मोदी सरकार की मंत्रिपरिषद का दो-दिवसीय चिंतन शिविर बुधवार को शुरू हुआ, जिसमें मंत्रालयों और विभागों के जारी कार्य, भविष्य की योजनाओं और अगली पीढ़ी के सुधारों पर चर्चा की जा रही है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित दो-दिवसीय मंथन सत्र का मुख्य उद्देश्य मंत्रालयों और विभागों के काम का जायजा लेना, उनके बीच तालमेल बेहतर करना, सरकार के भविष्य का एजेंडा और योजनाएं तैयार करना तथा कल्याणकारी योजनाओं एवं बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर जारी काम की समीक्षा करना है। इस तरह की बैठक के जरिये सरकार के विभिन्न पहलुओं का जायजा लेने का काम अगले हफ्ते भी होने की उम्मीद है।
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार और बृहस्पतिवार को चिंतन शिविर में विकसित भारत 2047 की दिशा में नये विचारों, सुधारों और प्राथमिकताओं की पहचान की जाएगी। ‘विकसित भारत’ कवायद 2021 से जारी है। विजन 2047 और इसके लघु अवधि एवं दीर्घ अवधि के रोडमैप को तैयार करने के लिए सचिवों के 10 क्षेत्र-आधारित समूह बनाए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, इस कवायद के लिए हितधारकों के साथ व्यापक स्तर पर परामर्श भी किया गया। तब से, विकसित भारत 2047 के विभिन्न पहलुओं पर मंत्रिपरिषद के समक्ष आठ प्रस्तुतियां और चर्चाएं हो चुकी हैं। मौजूदा चिंतन शिविर इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाता है।
यह सचिवों, मंत्रालयों और विभागों, कैबिनेट सचिवालय और नीति आयोग के समूहों द्वारा किए जा रहे काम को एक मंच पर लाता है, जिनमें सुधार, जीवन को आसान बनाना, नियमों के पालन को सहज करना और शासन से जुड़ी अन्य प्राथमिकताएं शामिल हैं। चिंतन शिविर में सरकारी योजनाओं की प्रगति, नीतियों के कार्यान्वयन, समय प्रबंधन, मंत्रालयों के बीच तालमेल और जन-सेवाएं प्रदान करने जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। कार्यक्रमों (योजनाओं) का तय समय-सीमा में कार्यान्वयन करने और प्रशासन से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए लगभग छह समूह बनाए गए हैं, जिनमें से प्रत्येक में आठ मंत्री शामिल हैं।
ये समूह पहले ही कई बैठकें कर चुके हैं, जिनमें चिंतन बैठक में दी जाने वाली प्रस्तुतियों पर चर्चा की गई थी। सूत्रों के अनुसार, कुछ मंत्रियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में सुधार को आगे बढ़ाने के लिए उनके मंत्रालयों द्वारा अपनाई गई नीतियों और उपायों पर प्रस्तुतियां देने की संभावना है। प्रधानमंत्री, विभिन्न सुधारों पर जोर देते रहे हैं और उन्होंने पहले भी अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों से कहा था कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना और जीवन को आसान बनाना सरकार का मुख्य ध्येय होना चाहिए।
मंत्रियों की प्रस्तुतियों में नीति-निर्माण की प्रक्रिया को अधिक असरदार और प्रभावकारी बनाने के तरीकों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इसी तरह की कवायद 21 अक्टूबर 2021 को भी की गई थी। उस समय चर्चा का मुख्य विषय शासन और नीति निर्माण था तथा इस कवायद का उद्देश्य मंत्रियों को सरकार के समक्ष पेश आ रही चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करना है।
इसे शासन का जायजा लेने, मंत्रालयों के बीच तालमेल बेहतर बनाने और सरकार का भविष्य का एजेंडा तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है। हाल ही में मंत्रियों और मंत्रालयों को कई निर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें मंत्रालयों के कार्यों के लिए ‘लाइव डैशबोर्ड’ बनाना, प्रगति की समीक्षा करना और सुझाव पाने के लिए सभी कर्मचारियों के साथ बातचीत करना शामिल है। इस महीने की शुरुआत में, प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों से मंत्रालयों और विभागों की आधिकारिक वेबसाइट को अधिक से अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने पर काम करने के लिए कहा था।

