बहरीन में ईरान के समर्थन में आवाज उठाना मिस्र के दो युवाओं को भारी पड़ गया है। बहरीन की अदालत ने ईरान का सपोर्ट करने वाले मिस्री के दो नागरिकों को 10-10 साल जेल की सजा सुनाई है।
यह फैसला उस वक्त आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव बहुत ज्यादा है। कई लोग इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला भी बता रहे हैं।
ईरान के हमलों के दौरान बढ़ा विवाद
जब ईरान ने बहरीन पर हमले किए, तब कई लोग सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर रहे थे और ईरान की तारीफ कर रहे थे। बहरीन की सरकार ने इसे देशद्रोह और सुरक्षा के लिए खतरा माना।
इन दो मिस्री नागरिकों पर आरोप है कि उन्होंने ईरानी हमलों की तस्वीरें और वीडियो शेयर किए और लोगों को ईरान के पक्ष में उकसाया।
सरकारी बयान के मुताबिक, ये लोग महत्वपूर्ण जगहों की तस्वीरें ले रहे थे और उन्हें विदेश भेज रहे थे। बहरैन की पब्लिक प्रॉसीक्यूशन ने कहा कि ऐसे कामों से देश की सुरक्षा को नुकसान पहुंचा।
विदेशी नागरिकों पर सख्ती क्यों?
बहरीन में कई विदेशी काम करते हैं। मिस्र से भी बड़ी संख्या में लोग वहां रोजगार के लिए जाते हैं। लेकिन जब सुरक्षा का सवाल आता है तो सरकार किसी को भी नहीं छोड़ रही। इस मामले में दो मिस्री युवाओं को 10-10 साल की सजा मिली है। साथ ही कई दूसरे लोगों को भी छोटी-बड़ी सजाएं हुई हैं।
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि कुल 25 से ज्यादा लोगों को ऐसे समर्थन के लिए सजा दी गई। पांच लोगों को तो उम्रकैद तक हो गई, जिनमें अफगान और बहरीन नागरिक शामिल हैं।
क्षेत्रीय तनाव का असर
बहरीन, सऊदी अरब और अमेरिका का करीबी सहयोगी है। ईरान के साथ इसका पुराना विवाद है। हाल के हमलों के बाद बहरीन सरकार ने 69 लोगों की नागरिकता भी छीन ली, जो ईरान के पक्ष में बोल रहे थे। यह फैसला दिखाता है कि खाड़ी देश अब सोशल मीडिया एक्टिविटी पर भी नजर रख रहे हैं।
मिस्र की प्रतिक्रिया का इंतजार
फिलहाल, मिस्र सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। मिस्र और बहरीन के रिश्ते अच्छे माने जाते हैं, लेकिन अपने नागरिकों की सुरक्षा भी उनके लिए महत्वपूर्ण है। परिवार वालों का कहना है कि वे अपील करेंगे और राजनयिक मदद मांगेंगे।





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