Maharashtra Governor के फर्जी लेटरहेड से Railway टिकट रैकेट चलाने वाले भाइयों की जमानत खारिज

Maharashtra Governor के फर्जी लेटरहेड से Railway टिकट रैकेट चलाने वाले भाइयों की जमानत खारिज

मुंबई, सात सितंबर मुंबई की एक अदालत ने महाराष्ट्र के राज्यपाल कार्यालय के लेटरहेड, मुहर और हस्ताक्षर का फर्जी इस्तेमाल करके रेलवे आरक्षण का रैकेट चलाने के आरोपी दो भाइयों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस.बी. डिगे ने तीन सितंबर को दिए अपने आदेश में कहा कि यह एक ‘‘गंभीर अपराध’’ है और इस चरण में जमानत देने से निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच प्रभावित हो सकती है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस रैकेट का पता तब चला जब रेलवे विभाग ने राज्यपाल कार्यालय (लोक भवन) की ओर से भेजे गए वीआईपी (अति विशिष्ट व्यक्ति) श्रेणी के तहत आरक्षण के अनुरोधों के सत्यापन की मांग की।

लोक भवन के एक सहायक ने पाया कि आरक्षण पर्ची में इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षर, लेटरहेड और सरकारी मुहरें फर्जी थीं। इसके बाद मालाबार हिल थाने में मामला दर्ज किया गया। बाद में पुलिस ने धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और सबूत मिटाने जैसे अपराधों के लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत घाटकोपर के रहने वाले दो भाइयों -अमरीश ईश्वरलाल ठक्कर (41) और सागर ईश्वरलाल ठक्कर (32)- को गिरफ्तार किया।

अतिरिक्त लोक अभियोजक वीणा शेलार ने अदालत को बताया कि अमरीश ठक्कर ने राज्यपाल के निजी सहायक (पीए) के आधिकारिक लेटरहेड की डिजिटल प्रतियां हासिल कीं और सह-आरोपियों की मदद से नकली रबर स्टांप तैयार करवाए। पुलिस ने आरोपियों के पास से 10 नकली लेटरहेड, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और कई नकली रबर स्टांप बरामद किए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील अंजलि पाटिल ने दलील दी कि आरोपियों को झूठे मामले में फंसाया गया है।

पाटिल ने दलील दी कि शुरुआती प्राथमिकी में उनके नाम नहीं थे और पुलिस ने सभी जरूरी चीजें पहले ही जब्त कर ली थीं, जिनमें दस्तावेज और हस्ताक्षर के नमूने शामिल हैं। दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद अदालत ने कहा कि आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि आरोपी सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं, गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं या फरार हो सकते हैं।

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