March Inflation: भारत में मार्च 2026 के लिए महंगाई के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं, जो इकॉनोमी की स्थिति को समझने के लिए अहम संकेत देते हैं। फरवरी में महंगाई दर मार्च की तुलना में कम थी इसलिए बाजार को स्थिरता की उम्मीद थी। लेकिन मार्च में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स आधारित महंगाई दर बढ़कर 3.40 प्रतिशत हो गई, हालांकि यह अभी भी केंद्रीय बैंक के तय दायरे के भीतर है।
CPI महंगाई का डेटा
मार्च 2026 में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI आधारित महंगाई दर 3.40 प्रतिशत दर्ज की गई, जो फरवरी के 3.21 प्रतिशत से थोड़ी अधिक है। यह आंकड़ा ऑल इंडिया स्तर पर है और बेस ईयर 2024 के अनुसार मापा गया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का महंगाई टारगेट 4 प्रतिशत है, जिसमें 2 प्रतिशत का ऊपर-नीचे मार्जिन शामिल है। इस लिहाज से वर्तमान महंगाई दर 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में बनी हुई है, जो पॉलिसी के लिहाज से संतोषजनक स्थिति मानी जाती है।
| कैटेगरी | ऑल इंडिया (%) | ग्रामीण (%) | शहरी (%) |
|---|---|---|---|
| CPI महंगाई दर | 3.40 | 3.63 | 3.11 |
| फूड इंफ्लेशन (CFPI) | 3.87 | 3.96 | 3.71 |
| हाउसिंग इंफ्लेशन | 2.11 | 2.54 | 1.95 |
ग्रामीण-शहरी क्षेत्रों में महंगाई के आंकड़े
महंगाई के आंकड़ों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच अंतर साफ दिखाई देता है। ग्रामीण महंगाई 3.63 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.11 प्रतिशत रही। फूड महंगाई की बात करें तो यह 3.87 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें ग्रामीण क्षेत्र 3.96 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र 3.71 प्रतिशत रहा। हाउसिंग महंगाई अपेक्षाकृत कम रही और कुल मिलाकर 2.11 प्रतिशत दर्ज की गई। यह डेटा दिखाता है कि खाने-पीने की चीजों की कीमतें अभी भी महंगाई का मुख्य कारण बनी हुई हैं, हालांकि कुल स्तर नियंत्रित है।
सस्ते-महंगे सामान और भविष्य के संकेत
| आइटम | महंगाई दर (%) |
|---|---|
| प्याज (Onion) | -27.76 |
| आलू (Potato) | -18.98 |
| लहसुन (Garlic) | -10.18 |
| अरहर/तूर दाल | -9.56 |
| मटर व चना | -7.87 |
मार्च में कुछ जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में गिरावट भी देखने को मिली। प्याज में 27.76 प्रतिशत, आलू में 18.98 प्रतिशत और लहसुन में 10.18 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी ओर सिल्वर ज्वेलरी 148.61 प्रतिशत और गोल्ड-डायमंड ज्वेलरी करीब 45 प्रतिशत महंगी हुई। टमाटर और फूलगोभी की कीमतों में भी तेज उछाल देखा गया। हालांकि अभी महंगाई नियंत्रण में है, लेकिन ग्लोबल क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें आने वाले महीनों में दबाव बढ़ा सकती हैं, जिससे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ब्याज दरों में कटौती को लेकर सतर्क रुख अपना सकता है।


