राज्य मंत्री महिला कल्याण, बाल विकास पुष्टाहार एवं जनपद प्रभारी मंत्री श्रीमती प्रतिभा शुक्ला ने कलेक्ट्रेट परिसर से फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया को गति देने के लिए प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये वाहन जनपद के प्रत्येक ग्राम में जाकर किसानों को फार्मर आईडी बनाने के तरीके, इसके लाभ और आईडी न होने पर मिलने वाले लाभों से वंचित होने के संबंध में जानकारी देंगे। उप कृषि निदेशक ने बताया कि एग्रीस्टैक (डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर फॉर एग्रीकल्चर) के अंतर्गत जनपद के समस्त भूमिधर किसानों की फार्मर रजिस्ट्री 15 मार्च 2026 तक पूरी की जानी है। वर्तमान में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के 2,00,280 लाभार्थियों की फार्मर आईडी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से अब तक 1,53,042 किसानों की आईडी बन चुकी है, जबकि 47,238 किसानों की आईडी बनाना अभी शेष है। फार्मर रजिस्ट्री कई माध्यमों से की जा सकती है। किसान स्वयं वेब पोर्टल या ‘फार्मर रजिस्ट्री उत्तर प्रदेश’ मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, जन सेवा केंद्र (सीएससी) पर निर्धारित शुल्क देकर, कृषि विभाग के एटीएम/बीटीएम, टीएसी और राजस्व विभाग के लेखपाल की सहायता से, या शिविरों के माध्यम से भी आईडी बनवाई जा सकती है। फार्मर रजिस्ट्री के लिए आधार कार्ड, खतौनी और आधार से लिंक मोबाइल नंबर जैसे आवश्यक अभिलेखों की जरूरत होगी। इस आईडी से किसानों को फसली ऋण, फसल बीमा की क्षतिपूर्ति और आपदा राहत प्राप्त करने में आसानी होगी। यह रजिस्ट्री विभिन्न कार्यक्रमों के लिए किसानों को बार-बार भौतिक सत्यापन से मुक्ति दिलाएगी। इससे नवोन्मेषी कार्यक्रमों के विस्तार के अवसर बढ़ेंगे। कृषि के साथ-साथ उद्यान, मत्स्य, खाद्य एवं विपणन जैसे अन्य विभाग भी अपनी योजनाओं का लाभ प्रदान करने के लिए इसका उपयोग कर सकेंगे। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कृषि उत्पाद के विपणन में भी सुगमता होगी। यह पीएम किसान योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए एक अनिवार्य शर्त भी है। उल्लेखनीय है कि 29 जनवरी से कृषि विभाग के कर्मचारी और लेखपाल गाँव-गाँव जाकर फार्मर रजिस्ट्री की आईडी बनाने का कार्य कर रहे हैं।


