Nifty 50 में लगातार 8वें हफ्ते गिरावट, Stock Market में 25 साल का टूटा रिकॉर्ड

Nifty 50 में लगातार 8वें हफ्ते गिरावट, Stock Market में 25 साल का टूटा रिकॉर्ड

शेयर बाजार में कमजोरी का दौर लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत के प्रमुख शेयर सूचकांक निफ्टी 50 में लगातार 8वें हफ्ते गिरावट दर्ज हुई है। यह पिछले 25 वर्षों में उसकी सबसे लंबी गिरावट की कड़ी है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, ऊंची वैश्विक बॉन्ड दरों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच बाजार में दबाव बना हुआ है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, निफ्टी 50 अपने जनवरी में बनाए गए 26,373 के रिकॉर्ड स्तर से करीब 15% नीचे आ चुका है। इस सप्ताह भी सूचकांक में 3% से ज्यादा की गिरावट रही है। पिछले 9 हफ्तों में निफ्टी करीब 8.7% यानी 2,149 अंक से ज्यादा टूट चुका है। इससे पहले 2001 में निफ्टी लगातार 9 हफ्तों तक गिरा था, जबकि 1993 में इसकी सबसे लंबी 10 हफ्तों की गिरावट दर्ज हुई थी।

सितंबर में भी निफ्टी 6.1% नीचे बंद हुआ था। यह लगातार दूसरा महीना था जब बाजार में गिरावट आई। विदेशी पूंजी की निकासी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बॉन्ड पर बढ़ती ब्याज दरों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों से 2.6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं।

बता दें कि बाजार में कमजोरी केवल बड़े सूचकांक तक सीमित नहीं है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, निफ्टी 500 में करीब 81% शेयर अपने 50 दिन के औसत स्तर से नीचे कारोबार कर रहे हैं। इससे बाजार में व्यापक दबाव का संकेत मिलता है। ब्रोकरेज के मुताबिक निफ्टी के लिए 22,400 के आसपास अहम सहारा बना हुआ है। इसके नीचे जाने पर 22,200 से 22,000 तक कमजोरी बढ़ सकती है, जबकि 22,600 से 22,800 का स्तर अब तत्काल रुकावट बन गया है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, निफ्टी को मजबूती दिखाने के लिए 23,080 के ऊपर बंद होना जरूरी है। सूचकांक पिछले 7 हफ्तों से इस स्तर को पार नहीं कर पाया है।

वैश्विक स्तर पर अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड दर करीब 5.3% बनी हुई है, जिससे उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण प्रभावित हो रहा है। ब्रेंट कच्चा तेल करीब 98.03 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई करीब 90 डॉलर पर है। हालांकि तेल की कीमतों पर पश्चिम एशिया और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम का असर बना हुआ है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार के अनुसार, सितंबर में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बाजार से 45,536 करोड़ रुपये की निकासी की है। वहीं, प्राथमिक बाजार में उन्होंने 9,676 करोड़ रुपये लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ऊंची अमेरिकी बॉन्ड दरों के कारण विदेशी बिकवाली आगे भी जारी रह सकती है।

360 वन एसेट के अध्यक्ष और कोष प्रबंधक मयूर पटेल ने कहा कि बाजार की दिशा अमेरिकी-ईरान तनाव, कच्चे तेल और वैश्विक बॉन्ड दरों से प्रभावित होगी। तकनीकी संकेत भी फिलहाल कमजोर बने हुए हैं। भारत का अस्थिरता सूचकांक 14.38 पर पहुंच गया है, जबकि बैंक निफ्टी 55,175 के साप्ताहिक औसत स्तर से नीचे है।

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