सोनू माइंस में खनन… सैकड़ों पेड़ों की कटाई का आरोप… खड़ीनों का जल प्रवाह भी बाधित

सोनू माइंस में खनन… सैकड़ों पेड़ों की कटाई का आरोप… खड़ीनों का जल प्रवाह भी बाधित

रामगढ़ के निकट संचालित राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड की सोनू लाइम स्टोन माइंस में खनन गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। आरोप है कि लीज क्षेत्र में खनन के नाम पर सैकड़ों खेजड़ी, बोरड़ी, कुंभट, जाल, केर और आक जैसे रेगिस्तानी पेड़-पौधों की कटाई की जा रही है।

इससे क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पौधरोपण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है, लेकिन मौके पर हरियाली नजर नहीं आती। अधिकांश कार्य कागजों तक सीमित दिखाई देता है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से तापमान में वृद्धि और वर्षा चक्र में बदलाव जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।

खड़ीनों पर असर, खेती प्रभावित

खनन के दौरान नदी-नालों के आसपास गहरे गड्ढे खोदे जा रहे हैं। बरसाती पानी इन खदानों में भर जाता है, जिससे शरण, देरासर और नलिया जैसे खड़ीन क्षेत्रों तक पानी नहीं पहुंच पाता। पहले इन खड़ीनों में गेहूं, चना और दलहन की अच्छी पैदावार होती थी, लेकिन जल आवक बाधित होने से खेती प्रभावित हो रही है। किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

धूल और ब्लास्टिंग से बढ़ी चिंता

खनन क्षेत्र में उड़ती धूल से वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर पहुंच रहा है। डस्ट नियंत्रण के लिए नियमित पानी का छिड़काव अनिवार्य है, लेकिन स्थानीय लोग नियमों की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं। शाम के समय दृश्यता कम होने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों के अनुसार भारी ब्लास्टिंग से जोगा गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में मकानों और पानी के टांकों में दरारें आने की शिकायतें हैं। पशुओं में गर्भपात की घटनाएं भी सामने आ रही हैं, जिससे पशुपालकों में चिंता है।

सुरक्षा और समतलीकरण पर सवाल

खनन स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप भी लगे हैं। कई स्थानों पर मजदूर बिना सुरक्षा उपकरणों के कार्य करते दिखाई देते हैं। गहरी खदानों का समय पर समतलीकरण नहीं होने से उनमें पानी भर जाता है, जिससे मूक पशु गिरकर जान गंवा रहे हैं। उधर, खनन क्षेत्र से बिना नंबर और ओवरलोड वाहनों के संचालन की शिकायतें हैं। संबंधित विभागों की निगरानी के बावजूद कार्रवाई प्रभावी नहीं दिख रही है।

ग्रामीण भगवानसिंह जोगा के अनुसार जिले को मिलने वाले डीएमएफटी और सीएसआर फंड का उपयोग स्थानीय विकास में होना चाहिए। फिलहाल यह राशि राजकीय कोष में जमा बताई जा रही है। माइंस मैनेजर आशिष परिहार का कहना है कि खनन लीज शर्तों के अनुरूप किया जा रहा है। जितने पेड़ कटते हैं, उनके बदले पौधरोपण किया जाता है। यदि किसी जल स्रोत पर प्रभाव पड़ता है तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।

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