यूपी में पेट्रोल-डीजल एक बार फिर से किल्लत छा गई है। गुरुवार को लगातार तीसरे दिन कुशीनगर, सोनभद्र, महराजगंज, गोरखपुर, देवरिया और बस्ती के कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लगी दिखीं। कई जगहों पर पेट्रोल और डीजल खत्म होने की भी खबरें सामने आईं। हालांकि, तेल कंपनियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने साफ कहा है कि ईंधन की कोई कमी नहीं है। लोग अफवाह पर ध्यान न दें। महराजगंज में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां 149 पेट्रोल पंपों में से सिर्फ 18-20 पंपों पर ही तेल उपलब्ध हो पा रहा। किसान भी मंगलवार देर रात से ही पंपों पर लाइन लगाकर खड़े रहे। हालात ये हो गए हैं कि पेट्रोल पंप की आसपास की सड़कें पार्किंग स्पेस बन गई हैं। एक-एक किलोमीटर तक ट्रैक्टरों की लंबी लाइनें लगी हैं। ट्रैक्टर-ट्रालियों में ही मच्छरदानी लगाकर लोग सो रहे हैं। लोग रात से ही बड़े-बड़े डिब्बे लेकर अपनी नींद कुर्बान कर पेट्रोल की जुगत के लिए बैठे हुए हैं, पर सुबह तक भी उन्हें पेट्रोल-डीजल नसीब नहीं हो रहा है। बचे-खुचे स्टॉक पर हाथ साफ करने के लिए पेट्रोल पंपों पर मारा मारी शुरू हो गई है। पेट्रोल पंप कर्मचारियों और ग्राहकों में नोंक-झोंक हो रही है। कुशीनगर और गोरखपुर में भी हालात बिगड़ रहे हैं। वहीं, बस्ती में स्थिति को देखते हुए पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर सीमा तय कर दी गई। बाइक चालकों को 200 रुपए और कार चालकों को अधिकतम 1000 रुपए तक का ही फ्यूल दिया गया। बिजनौर की डीएम ने लोगों से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील की। वह खुद घर से कलेक्ट्रेट तक पैदल जाकर संदेश देने की कोशिश की। हालांकि खाद्य एवं रसद नागरिक आपूर्ति मंत्री मनोज पांडेय ने कहा कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। लेकिन, लोग से जरूरत भर ही ईंधन खरीदें। जमाखोरी न करें। उन्होनें कहा- पेट्रोल-डीजल का वैश्विक संकट चल रहा है। इसके बावजूद राहुल गांधी रायबरेली में 100 गाड़ियों का काफिला लेकर चल रहे हैं। ऐसे समय में राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में काम करना चाहिए। यूपी के राज्य स्तरीय समन्वयक (तेल उद्योग) के कार्यकारी निदेशक संजय भंडारी ने बताया- पेट्रोल-डीजल और गैस की कमी नहीं है। स्टॉक भी पर्याप्त है। आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। टर्मिनलों और डिपो से रिटेल आउटलेट्स तक लगातार सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। महराजगंज – खरीफ सीजन की शुरुआत, कैसे होगी खेती? खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही ईंधन संकट गहरा गया है। महराजगंज के किसानों का कहना है- बारिश के बाद खेतों की जुताई और धान की नर्सरी तैयार करने में जुटे थे, लेकिन डीजल की कमी ने उनकी रफ्तार रोक दी है। डीजल न मिलने से न तो खेतों की जुताई हो पा रही है और ना ही दूसरे कामकाज। बीज-खाद लेने के लिए बाजार तक नहीं जा पा रहे हैं। अगर यही स्थिति रही तो इस बार खरीफ की फसल चौपट हो जाएगी। उत्पादन पर असर पड़ने से एक बार फिर से महंगाई की मार देखने को मिल सकती है। धान की खेती पर सबसे ज्यादा असर डीजल संकट का सबसे अधिक असर धान की खेती पर दिखाई दे रहा है। जिले में करीब तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होनी है, लेकिन ट्रैक्टर और पंपिंग सेट बंद होने से खेतों की जुताई और बेहन डालने का काम धीमा पड़ गया है। किसानों का कहना है कि समय पर डीजल नहीं मिला तो धान की रोपाई प्रभावित हो सकती है, जिसका असर सीधे उत्पादन पर पड़ेगा। कई किसान समय पर नर्सरी तैयार नहीं कर पा रहे हैं। जाम से हालात, रातभर लाइनें, वाहनों में गुजर रही रातें नौतनवा, निचलौल, फरेंदा और जिला मुख्यालय समेत कई इलाकों के पेट्रोल पंपों पर डीजल पहुंचते ही लंबी कतारें लग जा रही हैं। किसान ट्रैक्टर, बाइक, गैलन और ड्रम लेकर देर रात से ही लाइन में खड़े हो रहे हैं। कई किसान चादर, पानी की बोतल और मच्छरदानी लेकर पूरी रात पंपों पर इंतजार करते नजर आए। कुछ लोग अपने वाहनों में ही रात गुजारने को मजबूर हैं। डीजल लेने वालों की भीड़ इतनी बढ़ गई कि कई पेट्रोल पंपों के बाहर सड़क तक लंबी लाइनें लग गईं। इससे जाम जैसी स्थिति बन रही है। तेल खत्म होने के बाद कई पंप संचालकों को रस्सी लगाकर बैरिकेडिंग करनी पड़ रही है, जिसके बाद लोग दूसरे पंपों की ओर रुख कर रहे हैं। महराजगंज में बद से बदतर होते हालात, तस्वीरें देखिए…


