उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय में आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वैज्ञानिकों ने सब्जियों को 21 दिन तक सुरक्षित रखने वाली नई तकनीक की खोज की है। आयोजन ‘रासायनिक नवाचार के नवीन क्षितिज: सूक्ष्म अणुओं से चिकित्सीय समाधान तक’ विषय पर आयोजित किया गया था, जिसमें देश विदेश के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। सब्जियों को 21 दिन तक सुरक्षित रखने की नई तकनीक संगोष्ठी का मुख्य आकर्षण IIT इंदौर के प्रो. देबायन सरकार का व्याख्यान रहा। उन्होंने प्रिसिजन डिअरोमैटाइजेशन तकनीक पर विस्तार से जानकारी दी, जिसमें अणुओं की संरचना बदलकर अधिक प्रभावी दवाएं तैयार की जा सकती हैं। इसी दौरान उन्होंने एक नई तकनीक भी बताई, जिससे सब्जियों को बिना किसी नुकसान के करीब 21 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इस खोज को खाद्य सुरक्षा और भंडारण के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ग्रीन केमिस्ट्री की दिशा में अहम कदम मुख्य वक्ता के रूप में नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी की डॉ. एलिजाबेथ एगहोम जैकबसेन ने कीमो एंजाइमेटिक संश्लेषण पर अपने विचार रखे। उन्होंने बताया कि यह तकनीक दवाओं के निर्माण को ज्यादा सटीक बनाती है, जिससे उनकी प्रभावशीलता बढ़ती है और साइड इफेक्ट कम होते हैं। इसे ग्रीन केमिस्ट्री की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय में तकनीक लागू करने की तैयारी संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज ने कहा कि ऐसे आयोजन शोध और औषधि विकास के बीच एक मजबूत कड़ी का काम करते हैं। उन्होंने वैज्ञानिकों के काम की सराहना की और विश्वविद्यालय में सब्जी संरक्षण तकनीक की एक छोटी इकाई शुरू करने की संभावना भी जताई। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. उमा शर्मा ने संगोष्ठी के उद्देश्य बताए, जबकि अंत में प्रो. उमेश सिंह ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।


