राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा और भारत मुक्ति मोर्चा ने जाति आधारित जनगणना, ओबीसी के लिए सख्त यूजीसी बिल और 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देने की मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। संगठनों ने केंद्र सरकार पर ओबीसी के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए राष्ट्रपति और केंद्र सरकार को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में प्रमुख मांग थी कि राष्ट्रीय जनगणना में ओबीसी के लिए जाति का कॉलम जोड़ा जाए। संगठनों ने कहा कि केंद्र सरकार ने कैबिनेट में ओबीसी की जाति आधारित जनगणना का फैसला किया था, लेकिन जनगणना अधिसूचना में यह कॉलम शामिल नहीं किया गया, जिसे ओबीसी के साथ ‘धोखाधड़ी’ बताया गया।
दूसरी मांग एससी, एसटी और ओबीसी के समर्थन में सख्त यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन लागू करने की थी। मोर्चा ने आरोप लगाया कि पहले कमजोर यूजीसी रेगुलेशन बनाया गया और फिर सुप्रीम कोर्ट में कमजोर पैरवी कर उस पर रोक लगवा दी गई, जो इन वर्गों के साथ ‘धोखाधड़ी’ है। तीसरी मांग में 2011 से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से मुक्त करने की बात कही गई। संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो राष्ट्रव्यापी चरणबद्ध आंदोलन को और उग्र एवं व्यापक किया जाएगा। उन्होंने 725 जिला मुख्यालयों पर धरना प्रदर्शन और 23 अप्रैल, 2026 को ‘भारत बंद’ का आह्वान किया। मोर्चा ने कहा कि आंदोलन के उग्र होने की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


