Marco Rubio India Visit 2026: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो शनिवार को अपनी भारत यात्रा के पहले चरण में कोलकाता पहुंचे। यहां उन्होंने मदर टेरेसा से जुड़े मदर हाउस और उससे जुड़े चिल्ड्रंस होम का दौरा किया। उन्होंने कहा, ‘मदर टेरेसा ने करुणा और सेवा की एक महान विरासत छोड़ी है।’ इसके बाद वह नई दिल्ली पहुंचे। रूबियो की इस यात्रा से भारत-अमेरिका परमाणु ऊर्जा सहयोग को नई गति मिलने के संकेत हैं।
रणनीतिक सहयोग का नया चैप्टर
अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो के भारत दौरे में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, रणनीतिक तकनीक और रक्षा सहयोग प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। भारत के 2047 तक 100 गीगावॉट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने के लक्ष्य के चलते दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर सेक्टर रणनीतिक सहयोग का नया केंद्र बन रहा है।
अमरीका बड़ी भूमिका के लिए तैयार
रूबियो ने यात्रा से पहले ही कहा था कि अमेरिका भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने भारत को महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताते हुए ऊर्जा सहयोग को दोनों देशों के संबंधों का प्रमुख स्तंभ बताया। जानकारों का मानना है कि यह यात्रा भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु सहयोग को नई दिशा दे सकती है। भारत में अमेरिका राजदूत सर्जिओ गोर पहले ही परमाणु उर्जा सहयोग में आगे बड़े कदमों के संकेत दे चुके हैं।
स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर पर फोकस
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित वार्ता में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर), एडवांस्ड न्यूक्लियर रिएक्टर तकनीक, न्यूक्लियर फ्यूल सप्लाई, परमाणु सप्लाई चेन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हाल ही में ‘यूएस एग्जीक्यूटिव न्यूक्लियर मिशन टू इंडिया’ के तहत अमेरिकी परमाणु उद्योग का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भारत दौरे पर आया था। इसमें एडवांस्ड रिएक्टर, एसएमआर और न्यूक्लियर सप्लाई चेन से जुड़ी प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल थे। इन्होंने ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल, परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह और देवेन्द्र फड़नवीस के साथ बैठक कर स्वच्छ ऊर्जा निवेश, उन्नत परमाणु तकनीक और दीर्घकालिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की।
सीधे निवेश के लिए तैयार यूएस
अमेरिकी उद्योग जगत ने संकेत दिए हैं कि वे भारत में सीधे न्यूक्लियर रिएक्टर निर्माण और निवेश के लिए तैयार हैं। अमरीका आंध्र प्रदेश में प्रस्तावित कोव्वाडा परमाणु ऊर्जा परियोजना रणनीतिक साझेदारी कर रहा है। इसमें अमेरिकी तकनीक आधारित छह परमाणु रिएक्टर स्थापित किए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक की क्षमता 1,208 मेगावॉट होगी।
शांति एक्ट से आया बदलाव
शांति एक्ट 2025 ने देश में परमाणु उर्जा क्षेत्र में निजी और विदेशी निवेश के लिए रास्ता खोला है। भारत ने 2047 तक मौजूदा लगभग 8.8 गीगावॉट परमाणु क्षमता को बढ़ाकर 100 गीगावॉट तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। सरकार का मानना है कि चौबीसों घंटे स्थिर बिजली आपूर्ति के लिए न्यूक्लियर ऊर्जा भविष्य की बेसलोड पावर का अहम स्रोत बनेगी।
रिश्तों और ट्रेड डील पर फोकस
दोनों देशों के रिश्तों में टैरिफ को लेकर तनाव बढ़ गया था। अब अमरीका भारत के साथ ऊर्जा और व्यापार संबंध मजबूत करना चाहता है। पाकिस्तान से बढ़ते रिश्तों के बीच रूबियो की यात्रा को संतुलन बनाने के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रंप के चीन ने दौरे ने भारत की चिंता और बढ़ाई है। रूबियो के एजेंडे में भारत से ट्रेड डील को आगे बढ़ाने का मुद्दा भी होगा।


