बिहार के राज्यसभा चुनाव की सभी पांचों सीटों पर NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की शानदार जीत हुई। JDU के 2, भाजपा के 2 और RLM के 1 कैंडिडेट जीत गए। हालांकि, जीत के बाद सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव जीतकर भी नीतीश कुमार इतने कमजोर कभी नहीं दिखे। उन्हें अब नहीं चाहने के बावजूद मुख्यमंत्री पद छोड़ना ही होगा। अगर उनको राज्यसभा नहीं जाना है तो 30 मार्च से पहले संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा, वरना उनकी MLC की सदस्यता अपने-आप खत्म हो जाएगी। नीतीश कुमार को भाजपा की बात क्यों माननी पड़ रही है। वह चुनाव जीतकर भी कमजोर कैसे हो गए। इन्हीं सवालों का जवाब, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। नीतीश हुए कमजोर, भाजपा की बात माननी जरूरी क्यों 1. भाजपा ने जरूरी विधायकों को मैनेज करके नीतीश को दिया संकेत दूसरे राज्यों के भाजपा के ट्रैक रिकार्ड को देखें तो बिहार में आज की तारीख में भाजपा चाहे तो बिना नीतीश कुमार के सरकार बना सकती है। भाजपा ने इसकी झलक राज्यसभा चुनाव में कम पड़े रहे विधायकों को मैनेज करके दिखा दी है। इसे ऐसे समझिए… राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई थीं, जिनके लिए 6 कैंडिडेट्स ने नॉमिनेशन फाइल किया। NDA की ओर से बीजेपी के नितिन नवीन, RLM सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा, JDU के नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर की जीत पहले से तय थी। लेकिन पेंच फंस गया BJP के शिवेश राम की सीट पर। दरअसल, RJD की ओर से एडी सिंह ने भी पर्चा भरा और उनका मुकाबला शिवेश कुमार से हुआ… चिराग के दावे तेजस्वी से ज्यादा नीतीश के लिए चिंताजनक 17 मार्च को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, ‘सिर्फ RJD ही नहीं, बल्कि कांग्रेस में भी असंतोष बढ़ रहा है। राज्यसभा चुनाव में यह साफ दिखा, जब विपक्ष के कई विधायक वोटिंग से गायब रहे। कांग्रेस के आधे विधायक मतदान के लिए नहीं पहुंचे, जो अंदरूनी असंतोष का संकेत है। आने वाले दिनों में RJD में बड़ी टूट हो सकती है और कई विधायक हमारे संपर्क में हैं।’ चिराग के दावे अगर सही साबित हुए तो यह तेजस्वी से ज्यादा नीतीश कुमार के लिए चिंताजनक बात हो सकती है। नीतीश कुमार तब ही मजबूत हो सकते हैं जब तेजस्वी यादव के पास ज्यादा संख्या होगी। अन्यथा नीतीश को भाजपा की बात माननी ही पड़ेगी। 2. CBI-ED केस में फंसा लालू परिवार, मजबूती से साथ नहीं दे सकता IRCTC और नौकरी के बदले जमीन घोटाले में लालू फैमिली CBI-ED केस में चार्जशीटेड है। IRCTC केस में लालू परिवार के 3 सदस्य नामजद हैं। लालू, राबड़ी और तेजस्वी यादव। लालू और राबड़ी की उम्र बहुत ज्यादा हैं और दोनों धीरे-धीरे राजनीति से दूर भी हो रहे हैं। लेकिन तेजस्वी यादव के लिए यह केस काफी मायने रखता है। क्योंकि अभी वो सिर्फ 36 साल के हैं और उनके पास लंबा राजनीतिक करियर है। 3. नीतीश के करीबी जांच एजेंसी के रडार पर नीतीश कुमार के करीबी नेता और अफसर केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर हैं। बताया जाता है कि इसमें कुछ बड़े प्रभावशाली IAS अफसर के बेटे-बेटियों पर कुछ आरोप लगे हैं, जिसकी अंदरूनी तौर पर जांच हो रही है। कुछ मंत्रियों के रिश्तेदार भी रडार पर हैं। 4. नीतीश हटे तो मोदी सरकार पर कोई असर नहीं केंद्र की मोदी सरकार के पास 292 सीटें हैं, जिसमें जदयू के पास 12 सीटें हैं। अगर JDU, इंडी के साथ जाती है, तो NDA के पास 280 सीटें रहेंगी। यानी बहुमत से 8 सीटें ज्यादा। NDA की सरकार बन जाएगी। 