Matka Pani vs Fridge Ka Pani which is Better : गर्मी में हर कोई ठंडा पानी पीना चाहता है। पर, बात फंसती है कि मटके का पानी पिएं या फ्रिज का। इन दोनों में से किसका पानी पीना अधिक फायदेमंद है या किस हिसाब से चयन करना चाहिए। इसका जवाब हम पानी को लेकर हुए शोध व साइंटिफिक तथ्यों के आधार पर समझ सकते हैं। इससे आपको पानी का चयन करने में काफी मदद मिल सकती है।
क्या ज्यादा ठंडा पानी पीने से हार्ट रेट पर असर पड़ता है?
गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप से राहत पाने के लिए हम अक्सर फ्रिज का एकदम ठंडा पानी पीते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह तात्कालिक राहत आपके दिल की धड़कन (Heart Rate) के लिए कितनी सुरक्षित है? मेडिकल रिसर्च और विशेष रूप से PMC पर प्रकाशित “Response of Heart Rate to Cold Water Ingestion” ये बात स्पष्ट हो जाती है।
जब हम अचानक बहुत ठंडा पानी पीते हैं, तो यह हमारे गले और अन्नप्रणाली (Esophagus) के पास से गुजरने वाली वेगस नर्व (Vagus Nerve) को उत्तेजित कर सकता है। वेगस नर्व शरीर की सबसे लंबी नर्व है जो हृदय गति, पाचन और श्वसन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

हृदय गति में गिरावट (Bradycardia)
बहुत ठंडे पानी के संपर्क में आने से वेगस नर्व ‘शॉक’ की स्थिति में आ सकती है, जिससे हृदय गति अस्थायी रूप से कम हो सकती है। इसे वैज्ञानिक भाषा में ‘कोल्ड-इंड्यूस्ड ब्रैडीकार्डिया’ कहा जाता है।
थर्मल शॉक और ब्लड सर्कुलेशन
शरीर का सामान्य तापमान 37 डिग्री सेल्सियस (98.6 फारेनहाइट) होता है। जब इससे कम तापमान वाला पानी पीते हैं, तो शरीर इस तापमान को संतुलित करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा खर्च करता है, जिससे हृदय पर अचानक दबाव पड़ सकता है। साथ ही ठंडा पानी रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को संकुचित कर देता है, जिससे रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) में बाधा आ सकती है।
ठंडे पानी से गले में खराश
साथ ही जब हम अधिक ठंडा पानी पीते हैं तो इसका असर गले पर पड़ता है। कई लोगों को गले में खराश की दिक्कत होती है। इस हिसाब से भी ठंडा पानी नुकसान पहुंचाता है।
ठंडा पानी से किसे है ज्यादा खतरा?
स्वस्थ व्यक्तियों में यह प्रभाव आमतौर पर क्षणिक होता है, लेकिन जिन लोगों को पहले से ही हृदय रोग (Heart Disease) या एरिथमिया (Arrhythmia) की समस्या है, उनके लिए बहुत ठंडा पानी पीना जोखिम भरा हो सकता है।
क्या मटका का पानी फ्रिज के पानी से बेहतर है?
विशेषज्ञों का सुझाव है कि प्यास बुझाने के लिए मटके का पानी या सामान्य तापमान 20-25 डिग्री सेल्सियस या अधिकतम 36-37 डिग्री C तक सही हो सकता है। इससे अधिक ठंडा पानी नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में सुरक्षित विकल्प के तौर पर मटका का पानी है।
पानी का सही तापमान ध्यान रखें!
यह शोध स्पष्ट करता है कि पानी का तापमान केवल प्यास ही नहीं बुझाता, बल्कि हमारे शरीर के आंतरिक संतुलन (Homeostasis) को भी प्रभावित करता है। इसलिए, अगली बार चिल्ड पानी पीने से पहले अपने सेहत का ख्याल जरूर रखें।
डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न शोधों और वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य केवल जागरूकता बढ़ाना और शैक्षिक जानकारी प्रदान करना है। इसे किसी बीमारी के उपचार या डॉक्टरी सलाह के रूप में न लें। अपनी जीवनशैली या आहार में कोई भी बदलाव करने से पहले किसी योग्य चिकित्सक या संबंधित विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।


