किशनगंज| दिघलबैंक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के दौरान 08 फाइलेरिया प्रभावित मरीजों को मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसएबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) किट प्रदान की गई। किट में साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, तौलिया, टब, मग सहित दैनिक स्वच्छता और आत्म-देखभाल से जुड़ी आवश्यक सामग्री शामिल थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीजों को किट के सही उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि नियमित सफाई और देखभाल से संक्रमण की जटिलताओं को रोका जा सकता है। सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया भले ही पूरी तरह से समाप्त होने वाली बीमारी न हो, लेकिन आत्म-देखभाल और एमएमडीपी किट के नियमित उपयोग से इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि हर फाइलेरिया मरीज तक यह सुविधा पहुँचे और उन्हें सम्मानजनक जीवन मिले। वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. मंजर आलम ने बताया कि फाइलेरिया को साइलेंट डिजीज कहा जाता है। क्योंकि इसके लक्षण वर्षों बाद सामने आते हैं। यदि मरीज रोजाना पैरों की सफाई, त्वचा की देखभाल और हल्का व्यायाम करें, तो बीमारी आगे नहीं बढ़ती। किशनगंज| दिघलबैंक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रविवार को स्वास्थ्य विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के दौरान 08 फाइलेरिया प्रभावित मरीजों को मॉर्बिडिटी मैनेजमेंट एंड डिसएबिलिटी प्रिवेंशन (एमएमडीपी) किट प्रदान की गई। किट में साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, तौलिया, टब, मग सहित दैनिक स्वच्छता और आत्म-देखभाल से जुड़ी आवश्यक सामग्री शामिल थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने मरीजों को किट के सही उपयोग की जानकारी देते हुए बताया कि नियमित सफाई और देखभाल से संक्रमण की जटिलताओं को रोका जा सकता है। सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि फाइलेरिया भले ही पूरी तरह से समाप्त होने वाली बीमारी न हो, लेकिन आत्म-देखभाल और एमएमडीपी किट के नियमित उपयोग से इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि हर फाइलेरिया मरीज तक यह सुविधा पहुँचे और उन्हें सम्मानजनक जीवन मिले। वेक्टर बॉर्न डिजीज कंट्रोल ऑफिसर डॉ. मंजर आलम ने बताया कि फाइलेरिया को साइलेंट डिजीज कहा जाता है। क्योंकि इसके लक्षण वर्षों बाद सामने आते हैं। यदि मरीज रोजाना पैरों की सफाई, त्वचा की देखभाल और हल्का व्यायाम करें, तो बीमारी आगे नहीं बढ़ती।


