Reduce Oil for Healthy Life: नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) उत्तर प्रदेश “संतुलित तेल, सुरक्षित जीवन!” के लक्ष्य के लिए लोगों को जागरूक कर रहा है। इस सोशल पोस्ट में बताया गया है कि कैसे छोटे-छोटे दिखने वाले स्नैक्स हमारे शरीर में तेल और कैलोरी भर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर हम अपनी रोज की डाइट में सिर्फ 10% तेल कम कर दें, तो कई बीमारियों से बच सकते हैं। हमारे पसंदीदा स्नैक्स जैसे समोसा, कचौड़ी और बर्गर में फैट की मात्रा इतनी ज्यादा होती है कि वह सीधे हमारे दिल पर हमला करती है। आइए जानते हैं कि आपके किस फेवरेट फूड में कितना तेल छिपा है।
किस चीज में है कितना तेल और फैट?
समोसा और कचौड़ी- एक समोसे (100 ग्राम) में लगभग 17 ग्राम फैट और 261 किलो कैलोरी होती है। वहीं एक कचौड़ी (40 ग्राम) में 10 ग्राम फैट और 166 किलो कैलोरी होती है। ये दोनों ही चीजें तेल में डूबकर तैयार होती हैं।
पकौड़े और चिप्स- अगर आप 10 पकौड़े (130 ग्राम) खाते हैं, तो शरीर में 14 ग्राम फैट और 190 किलो कैलोरी चली जाती है। यहां तक कि 28 ग्राम केले के चिप्स में भी 9.5 ग्राम फैट होता है।
पिज्जा और बर्गर- सबसे ज्यादा खतरा फास्ट फूड से है। एक बर्गर (247 ग्राम) में 31 ग्राम फैट होता है। वहीं अगर आप 4 स्लाइस पिज्जा (428 ग्राम) खाते हैं, तो आप एक बार में 40 ग्राम फैट और 1140 किलो कैलोरी डकार जाते हैं!
फ्रेंच फ्राइज- बच्चों के पसंदीदा फ्रेंच फ्राइज (117 ग्राम) में 17 ग्राम फैट और 365 किलो कैलोरी होती है।
10% तेल कम करने के फायदे
- तेल कम खाने से शरीर में गंदा कोलेस्ट्रॉल नहीं जमेगा और हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाएगा।
- मोटापे की सबसे बड़ी वजह तेल और घी है। इसे कम करते ही आप खुद को हल्का महसूस करेंगे।
- तेल कम करने से आप दिनभर फुर्तीले रहेंगे।
संतुलित तेल, सुरक्षित जीवन
NHM का यह संदेश साफ है कि हमें पूरी तरह खाना बंद करने की जरूरत नहीं है, बस थोड़ा सावधान होने की जरूरत है। अगर हम आज से ही अपने खाने में तेल की मात्रा 10% कम कर दें, तो हम न सिर्फ खुद को बल्कि अपने पूरे परिवार को एक सुरक्षित और लंबा जीवन दे सकते हैं। तो याद रखिये, तेल कम, सेहत ज्यादा!
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


