PMCH में MBBS की पढ़ाई अब स्मार्ट क्लास में होगी:1 अक्टूबर से नए बैच की शुरुआत, स्मार्ट बोर्ड लगेंगे; पीछे बैठे स्टूडेंट्स तक पहुंचेगी टीचर की आवाज

PMCH में MBBS की पढ़ाई अब स्मार्ट क्लास में होगी:1 अक्टूबर से नए बैच की शुरुआत, स्मार्ट बोर्ड लगेंगे; पीछे बैठे स्टूडेंट्स तक पहुंचेगी टीचर की आवाज

पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में अब एमबीबीएस की पढ़ाई स्मार्ट क्लास में होगी। छात्रों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के बाद कॉलेज प्रशासन ने यह फैसला लिया है। 1 अक्टूबर से बैच के इंट्रैक्शन सेशन के साथ इसकी शुरुआत होगी। कॉलेज के व्याख्यान कक्ष संख्या-1 और 2 में 30 सितंबर तक स्मार्ट बोर्ड लगाए जाएंगे। इसके बाद नियमित एमबीबीएस कक्षाओं में भी इनका उपयोग किया जाएगा। दरअसल, बड़े लेक्चर हॉल में पीछे बैठे छात्रों को ब्लैक बोर्ड पर लिखा साफ दिखाई नहीं देता था। कई बार शिक्षकों की आवाज भी अंतिम पंक्ति तक ठीक से नहीं पहुंचती थी। इससे छात्रों को पढ़ाई का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। अब कॉलेज प्रशासन ने बोर्ड, ऑडियो सिस्टम और कूलिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने का कदम उठाया है। मेडिकल की पढ़ाई में डायग्राम और विजुअल सामग्री महत्वपूर्ण होती है, जो अब छात्रों को स्पष्ट दिखेगी। अटेंडेंस का संकट, 2022 बैच की उपस्थिति 45% से भी कम

क्लासरूम की व्यवस्था का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है, जब छात्रों की उपस्थिति को लेकर कॉलेज प्रशासन पहले से सख्त है। 2022 बैच के करीब 200 एमबीबीएस छात्रों की वर्तमान उपस्थिति लगभग 45 फीसदी से भी कम बताई जा रही है। छात्रों को दिसंबर तक न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति पूरी करनी है। कॉलेज प्रशासन की ओर से छात्रों को नियमित कक्षाओं में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्राचार्य की ओर से सख्ती और अल्टीमेटम के बावजूद कक्षाओं में छात्रों की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं पहुंच रही थी। इसके बाद प्रशासन ने छात्रों की शिकायतों के दूसरे पहलू पर भी ध्यान दिया और क्लासरूम की शिक्षण व्यवस्था को बेहतर करने का निर्णय लिया।

स्मार्ट बोर्ड पर दिखेंगे डायग्राम, चार्ट और प्रेजेंटेशन नई व्यवस्था में शिक्षक केवल ब्लैक बोर्ड पर लिखकर पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे। स्मार्ट बोर्ड के जरिए डिजिटल प्रेजेंटेशन, चित्र, चार्ट, डायग्राम और अन्य अध्ययन सामग्री छात्रों को स्क्रीन पर दिखाई जा सकेगी।
इसका सबसे बड़ा फायदा बड़े लेक्चर हॉल में पीछे बैठने वाले छात्रों को मिलने की उम्मीद है। स्क्रीन पर प्रदर्शित सामग्री को कक्षा के अलग-अलग हिस्सों से अधिक आसानी से देखा जा सकेगा। मेडिकल शिक्षा में शरीर रचना विज्ञान, पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी समेत कई विषयों में चित्र और डायग्राम के जरिए समझाने की जरूरत होती है। ऐसे में डिजिटल डिस्प्ले से पढ़ाई को अधिक स्पष्ट बनाने में मदद मिल सकती है। स्मार्ट बोर्ड के साथ साउंड सिस्टम भी जरूरी कक्षा में माइक्रोफोन और पर्याप्त क्षमता वाले स्पीकर की व्यवस्था होने से शिक्षक की आवाज अंतिम पंक्ति तक पहुंचाई जा सकेगी। खासकर ऐसे लेक्चर में, जिसमें शिक्षक को लगातार समझाना, महत्वपूर्ण बिंदु बताना और डायग्राम के साथ व्याख्या करना होता है, स्पष्ट ऑडियो व्यवस्था जरूरी मानी जा रही है।
खराब एसी भी बनी थी समस्या PMCH की कक्षाओं में एसी खराब रहने की समस्या भी छात्रों के लिए परेशानी का कारण बनी थी। कॉलेज प्रशासन के अनुसार एसी से जुड़ी समस्या को हाल में ठीक किया गया है। अब क्लासरूम की दूसरी कमियों को दूर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन का फोकस अब केवल छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कोशिश है कि कक्षा में ऐसी शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, जिससे छात्रों को लेक्चर समझने और अध्ययन सामग्री देखने में परेशानी न हो।
75 फीसदी अटेंडेंस नहीं रहा तो सेंटअप में हो सकती परेशानी प्राचार्य प्रो. गीता सिन्हा ने कहा कि छात्रों की सुविधा के लिए कक्षाओं को स्मार्ट बनाया जा रहा है। कक्षा में आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ छात्रों को नियमित उपस्थिति के लिए भी निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा कि 75 फीसदी उपस्थिति पूरी नहीं करने वाले छात्रों को सेंटअप में शामिल होने में परेशानी हो सकती है। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में अब एमबीबीएस की पढ़ाई स्मार्ट क्लास में होगी। छात्रों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के बाद कॉलेज प्रशासन ने यह फैसला लिया है। 1 अक्टूबर से बैच के इंट्रैक्शन सेशन के साथ इसकी शुरुआत होगी। कॉलेज के व्याख्यान कक्ष संख्या-1 और 2 में 30 सितंबर तक स्मार्ट बोर्ड लगाए जाएंगे। इसके बाद नियमित एमबीबीएस कक्षाओं में भी इनका उपयोग किया जाएगा। दरअसल, बड़े लेक्चर हॉल में पीछे बैठे छात्रों को ब्लैक बोर्ड पर लिखा साफ दिखाई नहीं देता था। कई बार शिक्षकों की आवाज भी अंतिम पंक्ति तक ठीक से नहीं पहुंचती थी। इससे छात्रों को पढ़ाई का पूरा लाभ नहीं मिल पाता था। अब कॉलेज प्रशासन ने बोर्ड, ऑडियो सिस्टम और कूलिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने का कदम उठाया है। मेडिकल की पढ़ाई में डायग्राम और विजुअल सामग्री महत्वपूर्ण होती है, जो अब छात्रों को स्पष्ट दिखेगी। अटेंडेंस का संकट, 2022 बैच की उपस्थिति 45% से भी कम

