नेपाल में भोटे कोशी नदी की भयानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। अब तक 626 शव बरामद हो चुके हैं और करीब 2400 लोग लापता बताए जा रहे हैं। हालात इतने गंभीर हैं कि नेपाल सरकार ने अब अपना रुख बदल दिया है।
पहले नेपाल सरकार ने बचाव अभियान के लिए विदेशी मदद लेने से साफ इनकार कर दिया था। अब उसने भारत और चीन से खास बचाव टीमों की मदद मांगी है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में शनिवार को बताया गया कि भारत से 11 सदस्यीय टनल रेस्क्यू टीम पहले ही पहुंच चुकी है। चीन की टीम भी जल्द आने वाली है। बताया जा रहा है कि चीन के लोग रास्ते में हैं।
नेपाल सरकार ने उन तकनीकों की भी मांग की है जिनसे मलबे या मिट्टी के नीचे फंसे जीवित लोगों का पता लगाया जा सके। साथ ही फॉरेंसिक जांच, डीएनए टेस्ट और शव रखने की सुविधाएं भी चाहिए।
नेपाल ने पीएम मोदी को ‘बेहद उदार’ बताया
इस बीच, नेपाल ने मुश्किल समय में मदद करने के लिए भारत की कोशिशों की तारीफ की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘बेहद उदार’ बताया। देश में आई भयानक बाढ़ में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने कहा कि नई दिल्ली ने संकेत दिया है कि वह पुनर्निर्माण के लिए उदारतापूर्वक मदद करेगी।
अब तक कितने लोगों को बचाया गया?
अभी तक 4450 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें 187 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में बचाव अभियान जारी है। अधिकारियों का कहना है कि आंकड़े आगे बदल सकते हैं इसलिए सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।
अंतरराष्ट्रीय मदद जारी
नेपाल सरकार ने उन खबरों को गलत बताया जिनमें कहा गया था कि देश ने विदेशी मदद ठुकरा दी है। मंत्रालय के अनुसार तबाही इतनी बड़ी है कि बचाव, राहत के साथ-साथ पुनर्निर्माण के लिए भी बाहर की मदद जरूरी है।
भारत से 57 टन से ज्यादा राहत सामग्री आ चुकी है। चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों से भी जरूरी सामान पहुंच रहा है। सड़कें, पुल, घर और जलविद्युत परियोजनाओं को हुए नुकसान का आकलन चल रहा है। इसी के आधार पर आगे की मदद तय की जाएगी।
नेपाल खुला है पर्यटकों के लिए
इस बीच, सरकार ने साफ कहा कि बाढ़ का असर सिर्फ कुछ जिलों तक सीमित है। बाकी इलाके सामान्य हैं और पर्यटक आ-जा सकते हैं। नदी के पानी और नीचे की तरफ बाढ़ के खतरे पर लगातार नजर रखी जा रही है। लोग प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में ऑनलाइन दान कर सकते हैं। नेपाल इस मुश्किल घड़ी में पड़ोसी देशों के साथ मिलकर संकट से निपटने की कोशिश कर रहा है।

