पैट मेरिट लिस्ट विवाद, BRABU में दूसरे दिन भी प्रदर्शन:पीजी टॉपर अभिषेक बोले- मेरी एकेडमिक हत्या का प्रयास, अगर योग्य नहीं तो गोल्ड मेडल वापस लौटा दूंगा

पैट मेरिट लिस्ट विवाद, BRABU में दूसरे दिन भी प्रदर्शन:पीजी टॉपर अभिषेक बोले- मेरी एकेडमिक हत्या का प्रयास, अगर योग्य नहीं तो गोल्ड मेडल वापस लौटा दूंगा

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) में पीएचडी प्रवेश परीक्षा (पैट 2023-24) की मेरिट लिस्ट को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को दूसरे दिन भी कुलपति कार्यालय के बाहर छात्रों ने बैठकर प्रदर्शन किया। इतिहास विषय के पीजी सत्र 2021-23 के टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट अभिषेक कुमार ने मेरिट लिस्ट से बाहर किए जाने पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे “मेरी एकेडमिक हत्या का प्रयास” बताया है। अभिषेक कुमार ने कुलाधिपति सह राज्यपाल, कुलपति, उच्च शिक्षा निदेशक और तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर वह अयोग्य हैं तो उन्हें मिला गोल्ड मेडल भी रखने का अधिकार नहीं है। न्याय नहीं मिलने पर उन्होंने मेडल लौटाने की चेतावनी दी है। अभिषेक ने कहा कि पिछले वर्ष विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दो राज्यों के राज्यपालों और कुलपति की मौजूदगी में उन्हें गोल्ड मेडल दिया गया था। ऐसे में अब मेरिट लिस्ट से बाहर किया जाना उनकी मेधा पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने इतिहास विभाग की मेरिट सूची पर रोक लगाने, संकायाध्यक्ष की अनुपस्थिति में संपन्न इंटरव्यू प्रक्रिया की जांच कराने और 100 प्वाइंट रोस्टर के उल्लंघन के दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। कम अंक देकर मेरिट से बाहर करने का आरोप वहीं, भूगोल विषय के गोल्ड मेडलिस्ट अविनाश ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर पैट 2023-24 की मेरिट लिस्ट से बाहर किया गया है। उन्होंने कहा कि वह सत्र 2020-22 के टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें कम अंक देकर मेरिट से बाहर कर दिया गया। अविनाश का आरोप है कि दूसरे अभ्यर्थियों को अधिक अंक देकर चयन प्रक्रिया में पक्षपात किया गया है। इंटरव्यू अच्छा रहा लेकिन मेरिट से नाम गायब उधर, इतिहास विभाग की छात्रा नेहा कुमारी ने भी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है और मेरिट लिस्ट में धांधली की गई है। नेहा के मुताबिक उनका इंटरव्यू काफी अच्छा गया था और सात में से छह सवालों के सही जवाब उन्होंने दिए थे, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम अंतिम मेरिट लिस्ट में शामिल नहीं किया गया। विश्वविद्यालय में दूसरे दिन भी हंगामा पीएचडी नामांकन की अंतिम मेरिट सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर शनिवार को भी विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। कई विषयों के गोल्ड मेडलिस्ट अपने मेडल के साथ विश्वविद्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्र संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। छात्र नेता चंदन यादव के नेतृत्व में छात्रों ने इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेज आर्ट्स प्रो. राजीव कुमार और लीगल ऑफिसर मयंक कपिला से मुलाकात कर मेरिट लिस्ट में धांधली की शिकायत की। इसके बाद छात्र कुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और प्रॉक्टर सह सोशल साइंस के डीन प्रो. आरके चौधरी का घेराव किया। इंटरव्यू में पक्षपात का आरोप छात्रों ने इतिहास, भूगोल समेत कई विषयों में इंटरव्यू प्रक्रिया में पक्षपात और जानबूझकर कम अंक देने का आरोप लगाया। छात्र नेताओं ने सामूहिक आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि मेरिट लिस्ट जारी करने में हुई देरी ने पहले ही छात्रों की चिंता बढ़ा दी थी। छात्र नेता चंदन यादव ने कहा कि यह मेधावी छात्रों के साथ अन्याय है, जबकि छात्र लोजपा नेता गोल्डेन सिंह ने इसे “टॉपरों का गला घोंटने की साजिश” बताया। प्रशासन ने आरोपों को किया खारिज वहीं, प्रॉक्टर सह सोशल साइंस के डीन प्रो. आरके चौधरी ने छात्रों