Peshawar High Court ने पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की कथित अवैध हिरासत पर मांगा जवाब

Peshawar High Court ने पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी की कथित अवैध हिरासत पर मांगा जवाब

पाकिस्तान के एक उच्च न्यायालय ने मंगलवार को खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी और प्रांतीय विधानसभा अध्यक्ष बाबर सलीम स्वाती को कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखे जाने के मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर 10 दिन के भीतर जवाब मांगा। यह घटनाक्रम एक सप्ताह बाद सामने आया है, जब पेशावर उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर खैबर पख्तूनख्वा के पूर्व मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी का तत्काल पता लगाने और उनके ठिकाने के बारे में जानकारी देने का अनुरोध किया गया था। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कई नेताओं को, जिनमें अफरीदी भी शामिल हैं, 11 अक्टूबर को उत्तर-पश्चिमी प्रांत में कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के कारण आपातकाल लागू किए जाने के तुरंत बाद हिरासत में ले लिया गया था।

न्यायमूर्ति अरशद अली और न्यायमूर्ति फराह जमशेद की खंडपीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई की और संबंधित पक्षों को निर्धारित समय सीमा के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर तक स्थगित कर दी। पूर्व मुख्यमंत्री के भाई मुहम्मद आमिर की ओर से दायर याचिका में अदालत से मामले का तत्काल संज्ञान लेने और अफरीदी को सुरक्षित बरामद करने का आदेश देने का अनुरोध किया गया है।

याचिका के अनुसार, पेशावर के कैपिटल सिटी पुलिस अधिकारी (सीसीपीओ) की मौजूदगी में हथियारबंद और नकाबपोश लोगों ने अफरीदी का कथित तौर पर अपहरण कर लिया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि ‘‘निर्वाचित मुख्यमंत्री का अपहरण संविधान, कानून और मौलिक मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।’’
याचिका में यह भी कहा गया है कि मुख्यमंत्री के जीवन और स्वतंत्रता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है और उनकी कथित अवैध हिरासत पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद चार, नौ, 10 और 14 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता ने अफरीदी के ठिकाने, उन्हें हिरासत में रखने वालों की पहचान और उन्हें कथित तौर पर हिरासत में रखने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कानूनी अधिकार के बारे में जानकारी देने का अनुरोध किया है।

इस बीच, पीटीआई अध्यक्ष बैरिस्टर गौहर अली खान ने सोमवार को पेशावर उच्च न्यायालय में एक अलग याचिका दायर की। इसमें दलील दी गई कि प्रांतीय विधानसभा के प्रस्ताव के बिना आपातकाल घोषित करना संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। याचिका के अनुसार, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने संविधान के अनुच्छेद 232(1) के तहत आपातकाल की घोषणा की थी।

इस अनुच्छेद के तहत किसी प्रांत में आपातकाल लागू करने के लिए प्रांतीय विधानसभा का प्रस्ताव आवश्यक है।

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