क्लासरूम की व्यवस्था का मुद्दा ऐसे समय सामने आया है, जब छात्रों की उपस्थिति को लेकर कॉलेज प्रशासन पहले से सख्त है। 2022 बैच के करीब 200 एमबीबीएस छात्रों की वर्तमान उपस्थिति लगभग 45 फीसदी से भी कम बताई जा रही है। छात्रों को दिसंबर तक न्यूनतम 75 फीसदी उपस्थिति पूरी करनी है। कॉलेज प्रशासन की ओर से छात्रों को नियमित कक्षाओं में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्राचार्य की ओर से सख्ती और अल्टीमेटम के बावजूद कक्षाओं में छात्रों की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं पहुंच रही थी। इसके बाद प्रशासन ने छात्रों की शिकायतों के दूसरे पहलू पर भी ध्यान दिया और क्लासरूम की शिक्षण व्यवस्था को बेहतर करने का निर्णय लिया।

स्मार्ट बोर्ड पर दिखेंगे डायग्राम, चार्ट और प्रेजेंटेशन नई व्यवस्था में शिक्षक केवल ब्लैक बोर्ड पर लिखकर पढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे। स्मार्ट बोर्ड के जरिए डिजिटल प्रेजेंटेशन, चित्र, चार्ट, डायग्राम और अन्य अध्ययन सामग्री छात्रों को स्क्रीन पर दिखाई जा सकेगी।
इसका सबसे बड़ा फायदा बड़े लेक्चर हॉल में पीछे बैठने वाले छात्रों को मिलने की उम्मीद है। स्क्रीन पर प्रदर्शित सामग्री को कक्षा के अलग-अलग हिस्सों से अधिक आसानी से देखा जा सकेगा। मेडिकल शिक्षा में शरीर रचना विज्ञान, पैथोलॉजी, फार्माकोलॉजी समेत कई विषयों में चित्र और डायग्राम के जरिए समझाने की जरूरत होती है। ऐसे में डिजिटल डिस्प्ले से पढ़ाई को अधिक स्पष्ट बनाने में मदद मिल सकती है। स्मार्ट बोर्ड के साथ साउंड सिस्टम भी जरूरी कक्षा में माइक्रोफोन और पर्याप्त क्षमता वाले स्पीकर की व्यवस्था होने से शिक्षक की आवाज अंतिम पंक्ति तक पहुंचाई जा सकेगी। खासकर ऐसे लेक्चर में, जिसमें शिक्षक को लगातार समझाना, महत्वपूर्ण बिंदु बताना और डायग्राम के साथ व्याख्या करना होता है, स्पष्ट ऑडियो व्यवस्था जरूरी मानी जा रही है।
खराब एसी भी बनी थी समस्या PMCH की कक्षाओं में एसी खराब रहने की समस्या भी छात्रों के लिए परेशानी का कारण बनी थी। कॉलेज प्रशासन के अनुसार एसी से जुड़ी समस्या को हाल में ठीक किया गया है। अब क्लासरूम की दूसरी कमियों को दूर करने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रशासन का फोकस अब केवल छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने तक सीमित नहीं है। कोशिश है कि कक्षा में ऐसी शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, जिससे छात्रों को लेक्चर समझने और अध्ययन सामग्री देखने में परेशानी न हो।
75 फीसदी अटेंडेंस नहीं रहा तो सेंटअप में हो सकती परेशानी प्राचार्य प्रो. गीता सिन्हा ने कहा कि छात्रों की सुविधा के लिए कक्षाओं को स्मार्ट बनाया जा रहा है। कक्षा में आधुनिक शिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ छात्रों को नियमित उपस्थिति के लिए भी निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा कि 75 फीसदी उपस्थिति पूरी नहीं करने वाले छात्रों को सेंटअप में शामिल होने में परेशानी हो सकती है।  

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