के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वह कई इंटरव्यू बोर्ड में शामिल हुए थे और शोधार्थियों से सवाल भी पूछे थे। बीआरए बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) में पीएचडी प्रवेश परीक्षा (पैट 2023-24) की मेरिट लिस्ट को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। शनिवार को दूसरे दिन भी कुलपति कार्यालय के बाहर छात्रों ने बैठकर प्रदर्शन किया। इतिहास विषय के पीजी सत्र 2021-23 के टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट अभिषेक कुमार ने मेरिट लिस्ट से बाहर किए जाने पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे “मेरी एकेडमिक हत्या का प्रयास” बताया है। अभिषेक कुमार ने कुलाधिपति सह राज्यपाल, कुलपति, उच्च शिक्षा निदेशक और तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर वह अयोग्य हैं तो उन्हें मिला गोल्ड मेडल भी रखने का अधिकार नहीं है। न्याय नहीं मिलने पर उन्होंने मेडल लौटाने की चेतावनी दी है। अभिषेक ने कहा कि पिछले वर्ष विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में दो राज्यों के राज्यपालों और कुलपति की मौजूदगी में उन्हें गोल्ड मेडल दिया गया था। ऐसे में अब मेरिट लिस्ट से बाहर किया जाना उनकी मेधा पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने इतिहास विभाग की मेरिट सूची पर रोक लगाने, संकायाध्यक्ष की अनुपस्थिति में संपन्न इंटरव्यू प्रक्रिया की जांच कराने और 100 प्वाइंट रोस्टर के उल्लंघन के दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। कम अंक देकर मेरिट से बाहर करने का आरोप वहीं, भूगोल विषय के गोल्ड मेडलिस्ट अविनाश ने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर पैट 2023-24 की मेरिट लिस्ट से बाहर किया गया है। उन्होंने कहा कि वह सत्र 2020-22 के टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट रह चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें कम अंक देकर मेरिट से बाहर कर दिया गया। अविनाश का आरोप है कि दूसरे अभ्यर्थियों को अधिक अंक देकर चयन प्रक्रिया में पक्षपात किया गया है। इंटरव्यू अच्छा रहा लेकिन मेरिट से नाम गायब उधर, इतिहास विभाग की छात्रा नेहा कुमारी ने भी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है और मेरिट लिस्ट में धांधली की गई है। नेहा के मुताबिक उनका इंटरव्यू काफी अच्छा गया था और सात में से छह सवालों के सही जवाब उन्होंने दिए थे, लेकिन इसके बावजूद उनका नाम अंतिम मेरिट लिस्ट में शामिल नहीं किया गया। विश्वविद्यालय में दूसरे दिन भी हंगामा पीएचडी नामांकन की अंतिम मेरिट सूची में कथित गड़बड़ी को लेकर शनिवार को भी विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी रहा। कई विषयों के गोल्ड मेडलिस्ट अपने मेडल के साथ विश्वविद्यालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। छात्र संगठनों ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। छात्र नेता चंदन यादव के नेतृत्व में छात्रों ने इंस्पेक्टर ऑफ कॉलेज आर्ट्स प्रो. राजीव कुमार और लीगल ऑफिसर मयंक कपिला से मुलाकात कर मेरिट लिस्ट में धांधली की शिकायत की। इसके बाद छात्र कुलपति कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और प्रॉक्टर सह सोशल साइंस के डीन प्रो. आरके चौधरी का घेराव किया। इंटरव्यू में पक्षपात का आरोप छात्रों ने इतिहास, भूगोल समेत कई विषयों में इंटरव्यू प्रक्रिया में पक्षपात और जानबूझकर कम अंक देने का आरोप लगाया। छात्र नेताओं ने सामूहिक आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि मेरिट लिस्ट जारी करने में हुई देरी ने पहले ही छात्रों की चिंता बढ़ा दी थी। छात्र नेता चंदन यादव ने कहा कि यह मेधावी छात्रों के साथ अन्याय है, जबकि छात्र लोजपा नेता गोल्डेन सिंह ने इसे “टॉपरों का गला घोंटने की साजिश” बताया। प्रशासन ने आरोपों को किया खारिज वहीं, प्रॉक्टर सह सोशल साइंस के डीन प्रो. आरके चौधरी ने छात्रों के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि वह कई इंटरव्यू बोर्ड में शामिल हुए थे और शोधार्थियों से सवाल भी पूछे थे।  

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