IIT Ropar New PhD Model: देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में डिग्री से ज्यादा प्रैक्टिकल काम और वास्तविक स्किल्स को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान IIT रोपड़ ने Phd की पढ़ाई के नियमों में बदलाव करते हुए देश का पहला ‘प्रोडक्ट और स्टार्टअप ड्रिवन पीएचडी मॉडल’ शुरू किया है। इस नई पहल के तहत अब रिसर्च स्कॉलर्स को सालों-साल बैठकर पन्नों की लंबी और भारी भरकम थीसिस लिखने की जरूरत नहीं होगी। इसके बजाय वास्तविक दुनिया और इंडस्ट्री की समस्याओं को हल करने वाला प्रोडक्ट तैयार करने या नया स्टार्टअप शुरू करने पर ही छात्रों को सीधे डॉक्टरेट यानी Phd की उपाधि मिल जाएगी।
प्रोडक्ट बनाकर कमाने होंगे 10 लाख रुपये
IIT रोपड़ के डायरेक्टर प्रोफेसर राजीव आहूजा के मुताबिक, इस नए मॉडल में रिसर्च स्कॉलर्स पर पारंपरिक थीसिस जमा करने का कोई प्रेशर नहीं रहेगा। संस्थान के एसोसिएट डीन प्रोफेसर सारंग गुंफेकर ने इस नए नियम को स्पष्ट करते हुए कहा कि छात्रों के पास रिसर्च करने की पूरी आजादी होगी। उनका मुख्य लक्ष्य एक उपयोगी प्रोडक्ट बनाना और उसे बाजार में बेचकर कम से कम 10 लाख रुपये का रेवेन्यू हासिल करना होगा। तय कमाई का यह लक्ष्य हासिल करते ही छात्र को पीएचडी की डिग्री सौंप दी जाएगी। संस्थान का मानना है कि पारंपरिक रिसर्च में रिसर्च पेपर पब्लिश कराने का भारी दबाव रहता है, जिसकी वजह से डेटा में हेरफेर या साहित्यिक चोरी (Plagiarism) के मामले सामने आते हैं। यह नया मॉडल छात्रों को इस मानसिक तनाव से पूरी तरह मुक्त रखेगा।

इन 3 तरीकों से पूरी कर सकेंगे PhD
IIT रोपड़ के नए नियमों के तहत कोई भी शोध छात्र तीन प्रमुख माध्यमों में से किसी एक विकल्प को चुनकर अपनी पीएचडी की डिग्री पूरी कर सकता है-
| विकल्प संख्या | माध्यम | डिग्री के लिए जरूरी नियम व शर्तें |
| विकल्प 1 | पेटेंट ग्रांट | अपने नए आविष्कार या तकनीकी खोज का पेटेंट फाइल करके उसे आधिकारिक रूप से मंजूर यानी ग्रांट कराना होगा। |
| विकल्प 2 | स्टार्टअप और रेवेन्यू | अपनी खुद की कंपनी या स्टार्टअप शुरू करें, बाजार की जरूरत के हिसाब से प्रोडक्ट तैयार करें और उसे बेचकर तय कमाई करें। |
| विकल्प 3 | टेक्नोलॉजी ट्रांसफर | अपनी बनाई तकनीक को किसी बड़ी औद्योगिक कंपनी को ट्रांसफर करें, जिससे वह कंपनी प्रोडक्ट तैयार करे और छात्र को उसकी रॉयल्टी मिले। |
IIT सिस्टम में पहली बार हुआ ऐसा बदलाव
दुनिया-भर के विकसित देशों में अब थ्योरी के बजाय प्रैक्टिकल रिसर्च पर तेजी से फोकस किया जा रहा है। हाल ही में चीन में भी एक सिविल इंजीनियरिंग छात्र को बिना थीसिस लिखे सिर्फ एक नए पुल के खंभे का मजबूत डिजाइन और वास्तविक मॉडल तैयार करने पर PhD की उपाधि दी गई थी। भारत में BITS पिलानी के बाद IIT रोपड़ देश का पहला ऐसा IIT बन गया है, जिसने थीसिस के पारंपरिक ढर्रे को तोड़कर काम के नतीजों पर डिग्री देने की शुरुआत की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से देश में रिसर्च का पूरा कल्चर बदलेगा और युवा केवल फाइलों में बंद रहने वाली रिपोर्ट लिखने के बजाय देश के लिए नई टेक्नोलॉजी, उपयोगी उत्पाद और रोजगार तैयार करने के लिए प्रेरित होंगे।

