बठिंडा में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) का फर्जी उप महाप्रबंधक (DGM) बनकर करोड़ों रुपये हड़पने वाले बर्खास्त चपरासी राकेश गोयल को अदालत से बड़ा झटका लगा है। बठिंडा के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गगनदीप सिंह गर्ग की अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका (BA 7596 of 2026) खारिज कर दी है। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि मामले में मुख्य गवाहों की गवाही अभी बाकी है; ऐसे में आरोपी को रिहा करने पर गवाहों को प्रभावित करने और अहम सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सिर्फ हिरासत में बिताया गया समय जमानत का आधार नहीं बन सकता।
कोर्ट में बचाव पक्ष की दलीलें खारिज
आरोपी के वकील प्रदीप कुमार शर्मा ने BNSS की धारा 483 के तहत दलील दी कि यह दीवानी व व्यावसायिक लेनदेन का विवाद है। पुलिस चालान पेश कर चुकी है और M/s Anita Raj Enterprises व DK Enterprises के बैंक खातों के जरिए शिकायतकर्ता को 3 करोड़ रुपये से अधिक लौटाए जा चुके हैं।
अतिरिक्त लोक अभियोजक अमनदीप कौर और शिकायतकर्ता के वकील जेएन शर्मा ने कहा कि आरोपी पर फर्जी अधिकारी बनकर करोड़ों हड़पने के गंभीर आरोप हैं। इसके अलावा आरोपी के खिलाफ दर्ज एफआईआर नंबर 96/2026 में अभी बरामदगी की जानी बाकी है।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लौटाए गए पैसों के दावे और अन्य आरोपों का अंतिम निपटारा मुकदमे की सुनवाई व साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। फर्जी DGM बन टोल टेंडर के नाम पर 9.80 करोड़ ऐंठे
यह थाना थर्मल में 25 जुलाई 2026 को दर्ज एफआईआर नंबर 97 से संबंधित है। बठिंडा निवासी शिकायतकर्ता राम स्वरूप सिंगला के बयान पर पुलिस ने माहेश्वरी कॉलोनी निवासी राकेश गोयल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 61(2) के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने दर्ज मामलों में कुल 9.80 करोड़ रुपये की ठगी की है।
इन लोगों से कर चुका है ठगी
बठिंडा के रहने वाले पीड़ित राम स्वरूप सिंगला को टोल प्लाजा का लाइसेंस व टेंडर दिलाने के नाम पर करीब 2.40 करोड़ रुपये ऐंठे है।
दिल्ली के रहने वाले मनीष गुप्ता उर्फ मनीष खाटू से फर्जी टोल टेंडरों में निवेश के नाम पर 7.40 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी। जागरण और ‘जीरो फास्टैग’ का फर्जीवाड़ा
आरोपी राकेश गोयल ने ठगी को अंजाम देने के लिए इंसानी मनोविज्ञान और धार्मिक आस्था का खतरनाक खेल रचा था। वह खुद को खाटू श्याम का बड़ा भक्त बताता था। श्रद्धालुओं के लिए खाटू श्याम की डीलक्स बस यात्राएं करवाता था और सोशल मीडिया पर नामी भजन गायकों व कथावाचकों के साथ तस्वीरें साझा कर रसूख दिखाता था। कुछ माह पहले उसने बरनाला बाईपास स्थित एक पैलेस में 30 लाख रुपये से अधिक खर्च कर विशाल जागरण भी करवाया था, जहां उसकी पहचान कई कारोबारियों से हुई।
‘जीरो फास्टैग’ का झांसा
विश्वास जीतने के लिए वह शिकार की गाड़ियों पर ‘जीरो बैलेंस’ फास्टैग लगवाता था। असल में वह अपनी जेब से खुद के मोबाइल से फास्टैग रिचार्ज करता था,ताकि लोगों को लगे कि NHAI में उसकी सीधी पहुंच है और गाड़ी मुफ्त में निकल रही है।
फर्जी दस्तावेज व सरकारी लेबल
आरोपी ने NHAI के नाम पर फर्जी बैंक खाता, जाली UTI नंबर और लेटरहेड तैयार किए थे। वह सरकारी पहचान दर्शाने वाले लेबल लगे वाहन का इस्तेमाल कर रौब गांठता था।
पैसे मांगने पर ‘सुसाइड ड्रामा’ और पीड़ितों पर ही दबाव
शुरुआत में निवेशकों को 5 से 10 फीसदी तक मुनाफा देकर उनका भरोसा जीता जाता था। इसके बाद देश भर के 865 टोलों (विशेषकर हिमाचल, कीरतपुर रोड और छत्तीसगढ़) में भारी मुनाफे का झांसा देकर ज्यादातर रकम नकद ऐंठ ली जाती थी। जब पीड़ितों ने अपना पैसा वापस मांगा, तो राकेश ने खौफनाक पैंतरे आजमाए।
खुद पर पेट्रोल डालने की नौटंकी
उसने व्हाट्सएप पर आत्महत्या की धमकी वाले फर्जी वीडियो भेजकर पीड़ितों को जेल भिजवाने का डर दिखाया। खुद पर पेट्रोल डालने की नौटंकी कर निजी अस्पताल में भर्ती हो जाता था। उसके साथी व परिचित शिकायतकर्ताओं को डराते थे कि यदि राकेश को कुछ हो गया तो वे खुद कानूनी मुश्किलों में फंस जाएंगे। इसके अलावा आरोपी ने डिजिटल डेटा डिलीट करने और परिजनों के खातों में पैसे ट्रांसफर करवाने की साजिश भी रची।
पत्नी, साले समेत पूरा गिरोह नामजद
पुलिस के अनुसार, इस पूरे सिंडिकेट में मुख्य आरोपी के अलावा उसकी पत्नी शेफाली गोयल, साला दविंदर गर्ग, जीजा, ड्राइवर गुरदीप और एक सैलून संचालक दोस्त शामिल थे। मुख्य आरोपी राकेश गोयल अगस्त 2026 से जेल में बंद है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

