पड़ता है। ऐसे में छोटे और सीमांत किसान तत्काल नकदी की जरूरत के कारण कम दाम पर ही फसल बेच रहे हैं। किसानों ने सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने, बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने और कोल्ड स्टोरेज शुल्क में राहत देने की मांग की है।
किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह का कहना है कि अगर समय रहते सरकारी खरीद या बाजार स्थिरीकरण के उपाय नहीं किए गए, तो किसानों का रुझान अगली फसल में आलू उत्पादन से कम हो सकता है, जिसका असर आने वाले समय में बाजार पर भी पड़ेगा। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। आलू उत्पादक किसान राजदेव प्रसाद सिंह ने सरकार से पश्चिम बंगाल के तर्ज पर बिहार में भी आलू की सरकारी दर तय कर खरीद करने को लेकर आर्डिनेंस जारी करने की मांग की है। समस्तीपुर में आलू किसानों की स्थिति दयनीय बनी हुई है। मंडियों में आलू की कीमत 5 से 6 रुपए प्रति किलो बिक रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। अखिल भारतीय किसान महासभा और भाकपा माले ने सरकार से आलू सहित अन्य फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू करने की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है। जिले के ताजपुर, पूसा, मोरवा और सरायरंजन जैसे आलू उत्पादन के प्रमुख क्षेत्रों में किसान इस संकट से जूझ रहे हैं। किसानों का कहना है कि वर्तमान कीमतों पर आलू बेचने से उनकी खेती की लागत भी नहीं निकल पा रही है। मंडी कारोबारी मंजीत कुमार सिंह और श्यामबाबू सिंह के अनुसार, बाजार में कमजोर मांग और बाहरी राज्यों से आलू की आवक बढ़ने के कारण कीमतों में भारी गिरावट आई है। इस साल ताजपुर समेत जिले के अलग-अलग प्रखंडों में आलू की पैदावार भी अच्छी नहीं हुई है, जिससे कम कीमत किसानों, व्यापारियों और कृषि विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई है। लागत निकलना भी मुश्किल हो रहा अखिल भारतीय किसान महासभा के नेता और आलू उत्पादक ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने बताया कि बीज, खाद, जुताई, सिंचाई, दवाई, मजदूरी और परिवहन मिलाकर प्रति किलो लगभग करीब 15 रुपए आती है। इसके बावजूद किसानों को अपना आलू 5-6 रुपए प्रति किलो बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। किसान दिनेश प्रसाद सिंह ने कहा कि 25 वर्षों से आलू की खेती कर रहे हैं, लेकिन इतनी कम कीमत उन्होंने पहले कभी नहीं देखी। मोतीपुर के राजदेव प्रसाद सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, मोती लाल सिंह, फतेहपुर के मनोज कुमार सिंह, रतन सिंह, रहीमाबाद के मुंशीलाल राय, कस्बे आहर के संजीव राय और रामापुर महेशपुर के शिव कुमार सिंह का कहना है कि कोल्ड स्टोरेज में आलू रखने की क्षमता सीमित है और इसके लिए अलग से भंडारण शुल्क भी देना पड़ता है। ऐसे में छोटे और सीमांत किसान तत्काल नकदी की जरूरत के कारण कम दाम पर ही फसल बेच रहे हैं। किसानों ने सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने, बाजार हस्तक्षेप योजना लागू करने और कोल्ड स्टोरेज शुल्क में राहत देने की मांग की है।
किसानों ने दी आंदोलन की चेतावनी भाकपा माले प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह का कहना है कि अगर समय रहते सरकारी खरीद या बाजार स्थिरीकरण के उपाय नहीं किए गए, तो किसानों का रुझान अगली फसल में आलू उत्पादन से कम हो सकता है, जिसका असर आने वाले समय में बाजार पर भी पड़ेगा। अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। आलू उत्पादक किसान राजदेव प्रसाद सिंह ने सरकार से पश्चिम बंगाल के तर्ज पर बिहार में भी आलू की सरकारी दर तय कर खरीद करने को लेकर आर्डिनेंस जारी करने की मांग की है।


