सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत अब तक 18,093 गांवों को ‘आदर्श ग्राम’ घोषित किया गया है जबकि योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों के लिए 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका है। मंत्रालय के अनुसार, ‘आदर्श ग्राम’ योजना के तहत देशभर में 47,200 से अधिक गांवों को शामिल किया गया है, जिससे 47.79 लाख से अधिक नागरिकों को लाभ मिल रहा है। मंत्रालय ने इस सप्ताह की शुरुआत में जारी एक बयान में बताया कि योजना के तहत अब तक कुल 46,944 विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं और 27,032 ग्राम विकास योजनाएं (वीडीपी) तैयार की गई हैं।
इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति (एससी) बहुल गांवों में बुनियादी ढांचे और आवश्यक सेवाओं से जुड़ी कमियों को दूर कर उन्हें आदर्श गांवों के रूप में विकसित करना है। आदर्श ग्राम की परिकल्पना ऐसे गांव के रूप में की गई है, जहां लोगों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, सभी वर्गों की न्यूनतम जरूरतें पूरी हों और उनके बीच असमानता को यथासंभव कम किया जा सके। इस योजना के तीन प्रमुख घटक हैं।
इनमें अनुसूचित जाति बहुल गांवों को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करना, राज्य और जिला स्तर पर सामाजिक-आर्थिक परियोजनाओं के लिए अनुदान देना तथा छात्रावासों का निर्माण एवं मरम्मत करना शामिल है। सितंबर 2026 तक इस योजना के तहत 785 छात्रावासों का निर्माण पूरा हो चुका था। वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने दो छात्रावास परियोजनाओं के संबंध में 61.46 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता आवंटित की है, इनमें एक छात्रावास लड़कियों और दूसरा लड़कों के लिए होगा।
इन दोनों छात्रावासों में कुल 264 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था होगी। मंत्रालय ने योजना के क्रियान्वयन और निगरानी को मजबूत बनाने के लिए पीएम-अजय मोबाइल एप्लिकेशन और पोर्टल भी शुरू किया है। इसके माध्यम से कागज आधारित प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल व्यवस्था में बदलने की दिशा में कदम उठाया गया है, जिससे सभी कार्यों का वास्तविक समय में ऑनलाइन निपटान और निगरानी की जा सकेगी।

