Medical College: इंटर्नशिप के बाद भी अटकी पोस्टिंग, 682 स्टूडेंट्स कर रहे इलाज, कब मिलेगा बॉन्ड ऑर्डर? जानिए नया नियम

Medical College: इंटर्नशिप के बाद भी अटकी पोस्टिंग, 682 स्टूडेंट्स कर रहे इलाज, कब मिलेगा बॉन्ड ऑर्डर? जानिए नया नियम

रायपुर @पीलूराम साहू। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मार्च में इंटर्नशिप पूरी कर चुके प्रदेश के 682 छात्रों की दो साल की बांड पोस्टिंग अब तक नहीं हुई है। उनकी इंटर्नशिप पूरी हुए डेढ़ माह बीत चुके हैं। इससे छात्रों की परेशानी बढ़ गई है। मेरिट के अनुसार पोस्टिंग दी जाएगी। इसके लिए नेहरू मेडिकल कॉलेज में काउंसिलिंग हो चुकी है। संभावना है कि एक सप्ताह के भीतर पोस्टिंग आदेश निकल जाएगा।

पोस्टिंग नहीं होने से ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को भी इन डॉक्टरों के इलाज का लाभ नहीं मिल रहा है। अब तो मेडिकल कॉलेजों में भी इन छात्रों को जूनियर रेसीडेंट की तरह पोस्टिंग दी जा रही है। इससे छोटे कॉलेजों में मरीजों के इलाज में मदद मिलती है। जिला अस्पतालों व सीएचसी में पोस्टिंग से ग्रामीण मरीजों का इलाज हो पाता है।

छात्र चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई करते हैं। पोस्टिंग स्वास्थ्य विभाग करता था, लेकिन पिछले दो सालों से डीएमई काउंसिलिंग करवा रहा है। दो साल पहले आचार संहिता का हवाला देकर पोस्टिंग में देरी की गई। जबकि जानकारों के अनुसार आचार संहिता के नियम लागू नहीं होते। छात्रों को दो साल सेवा अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने पर उन्हें हैल्थ साइंस विवि से स्थायी डिग्री नहीं मिलेगी। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में स्थायी पंजीयन भी नहीं होगा। छात्रों को सामान्य क्षेत्र के लिए हर माह 57150 रुपए व अनुसूचित क्षेत्र के लिए 69850 रुपए मानदेय दिया जा रहा है।

एक साल का बांड, 2031 से मिलेगा छात्रों को फायदा

एमबीबीएस छात्रों को कोर्स पूरा करने के बाद एक साल के बांड का लाभ 2031 में मिलेगा। ये नियम 2025 बैच में एडमिशन लेने वाले छात्रों के लिए लागू कर दिया गया है। यानी छात्र जब साढ़े 4 साल का कोर्स व एक साल की इंटर्नशिप पूरी कर लेंगे, तब वे दो के बजाय एक साल की बांड सेवा में जाएंगे। कई छात्रों व पालकों को लग रहा था कि पहले एडमिशन ले चुके छात्रों को नए नियम का लाभ होगा, लेकिन ऐसा नहीं है। इस संबंध में पिछले साल राज्य शासन ने आदेश जारी किया था।

2024 से बिना नियम बनाए दो साल के बांड में छात्रों की पोस्टिंग मेडिकल कॉलेजों में की जा रही है। जबकि पहले जिला अस्पताल, सीएचसी व पीएचसी में पोस्टिंग होती थी। कुछ रसूखदार छात्र जरूर मेडिकल कॉलेज में पोस्टिंग करवा लेते थे। पहले इसे दो साल की ग्रामीण सेवा भी कहा जाता था। लेकिन अब बांड पोस्टिंग पूरी तरह बदल गई है।

ज्यादा जरूरत ग्रामीण क्षेत्र को

बांड में जाने वाले डॉक्टरों की जरूरत ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में ज्यादा है। दरअसल ये अस्पताल पहले ही डॉक्टरों की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहर या अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है। पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की बात करें तो यहां जेआर यानी जूनियर रेसीडेंट डॉक्टर एक क्लर्क की तरह काम करता है। मरीजों का इलाज न के बराबर करता है। ओपीडी में दवा पर्ची लिखना या वार्ड में दूसरे काम कराया जाता है। वहीं दूसरे मेडिकल कॉलेजों में ये जेआर मरीजों का इलाज करते हैं। दरअसल वहां पहले से ही डॉक्टरों की कमी है।

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