भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने की घटना के बाद जमुई जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में खैरा-सोनो मुख्य मार्ग पर स्थित नरियाना और मांगोबंदर पुलों पर बुधवार से छोटे और बड़े सभी वाहनों का परिचालन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। ये दोनों पुल पिछले पांच वर्षों से जर्जर अवस्था में थे। प्रशासन ने एहतियातन पुलों के दोनों ओर जेसीबी से गड्ढे खोद दिए हैं, ताकि कोई भी वाहन जबरन प्रवेश न कर सके। लोगों की आवाजाही बनाए रखने के लिए नदी के रास्ते एक अस्थायी डायवर्सन भी तैयार किया गया है, जिससे क्षेत्र के 100 से अधिक गांवों का संपर्क बहाल रखा जा सके। 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही
इस निर्णय का सबसे अधिक असर खैरा प्रखंड के नरियाना, चाचो, हरदी मोह, पूर्णा, मांगोबंदर, बाघाखाड़, नजुआरा सहित दर्जनों गांवों पर पड़ा है। विशेष रूप से मांगोबंदर पुल पर प्रतिबंध लगने से कई गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क लगभग टूट गया है। ग्रामीणों को अब गिद्धौर-झाझा-सोनो मार्ग से होकर लगभग 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ सकते
बरसात का मौसम शुरू होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। नदी में जलस्तर बढ़ने से बनाए गए अस्थायी डायवर्सन के बह जाने का खतरा है, जिससे कई गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ सकते हैं। खैरा प्रखंड विकास पदाधिकारी शेखर सुमन ने बताया कि वर्ष 2021-22 में ही इन दोनों पुलों को जर्जर घोषित किया जा चुका था। उन्होंने कहा कि वरीय अधिकारियों के निर्देश पर आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है और फिलहाल डायवर्सन के जरिए आवागमन जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने देर से कदम उठाया, लेकिन अब सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी भी था। हालांकि, वे जल्द स्थायी समाधान और नए पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी से निजात मिल सके। भागलपुर में विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने की घटना के बाद जमुई जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। इसी क्रम में खैरा-सोनो मुख्य मार्ग पर स्थित नरियाना और मांगोबंदर पुलों पर बुधवार से छोटे और बड़े सभी वाहनों का परिचालन पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। ये दोनों पुल पिछले पांच वर्षों से जर्जर अवस्था में थे। प्रशासन ने एहतियातन पुलों के दोनों ओर जेसीबी से गड्ढे खोद दिए हैं, ताकि कोई भी वाहन जबरन प्रवेश न कर सके। लोगों की आवाजाही बनाए रखने के लिए नदी के रास्ते एक अस्थायी डायवर्सन भी तैयार किया गया है, जिससे क्षेत्र के 100 से अधिक गांवों का संपर्क बहाल रखा जा सके। 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही
इस निर्णय का सबसे अधिक असर खैरा प्रखंड के नरियाना, चाचो, हरदी मोह, पूर्णा, मांगोबंदर, बाघाखाड़, नजुआरा सहित दर्जनों गांवों पर पड़ा है। विशेष रूप से मांगोबंदर पुल पर प्रतिबंध लगने से कई गांवों का जिला मुख्यालय से सीधा संपर्क लगभग टूट गया है। ग्रामीणों को अब गिद्धौर-झाझा-सोनो मार्ग से होकर लगभग 60 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ सकते
बरसात का मौसम शुरू होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। नदी में जलस्तर बढ़ने से बनाए गए अस्थायी डायवर्सन के बह जाने का खतरा है, जिससे कई गांव पूरी तरह अलग-थलग पड़ सकते हैं। खैरा प्रखंड विकास पदाधिकारी शेखर सुमन ने बताया कि वर्ष 2021-22 में ही इन दोनों पुलों को जर्जर घोषित किया जा चुका था। उन्होंने कहा कि वरीय अधिकारियों के निर्देश पर आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह सख्त कदम उठाया गया है और फिलहाल डायवर्सन के जरिए आवागमन जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने देर से कदम उठाया, लेकिन अब सुरक्षा के लिहाज से यह जरूरी भी था। हालांकि, वे जल्द स्थायी समाधान और नए पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी से निजात मिल सके।


