नोएडा में 5 अप्रैल को निषाद पार्टी का शक्ति प्रदर्शन:कश्यप-गुर्जर-निषाद समीकरण साधने की कोशिश, संजय निषाद ने आरक्षण, अधिकार और सम्मान को बनाया मुद्दा

नोएडा में 5 अप्रैल को निषाद पार्टी का शक्ति प्रदर्शन:कश्यप-गुर्जर-निषाद समीकरण साधने की कोशिश, संजय निषाद ने आरक्षण, अधिकार और सम्मान को बनाया मुद्दा

नोएडा में समाजवादी पार्टी की “समानता रैली” के बाद अब 5 अप्रैल को निषाद पार्टी कश्यप, गुर्जर, निषाद, पिछड़ा और अति पिछड़ा एकता महासम्मेलन के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में अपनी ताकत दिखाने जा रही है। नोएडा स्टेडियम में होने वाले इस सम्मेलन को पार्टी का बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है, जिसमें सामाजिक समीकरणों को साधने के साथ राजनीतिक संदेश देने की रणनीति साफ दिख रही है। महर्षि कश्यप जयंती के मौके पर आयोजित इस सम्मेलन को लेकर निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने कहा कि यह सिर्फ रैली नहीं बल्कि “सम्मान और अधिकार” की लड़ाई है। उन्होंने संविधान के अनुसार शिक्षा और सुरक्षा की गारंटी की मांग उठाते हुए कहा कि अनुसूचित जाति सम्मान का विषय है, लेकिन विपक्ष इसे अपमानित कर रहा है। संजय निषाद ने जनगणना में उन समुदायों की गिनती सुनिश्चित करने की मांग भी दोहराई जिन्होंने देश के लिए संघर्ष किया। उन्होंने कहा कि झोपड़ी में रहने वाले गरीबों को उनका हक मिलना चाहिए और जिनकी जमीन अधिग्रहित हुई है उन्हें कंपनियों में शेयर होल्डर बनाया जाए। साथ ही उन्होंने 27 प्रतिशत राजनीतिक आरक्षण कमजोर जातियों के लिए लागू करने की मांग रखी। विपक्ष पर सीधा हमला, पुराने मुद्दे फिर उठाए
निषाद ने बसपा और सपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि “बसपा ने रोजी-रोटी छीनी और सपा ने शिक्षा” और अब इन अधिकारों को वापस दिलाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल जातीय समीकरणों में सेंध लगाकर समाज को बांटने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि निषाद पार्टी कमजोर वर्ग को दलदल नहीं, ताकत देने का काम कर रही है। पूर्वांचल से पश्चिम तक विस्तार का संकेत
राजनीतिक तौर पर यह सम्मेलन इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी इसे पूर्वांचल की सीमाओं से बाहर निकलकर पश्चिम यूपी में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के रूप में देख रही है। संजय निषाद ने कहा कि पार्टी पहले गोरखपुर और प्रयागराज में बड़ी सभाएं कर चुकी है, जहां हजारों की संख्या में मछुआ और निषाद समाज के लोग जुटे। मेरठ से शिफ्ट कर किया नोएडा
पहले मेरठ में प्रस्तावित रैली को नोएडा शिफ्ट करने के पीछे भी प्रतीकात्मक राजनीति है। दनकौर को महाभारत कालीन एकलव्य से जोड़ते हुए पार्टी ने इसे ऐतिहासिक अन्याय का प्रतीक बताया और कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने भी इसी तरह वोट लेकर अधिकार छीनने का काम किया। बीजेपी गठबंधन और चुनावी संकेत
निषाद पार्टी ने खुद को बीजेपी का सहयोगी बताते हुए यह भी स्पष्ट किया कि उसके कार्यकर्ता अन्य राज्यों में भी बीजेपी उम्मीदवारों के समर्थन में सक्रिय हैं। ऐसे में नोएडा का यह सम्मेलन सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि 2027 के चुनावों से पहले राजनीतिक ताकत दिखाने और हिस्सेदारी तय करने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

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