292-12= 280 (NDA बहुमत से 8 ज्यादा) 30 मार्च को खत्म हो जाएगी नीतीश की MLC की सदस्यता नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा सदस्य चुन लिए गए। अभी वह विधान परिषद के सदस्य (MLC) हैं। MLC का कार्यकाल 2030 तक बचा है, लेकिन अब उनको 30 मार्च तक MLC पद छोड़ना होगा। अगर नहीं छोड़ना है तो उन्हें राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। इसे ऐसे समझिए… बिहार के राज्यसभा चुनाव की सभी पांचों सीटों पर NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) की शानदार जीत हुई। JDU के 2, भाजपा के 2 और RLM के 1 कैंडिडेट जीत गए। हालांकि, जीत के बाद सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि राज्यसभा चुनाव जीतकर भी नीतीश कुमार इतने कमजोर कभी नहीं दिखे। उन्हें अब नहीं चाहने के बावजूद मुख्यमंत्री पद छोड़ना ही होगा। अगर उनको राज्यसभा नहीं जाना है तो 30 मार्च से पहले संसद की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा, वरना उनकी MLC की सदस्यता अपने-आप खत्म हो जाएगी। नीतीश कुमार को भाजपा की बात क्यों माननी पड़ रही है। वह चुनाव जीतकर भी कमजोर कैसे हो गए। इन्हीं सवालों का जवाब, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। नीतीश हुए कमजोर, भाजपा की बात माननी जरूरी क्यों 1. भाजपा ने जरूरी विधायकों को मैनेज करके नीतीश को दिया संकेत दूसरे राज्यों के भाजपा के ट्रैक रिकार्ड को देखें तो बिहार में आज की तारीख में भाजपा चाहे तो बिना नीतीश कुमार के सरकार बना सकती है। भाजपा ने इसकी झलक राज्यसभा चुनाव में कम पड़े रहे विधायकों को मैनेज करके दिखा दी है। इसे ऐसे समझिए… राज्यसभा की 5 सीटें खाली हुई थीं, जिनके लिए 6 कैंडिडेट्स ने नॉमिनेशन फाइल किया। NDA की ओर से बीजेपी के नितिन नवीन, RLM सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा, JDU के नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर की जीत पहले से तय थी। लेकिन पेंच फंस गया BJP के शिवेश राम की सीट पर। दरअसल, RJD की ओर से एडी सिंह ने भी पर्चा भरा और उनका मुकाबला शिवेश कुमार से हुआ… चिराग के दावे तेजस्वी से ज्यादा नीतीश के लिए चिंताजनक 17 मार्च को दिल्ली में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा, ‘सिर्फ RJD ही नहीं, बल्कि कांग्रेस में भी असंतोष बढ़ रहा है। राज्यसभा चुनाव में यह साफ दिखा, जब विपक्ष के कई विधायक वोटिंग से गायब रहे। कांग्रेस के आधे विधायक मतदान के लिए नहीं पहुंचे, जो अंदरूनी असंतोष का संकेत है। आने वाले दिनों में RJD में बड़ी टूट हो सकती है और कई विधायक हमारे संपर्क में हैं।’ चिराग के दावे अगर सही साबित हुए तो यह तेजस्वी से ज्यादा नीतीश कुमार के लिए चिंताजनक बात हो सकती है। नीतीश कुमार तब ही मजबूत हो सकते हैं जब तेजस्वी यादव के पास ज्यादा संख्या होगी। अन्यथा नीतीश को भाजपा की बात माननी ही पड़ेगी। 2. CBI-ED केस में फंसा लालू परिवार, मजबूती से साथ नहीं दे सकता IRCTC और नौकरी के बदले जमीन घोटाले में लालू फैमिली CBI-ED केस में चार्जशीटेड है। IRCTC केस में लालू परिवार के 3 सदस्य नामजद हैं। लालू, राबड़ी और तेजस्वी यादव। लालू और राबड़ी की उम्र बहुत ज्यादा हैं और दोनों धीरे-धीरे राजनीति से दूर भी हो रहे हैं। लेकिन तेजस्वी यादव के लिए यह केस काफी मायने रखता है। क्योंकि अभी वो सिर्फ 36 साल के हैं और उनके पास लंबा राजनीतिक करियर है। 3. नीतीश के करीबी जांच एजेंसी के रडार पर नीतीश कुमार के करीबी नेता और अफसर केंद्रीय जांच एजेंसी के रडार पर हैं। बताया जाता है कि इसमें कुछ बड़े प्रभावशाली IAS अफसर के बेटे-बेटियों पर कुछ आरोप लगे हैं, जिसकी अंदरूनी तौर पर जांच हो रही है। कुछ मंत्रियों के रिश्तेदार भी रडार पर हैं। 4. नीतीश हटे तो मोदी सरकार पर कोई असर नहीं केंद्र की मोदी सरकार के पास 292 सीटें हैं, जिसमें जदयू के पास 12 सीटें हैं। अगर JDU, इंडी के साथ जाती है, तो NDA के पास 280 सीटें रहेंगी। यानी बहुमत से 8 सीटें ज्यादा। NDA की सरकार बन जाएगी। 292-12= 280 (NDA बहुमत से 8 ज्यादा) 30 मार्च को खत्म हो जाएगी नीतीश की MLC की सदस्यता नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा सदस्य चुन लिए गए। अभी वह विधान परिषद के सदस्य (MLC) हैं। MLC का कार्यकाल 2030 तक बचा है, लेकिन अब उनको 30 मार्च तक MLC पद छोड़ना होगा। अगर नहीं छोड़ना है तो उन्हें राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा। इसे ऐसे समझिए…


